अगर चलते समय आपकी भी फूलने लगती है सांस, तो सर्तक हो जाएं, हो सकती है दिल की बीमारी की दस्तक

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर छोटी-मोटी शारीरिक तकलीफों को थकान या बढ़ती उम्र का तकाजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। घर की सीढ़ियां चढ़ना हो, बाजार तक पैदल जाना हो या घर के भीतर ही चहल-कदमी करना। अगर इन सामान्य गतिविधियों के दौरान आपकी सांस फूलने लगती है या आप असामान्य थकान महसूस करते हैं, तो ठहर जाइए। यह केवल फेफड़ों की कमजोरी नहीं, बल्कि आपके दिल की ओर से दी जा रही एक गंभीर चेतावनी हो सकती है।

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समय रहते शुरू करें इलाज

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सांस का फूलना या थोड़ी सी मेहनत में हांफने लगना हृदय रोग या दिल की मांसपेशियों के कमजोर होने का शुरुआती संकेत हो सकता है। जब दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप करने में सक्षम नहीं होता, तो शरीर इसी तरह के संकेत देता है, जिसे हम अक्सर  सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं लेकिन ये भविष्य में हार्ट फेलियर या कार्डियक अरेस्ट जैसे जानलेवा खतरों की आहट हो सकता है। इसे नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, जिससे समय रहते इलाज किया जा सके और जान बच सके।

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि,चलते समय सांस फूलना हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज या अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का प्रमुख लक्षण है। जब दिल शरीर में पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पाता, तो मांसपेशियों और अंगों तक ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे सामान्य गतिविधियों में भी व्यक्ति की सांस फूलने लगती है।

क्यों होता है सांस फूलना?

हार्ट की सामान्य कार्यक्षमता में कमी आने पर शरीर को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। जब कोई व्यक्ति चलता है या हल्की एक्सरसाइज करता है, तो शरीर की मांसपेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। स्वस्थ दिल इस मांग को आसानी से पूरा कर लेता है, लेकिन कमजोर दिल में ब्लड पंपिंग की क्षमता घट जाती है। नतीजा? फेफड़े तेजी से काम करते हैं, सांस तेज हो जाती है और व्यक्ति को लगता है कि सांस नहीं आ रही।

सांस

चिकित्सक कहते हैं कि, अक्सर इसे उम्र बढ़ने, वजन बढ़ने, फिटनेस की कमी या सांस की बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बढ़ रही है और आराम करने पर भी राहत नहीं मिल रही, तो यह हार्ट फेलियर का शुरूआती संकेत है। कई मामलों में यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज का भी प्रारंभिक लक्षण होता है, जहां धमनियों में प्लक जमा होने से ब्लड फ्लो कम हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार भी, Dyspnea on Exertion हार्ट फेलियर का सबसे आम और शुरुआती लक्षण है। इसमें सांस फूलना शुरुआत में सिर्फ मेहनत के दौरान होता है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर आराम करते समय या लेटते समय भी समस्या हो सकती है। महिलाओं में यह लक्षण अक्सर छाती दर्द के बिना भी दिखाई देता है, जिससे डायग्नोसिस में देरी हो जाती है।

कब गंभीर हो जाती स्थिति
  • अगर पैदल चलते समय 5-10 मिनट में ही सांस फूल जाए।
  • रात में अचानक सांस फूलकर जागना
  • लेटते समय सांस लेने में तकलीफ, कई तकिए लगाकर सोना पड़ना।
  • पैरों, टखनों या पेट में सूजन आना।
  • थकान, कमजोरी, चक्कर आना या ठंडा पसीना आना।

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, इन लक्षणों को हल्के में लेना खतरनाक है। कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब हार्ट फेलियर एडवांस स्टेज में होता है। समय रहते जांच से दवाओं, लाइफस्टाइल बदलाव या जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी/स्टेंट से बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है।

ये जांच करवाएं
  • ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम): दिल की विद्युतीय गतिविधि जांचता है।
  • 2D इकोकार्डियोग्राफी: दिल की पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction) और संरचना देखती है।
  • स्ट्रेस टेस्ट या ट्रेडमिल टेस्ट: व्यायाम के दौरान दिल की स्थिति मॉनिटर करता है।
  • ब्लड टेस्ट: NT-proBNP स्तर, जो हार्ट फेलियर का संकेत देता है।
  • कोरोनरी एंजियोग्राफी: अगर CAD का शक हो तो धमनियों की ब्लॉकेज देखी जाती है।

ये जांचें जल्दी करवाने से हार्ट अटैक या गंभीर फेलियर से बचा जा सकता है।

हार्ट की सेहत कैसे बचाएं?

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एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, हार्ट डिजीज से बचाव के लिए ये आदतें अपनाएं।

  • रोजाना एक्सरसाइज: कम से कम 30-45 मिनट वॉक, साइकिलिंग या योगा करें। शुरुआत धीरे-धीरे करें।
  • संतुलित आहार: कम नमक, कम तेल-चीनी, ज्यादा फल-सब्जियां, साबुत अनाज और दालें लें। सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट से परहेज करें।
  • धूम्रपान और शराब छोड़ें: स्मोकिंग हार्ट डिजीज का सबसे बड़ा खतरा है।
  • वजन कंट्रोल: BMI 18.5-24.9 के बीच रखें। मोटापा हार्ट पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
  • बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल चेक: नियमित जांच करवाएं और दवाएं समय पर लें।
  • तनाव कम करें: ध्यान, मेडिटेशन या हॉबी से स्ट्रेस मैनेज करें।
  • पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।

भारत में हार्ट डिजीज मौत का प्रमुख कारण बन चुका है। ICMR और WHO के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल लाखों लोग हार्ट अटैक और फेलियर से प्रभावित होते हैं। युवाओं में भी यह समस्या बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण अस्वास्थ्यकर जीवनशैली है।

चिकित्सक कहते हैं कि, सांस फूलना कोई छोटी बात नहीं। यह शरीर का चेतावनी सिग्नल है कि दिल को मदद की जरूरत है। समय रहते डॉक्टर से मिलें, जांच करवाएं और स्वस्थ जीवन जिएं। एक छोटी सी सावधानी आपकी जिंदगी बचा सकती है।

 

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