नई दिल्ली: सर्दियों में बाजार हरी सब्जियों से भरे रहते हैं, लेकिन हरी प्याज (Spring Onion) एक ऐसी सब्जी है जिसे आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही सुपरफूड मानते हैं। यह प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है और फेफड़ों को स्वस्थ रखने, शरीर में अंदरूनी गर्माहट बनाए रखने में मदद करती है।

इम्युनिटी और श्वसन तंत्र के लिए वरदान
सर्दियों की शुरुआत होते ही शरीर संवेदनशील हो जाता है और ठंडी हवाओं से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं की सलाह देते हैं, लेकिन हरी प्याज में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाकर इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। श्वसन मार्ग की सूजन कम करने और फेफड़ों में जमा कफ को हटाने में यह बेहद उपयोगी है। आयुर्वेद के अनुसार, हरी प्याज की प्रकृति उष्ण है, जो सर्दियों में शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखती है।
हड्डियों और रक्त के लिए महत्वपूर्ण
हरी प्याज विटामिन के का भी शानदार स्रोत है, जो हड्डियों के घनत्व को बनाए रखता है और उन्हें कमजोर होने से रोकता है। इसके अलावा, यह रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को संतुलित करता है, जिससे चोट लगने पर अत्यधिक खून बहने का खतरा कम होता है।
दिल की सेहत और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण
हरी प्याज में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है, जो रक्त में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। नियमित सेवन से धमनियां साफ रहती हैं और हृदय रोगों का खतरा घटता है। साथ ही, यह पाचन तंत्र को भी मजबूती प्रदान करता है।
हरी प्याज का सही सेवन तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार, हरी प्याज को अधिक पकाने से इसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इसे कच्चा सलाद में, सूप या पास्ता में गार्निश के रूप में इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद है। पत्तियों से लेकर डंठल तक हर हिस्सा स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है।
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