क्रॉनिक किडनी डिजीज का शिकार हो रहे युवा, बचने के लिए अपनाएं से आदतें

नई दिल्ली। बीते एक दशक में भारत में किडनी से जुड़ी बीमारियों में तेजी से इजाफा हो रहा है। यहां 30 साल से कम उम्र के युवा क्रॉनिक किडनी डिजीज का शिकार हो रहे हैं। कुछ साल पहले तक केवल उम्र दराज लोग ही इस बीमारी का शिकार होते थे, लेकिन बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर जैसी बढ़ती बीमारियों की वजह से अब युवा पीढ़ी भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आने लगी है।

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मौतों में 48 प्रतिशत का इजाफा

 क्रॉनिक किडनी डिजीज

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, किडनी की गंभीर समस्या के लिए 60 प्रतिशत तक डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जिम्मेदार है। हाल के मेटा एनालिसिस और कम्युनिटी आधारित अध्ययनों से पता चलता है कि, भारत में पंद्रह साल से अधिक उम्र के लोगों में क्रॉनिक किडनी डिजीज की कुल दर तेरह दशमलव चौबीस प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2011-17 के बीच यह दर ग्यारह दशमलव बारह प्रतिशत थी, जो 2018-23 के बीच बढ़कर 16.38 प्रतिशत हो गई।

दक्षिण भारत में यह दर सबसे अधिक 14.78  प्रतिशत दर्ज की गई जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में यह अधिक पंद्रह दशमलव चौंतीस प्रतिशत बनाम दस दशमलव पैंसठ प्रतिशत है। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के किडनी डिजीज डेटा सेंटर की स्टडी के अनुसार भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज की दर 17 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 2001-3 और 2010-13 के बीच किडनी फेलियर से होने वाली मौतों में 48 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

दुनिया में दूसरे स्थान पर भारत

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2023 के अनुसार भारत में 2023 में क्रॉनिक किडनी डिजीज के 138 मिलियन मामले थे जो चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। युवाओं में यह समस्या इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि कई मामलों में शुरुआती लक्षण नहीं दिखते और डायग्नोसिस देर से हो पाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की सेहत बिगाड़ने वाले मुख्य कारणों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर सबसे आगे हैं। ये दोनों बीमारियां किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। भारत में डायबिटीज की दर तेजी से बढ़ रही है और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर अब युवाओं में भी आम हो गया है। पानी कम पीना भी एक बड़ा कारण बन रहा है क्योंकि इससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं और किडनी पर दबाव बढ़ता है।

इन चीजों से बचें

धूम्रपान शराब का सेवन और मोटापा भी किडनी फंक्शन को खराब करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर खाना खासकर एनएसएआईडी जैसे दर्द निवारक दवाएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। जंक फूड में ज्यादा नमक प्रोसेस्ड फूड और चीनी का अधिक सेवन भी हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को बढ़ावा देकर किडनी की समस्या को और गंभीर बनाता है। इन सभी कारकों के कारण युवा पीढ़ी में क्रॉनिक किडनी डिजीज तेजी से बढ़ रही है।

बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर कम उम्र से ही कुछ अच्छी आदतें अपनाई जाएं तो इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।प्रतिवर्ष मार्च महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य किडनी की देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। 2026 में यह दिवस बारह मार्च को मनाया जाएगा जिसकी थीम है किडनी हेल्थ फॉर ऑल केयरिंग फॉर पीपल प्रोटेक्टिंग द प्लैनेट। यह थीम किडनी स्वास्थ्य को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है क्योंकि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भी क्रॉनिक किडनी डिजीज के जोखिम कारक बन रहे हैं। भारत में इस दिन स्क्रीनिंग कैंप जागरूकता सेमिनार और स्वास्थ्य जांचें आयोजित की जाती हैं।

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फल और सब्जियों का सेवन करें

विशेषज्ञों का कहना है कि, समय पर जांच और रोकथाम के उपायों से लाखों मामलों को रोका जा सकता है। डॉक्टरों और नेफ्रोलॉजिस्ट्स के अनुसार रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव से किडनी को मजबूत बनाया जा सकता है। भोजन में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ानी चाहिए क्योंकि ये विटामिन खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करते हैं। सोडियम यानी नमक चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करना चाहिए। ज्यादा प्रोटीन और तले हुए भोजन से बचना भी जरूरी है। संतुलित आहार से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहते हैं।

व्यायाम करें

रोजाना तीस से पैंतालीस मिनट व्यायाम जैसे वॉकिंग साइक्लिंग या योग करना चाहिए। व्यायाम से रक्त संचार बेहतर होता है वजन नियंत्रित रहता है और डायबिटीज ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां काबू में रहती हैं। बैठे रहने वाली जीवनशैली क्रॉनिक किडनी डिजीज का बड़ा कारण है। दिन में ढाई से तीन लीटर पानी पीना आवश्यक है ताकि टॉक्सिन बाहर निकल सकें और किडनी पर बोझ कम पड़े। अगर डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, तो नियमित जांच और दवाओं का सेवन समय पर करें। धूम्रपान और शराब पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए क्योंकि ये सीधे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। दर्द निवारक दवाएं बिना सलाह के नहीं लेनी चाहिए। साल में एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट जैसे क्रिएटिनिन और ईजीएफआर कराना चाहिए खासकर अगर परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास हो तो।

ये लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करें

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और रोकथाम ही इस बढ़ती समस्या का सबसे मजबूत हथियार है। अगर थकान सूजन पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर ध्यान देकर किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है और गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

 

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