क्यों सिर पर चढ़ती है गैस?, न करें नजरंदाज, बन सकती है बड़ी बीमारी की वजह, जानें लक्षण और इलाज

आपने कई बार लोगों को कहते सुना होगा कि सिर पर गैस चढ़ गई है, जिससे सिरदर्द में हो रहा है। वैसे तो ये बात सुनने में मजाक जैसी लगती है, लेकिन मेडिकल साइंस में इसे गैस्ट्रिक हेडेक या गैस से होने वाला सिरदर्द माना जाता है। यह कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि पेट की गड़बड़ी का एक लक्षण है, जो दिमाग तक पहुंचकर दर्द पैदा कर सकता है।

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हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अगर इसे बार-बार अनदेखा किया जाए, तो यह क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, अल्सर या अन्य गंभीर पाचन संबंधी समस्याओं की वजह बन सकता है।

क्या है गैस्टिक सिर दर्द

यह एक सेकेंडरी हेडेक है, यानी इसका मूल कारण सिर में नहीं, बल्कि पेट या आंतों में छिपा होता है। जब पेट में गैस, ब्लोटिंग, अपच, एसिड रिफ्लक्स या इंडाइजेशन होता है, तो यह दबाव वैगस नर्व में माध्यम से दिमाग तक पहुंचता है। वैगस नर्व पेट और ब्रेन के बीच का मुख्य कनेक्शन है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस के नाम से भी जाना जाता है। इस वजह से पेट की समस्या सिर में दर्द, भारीपन या धड़कन जैसा महसूस करा सकती है।

 गैस्ट्रिक हेडेक

भारत में लाखों लोग इसे गैस से होने वाला सिरदर्द बताते हैं और ठीक करने के लिए घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, लेकिन डॉक्टर का कहना है कि, बार-बार होने गैस्टिक सिर दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। वरना आगे चल कर ये गंभीर समस्या बन सकती है।

कैसे होता है यह सिरदर्द

ये समस्या ज्यादा मसालेदार या तला-भुना खाना, फास्ट फूड, ज्यादा चाय-कॉफी, अनियमित भोजन समय, मील स्किप करना, ज्यादा कैफीन या शराब से होती है। इन चीजों के खाने से पेट में जो गैस बनती है, वह डायफ्राम पर दबाव डालती है और नर्व्स को इरिटेट करती है। इसके अलावा, GERD (गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज), IBS (इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), हेलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन, कब्ज या फूड इंटॉलरेंस भी इसका कारण बन सकते हैं। कुछ हेल्थ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि, GERD या IBS वाले लोगों में हेडेक की शिकायत ज्यादा होती है। कई मामलों में पेट का इलाज करने से सिरदर्द में 70-90 प्रतिशत राहत मिल जाती है।

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लक्षण क्या-क्या होते हैं?

गैस्ट्रिक हेडेक सिर्फ सिर में दर्द तक ही सीमित नहीं रहता। इसमें माथे, कनपटियों या पूरे सिर में सुस्त, दबाव वाला या धड़कता दर्द महसूस होता है। साथ में पेट फूलना, ब्लोटिंग, बार-बार डकार आना, गैस पास होना, मतली, उल्टी, अपच या हार्टबर्न जैसे लक्षण दिखते हैं। कुछ लोगों में थकान, चिड़चिड़ापन, नींद न आना या रोशनी-आवाज से परेशानी भी होती है। अगर यह गैस्ट्रिक माइग्रेन जैसा हो जाए, तो दर्द तीव्र हो जाता है और बच्चों में ज्यादा देखा जाता है। सामान्य गैस्ट्रिक हेडेक हल्का और लगातार रहता है, जबकि गैस्ट्रिक माइग्रेन में धड़कन जैसा दर्द और मितली-उल्टी होना आम है।

कितनी खतरनाक हो सकती है यह समस्या

अगर कभी-कभी ये समस्या होती है, तो चिंता वाली बात नहीं है, लेकिन हफ्ते में दो-तीन बार या रोजाना होने लगे तो यह गंभीर हो सकता है। लंबे समय तक अनदेखा करने पर क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस (पेट की लाइनिंग में लगातार सूजन), पेप्टिक अल्सर (पेट या ड्यूोडेनम में घाव), GERD से एसोफैगस डैमेज, गालब्लैडर स्टोन्स या IBS जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं। कुछ मामलों में वजन बिना कारण कम होना, लगातार उल्टी, ब्लडिंग या यहां तक कि कैंसर जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं।

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हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अगर सिरदर्द के साथ वजन भी घटने लगे, तेज पेट दर्द या घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए और इलाज शुरू करना चाहिए। एंडोस्कोपी या अन्य जांच से पेट की असली समस्या पता चल सकती है।

इलाज और रोकथाम  

गैस्टिक की समस्या होने पर दर्द निवारक दवाओं का सहारा नहीं लेना चाहिए, बल्कि पाचन शक्ति पर ध्यान देना चाहिए और उसे सुधारना चाहिए। डॉक्टर अक्सर एंटासिड, प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (PPI) या गैस रिलीफ दवाएं देते हैं, लेकिन  स्थायी इलाज के लिए जीवन शैली के बदलाव जरूरी है। जैसे कि,  समय पर छोटे-छोटे मील लें, हल्का और संतुलित आहार (फाइबर युक्त फल-सब्जियां) लें, हर दिन कम से कम  8 से 10 गिलास पानी पिएं, मसालेदार, तला-भुना, ज्यादा कैफीन या शराब से बचे।

डॉक्टर से करें सपंर्क

गैस बन जाने पर  गुनगुना पानी में काला नमक और नींबू मिलाकर पीना, छाछ, अदरक-नींबू पानी, सौंफ चबाना, तुलसी या पुदीना चाय जैसे घरेलू उपाय तुरंत राहत देते हैं। योग, मेडिटेशन और रेगुलर एक्सरसाइज से तनाव कम होता है, जो गैस और हेडेक दोनों को कंट्रोल करता है। बाएं करवट सोना एसिड रिफ्लक्स कम करता है। डॉक्टरों का मानना है कि गट हेल्थ ठीक करने से हेडेक में काफी सुधार आता है। अगर आप भी सिर पर गैस चढ़ गई कहकर सिर दर्द को इग्नोर कर रहे हैं, तो न करने। शीघ्र पेट की जांच कराएं, इलाज व परहेज शुरू करें।

 

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