
भागदौड़ भरी इस जीवन में सोशल मीडिया का दबाव, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य आज एक बड़ी चिंता बन चुका है। एक्ससपर्ट का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अब केवल बड़े शहरों तक नहीं रह गई बल्कि छोटे कस्बों और गांवों में भी तेजी से बढ़ रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल करोड़ों लोग तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी और अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे है, लेकिन जागरूकता की कमी और समाजिक झिझक के कारण लोग समय रहते मदद नहीं ले पाते। आखिर क्यों बढ़ रही हैं मानसिक बीमारियाँ? एक्सपर्ट ने इसके कई कारण बताए है:
- लगातार बढ़ता तनाव: नौकरी का दबाव, पढ़ाई में प्रतिस्पर्धा, आर्थिक असुरक्षा और रिश्तों में तनाव मानसिक दबाव को बढ़ाते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं जन्म लेती है।
- सोशल मीडिया का प्रभाव: सोशल मीडिया पर दूसरों की “परफेक्ट लाइफ” देखकर कई लोग खुद को कम आंकने लगते हैं। लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ मानसिक असंतुलन पैदा कर रही है जो मानसिक बीमारी का कारण बन रहा है।
- पूरी नींद न लेना : रात तक मोबाइल चलाना और अनियमित दिनचर्या नींद को प्रभावित करती है। पर्याप्त नींद न मिलने से मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
- बातचीत की कमी: परिवार और दोस्तों के साथ खुलकर बात न कर पाना भी मानसिक समस्याओं को बढ़ाता है। कई लोग अपनी भावनाओं को दबा लेते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हम आपको बताते है कि मानसिक स्वास्थ्य खराब होने से हमारी शरीर पहले से कई संकेत देती है जैसे :लगातार उदासी या निराशा रहना, किसी भी काम में मन न लगना, गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ जाना,भूख और नींद में बदलाव, आत्मविश्वास में कमी, बार-बार चिंता या डर महसूस होना। यदि ये सभी लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें तो डॉक्टर्स से संपर्क करना आवश्यक हो जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि युवाओं में बढ़ती चिंता कुछ सालों से छात्रों और युवाओं में मानसिक बीमारियों को जन्म दिया है जिससे आज के युवा आत्महत्या करने को भी तैयार हो जाते है, पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता और रिश्तों की समस्याएं इसकी मुख्य वजह हैं। फिलहाल अब तो कई कॉलेजों और स्कूलों में अब काउंसलिंग सेवाएं शुरू की जा रही हैं, जिससे छात्र अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जरूरी टिप्स :
1-नियमित व्यायाम और योग करें
2-रोज कम से कम 7–8 घंटे की नींद लें
3-संतुलित और पौष्टिक भोजन करें
4-परिवार और दोस्तों से खुलकर बातें करें
5-जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से संपर्क करें
6-सोशल मीडिया का उपयोग कम करें।
हमारे समाज में आज भी मानसिक समस्याओं को कमजोरी समझा जाता है। लोग डर के कारण इलाज कराने से कतराते हैं। लेकिन सच यह है कि मानसिक बीमारी भी एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसका इलाज संभव है। एक्सपर्ट का भी मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण होता है इसलिए इसे नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
इस गंभीर बीमारी को देखते हुए आज सरकार और निजी संस्थाएं भी इस दिशा में जागरूकता अभियान चला रही हैं इसके साथ ही हेल्पलाइन और ऑनलाइन काउंसलिंग सेवाएं लोगों को दे रही है जिससे आम लोगों को काफी सहायता मिल रही है।
तेजी से बदलती जीवनशैली के इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। समय रहते लक्षण पहचानना और मदद लेना ही सबसे बड़ा कदम है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो चुप न रहें बात करें, समर्थन लें और एक्सपर्ट की सलाह लें, क्योंकि स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है



