
क्या आपको भी बार-बार गुस्सा आता है। अगर ऐसा है, तो सतर्क हो जाइये, क्योंकि दिल की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है। इस बात का खुलासा हाल ही में हुई रिसर्च में हुआ है। शोध से पता चल रहा है कि, महज कुछ मिनट का तीव्र क्रोध भी शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर देता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
280 लोगों पर हुआ शोध
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में मई 2024 में प्रकाशित इस अध्ययन पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। ये शोध कोलंबिया यूनिवर्सिटी इरविंग मेडिकल सेंटर के प्रोफेसर डॉ. दैची शिम्बो की अगुवाई में किया गया। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) का फंडिंग भी शामिल था। शोध में 26 वर्ष के 280 स्वस्थ लोगों को शामिल किया था। इनमें से किसी को भी पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारियां नहीं थीं।
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अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि, नकारात्मक भावनाएं, खासकर गुस्सा, रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता पर किस तरह से प्रभाव डालती है। सभी युवाओं को चार अलग-अलग समूहों में बांटा गया। हर समूह को आठ मिनट तक एक खास कार्य करने को बोला गया। एक समूह से कहा गया कि वे अपनी जिंदगी की ऐसी घटना को याद करें और जोर से बोलकर बताएं, जिससे उन्हें बहुत गुस्सा आया था। दूसरे समूह को चिंता पैदा करने वाली यादें ताजा करने को कहा गया। तीसरे समूह को उदासी भरी कहानियां पढ़ने को दी गईं। चौथा समूह नियंत्रण समूह था, जिसमें लोगों को बस 1 से 100 तक गिनती गिननी थी, ताकि कोई भावनात्मक प्रभाव न पड़े।

इस कार्य के पहले और बाद में वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की रक्त वाहिकाओं की स्थिति की जांच की। खास तौर पर ब्रैकियल आर्टरी में एंडोथीलियम-डिपेंडेंट वासोडिलेशन की क्षमता मापी गई। यह क्षमता रक्त वाहिकाओं के फैलने और रक्त प्रवाह को सुचारू रखने के लिए बहुत जरूरी होती है।
सख्त पड़ जाती हैं धमनियां
अगर यह क्षमता कम हो जाए तो धमनियां सख्त पड़ सकती हैं, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। यह स्थिति हार्ट अटैक और स्ट्रोक की मुख्य वजह बन सकती है। परिणाम बेहद चौंकाने वाले निकले, जिन लोगों ने गुस्से वाली यादों को ताजा किया, उनकी रक्त वाहिकाओं की फैलने की क्षमता में काफी गिरावट आई। यह कमी कार्य शुरू होने के तुरंत बाद से लेकर 40 मिनट तक बनी रही। कुछ मामलों में यह क्षमता आधी से भी कम हो गई, लेकिन चिंता या उदासी वाले समूह में ऐसा कोई खास असर नहीं दिखा यानी गुस्सा अन्य नकारात्मक भावनाओं से अलग तरीके से शरीर पर असर डालता है और यह दिल-रक्त वाहिकाओं के लिए ज्यादा खतरनाक साबित होता है।
पहुंचा सकता है स्थायी नुकसान
वैज्ञानिकों का कहना है कि, गुस्से के दौरान शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे एड्रेनालिन और कोर्टिसोल का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। ये हार्मोन रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत, जिसे एंडोथीलियम कहते हैं, को प्रभावित करते हैं। इससे वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और फैलने की उनकी प्राकृतिक क्षमता कम हो जाती है। रक्त प्रवाह बाधित होता है, रक्तचाप बढ़ सकता है और धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। एक बार का ऐसा असर स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बार-बार गुस्सा करता है, तो रक्त वाहिकाओं को ठीक होने का मौका नहीं मिलता। समय के साथ यह क्रमिक चोट धमनियों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
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सर्तक रहें हृदय रोगी
डॉ. शिम्बो ने कहा कि यह अध्ययन पहली बार प्रयोगात्मक तरीके से साबित करता है कि, गुस्सा रक्त वाहिकाओं की एंडोथीलियल डिसफंक्शन की वजह बन सकता है और गंभीर बीमारी को जन्म दे सकता है। पहले के कई अवलोकन अध्ययनों में भी गुस्से वाले लोगों में हृदय रोग की घटनाएं ज्यादा पाई गई थीं। अब यह रिसर्च उस तंत्र को समझाने में मदद करती है। अगर कोई व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता है या चिड़चिड़ा रहता है, तो यह आदत दिल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यह खोज उन लोगों के लिए चेतावनी है जो पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित है।
ऐसे दूर करें तनाव
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, गुस्से को नियंत्रित करना स्वास्थ्य के लिए उतना ही जरूरी है, जितना व्यायाम या संतुलित आहार। अगर गुस्सा बार-बार आता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस पर सकरात्मक तरीके से काम करना चाहिए। तनाव दूर करने के उपाय अपनाने चाहिए। जैसे कि गहरी सांस लेना, ये तकनीक सबसे सरल और प्रभावी है। जब गुस्सा आए…तो चार सेकंड तक शांत रहकर सांस अंदर लें, फिर चार सेकंड रोकें और चार सेकंड में बाहर छोड़ें। इससे पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है और हार्मोन संतुलित हो जाता है।
नियमित शारीरिक गतिविधि भी बहुत फायदेमंद है। रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, जॉगिंग या साइकिल चलाना एंडोर्फिन्स रिलीज करता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और दिल को मजबूत रखता है। योग और ध्यान भी गुस्से को काबू करने में कारगर साबित हुए हैं।
माइंडफुलनेस मेडिटेशन से व्यक्ति अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ और नियंत्रित कर पाता है। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़ा फर्क ला सकते हैं। जैसे कि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से दूर रहना तथा वजन को नियंत्रित रखना दिल की सुरक्षा बढ़ाता है। अगर गुस्सा बहुत ज्यादा है और रोजाना की जिंदगी प्रभावित हो रही है तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लेना चाहिए। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसी विधियां गुस्से के पैटर्न को बदलने में मदद करती हैं।
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