
राजस्थान। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन दिनों राजस्थान के बीकानेर दौरे पर हैं। मंगलवार को उन्होंने बीकानेर के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बीएसएफ को सिर्फ पारंपरिक सीमा सुरक्षा से आगे बढ़कर व्यापक सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभाने का स्पष्ट संदेश दिया।
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शाह ने प्रहरी सम्मेलन को किया संबोधित
शाह ने कहा कि, अब सुरक्षा की अवधारणा बदल चुकी है। केवल सीमा रेखा पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक की पूरी क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बीएसएफ की जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित सांचू पोस्ट पहुंचकर गृह मंत्री ने प्रहरी सम्मेलन को संबोधित किया।

उन्होंने बीएसएफ के जवानों को संबोधित करते हुए जोर दिया कि, बल को अपनी पारंपरिक ड्यूटी से आगे निकलकर नए सुरक्षा आयामों पर काम करना होगा। अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि, बीएसएफ को सीमा से लगे 50 किलोमीटर के दायरे में होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि पर सतर्क नजर रखनी चाहिए। खासकर सीमावर्ती गांवों में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण की सूचना तुरंत सिविल प्रशासन और स्थानीय पुलिस को देनी होगी।
महिला बैरकों का ई-उद्घाटन
दौरे के दौरान अमित शाह ने बीकानेर में बीएसएफ की महिला बैरकों का ई-उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, सीमा सुरक्षा अब केवल तार, दीवार या चौकियों तक सीमित नहीं रह सकती। सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक के क्षेत्र में पूर्ण निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि, यदि सीमावर्ती गांवों की आबादी में कोई अस्वाभाविक या अचानक बदलाव दिखाई दे, तो राज्य सरकार को तुरंत सूचित किया जाए। यह बदलाव आतंकवाद, घुसपैठ या अन्य सुरक्षा खतरों का संकेत हो सकता है।
गृह मंत्री ने ड्रोन के माध्यम से हो रही हथियारों और नारकोटिक्स की तस्करी को वर्तमान समय का सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, ड्रोन भारत की जमीन पर उतरता है, उसे कौन रिसीव करता है और सामग्री का इस्तेमाल कौन करता है, इस पूरी चेन पर हमारी पैनी नजर होनी चाहिए। गृह मंत्री ने ऐलान किया कि, भारत सरकार अगले छह महीने के अंदर ड्रोन रोधी सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। यह व्यवस्था न केवल ड्रोन को रोकने में सक्षम होगी बल्कि उसके संचालक और रिसीवर तक पहुंचने में भी मदद करेगी।
सुरक्षा का मॉडल खींचा
अमित शाह ने इस मौके पर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा मॉडल का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि BSF, भारतीय सेना, स्थानीय नागरिक और राज्य सरकार मिलकर एक फोर लेयर सिक्योरिटी ग्रिड तैयार करेंगे। इसे केवल चार स्तर की सुरक्षा नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी वाला सुरक्षा मॉडल माना जाना चाहिए। इस मॉडल में हर पक्ष की भूमिका स्पष्ट और सक्रिय होगी।
उन्होंने बताया कि, हाल ही में बिहार के सीमांचल क्षेत्र में उन्होंने इसी मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। अब इसी तर्ज पर कच्छ बॉर्डर, त्रिपुरा बॉर्डर और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिन सीमाओं की सुरक्षा बीएसएफ संभालती है, वहां इस चार स्तरीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
2014 के बाद सुरक्षा नीति में बदलाव
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, वर्ष 2014 के बाद भारत की सुरक्षा नीति में व्यापक परिवर्तन आया है। सेना और बीएसएफ दोनों का तेजी से आधुनिकीकरण हो रहा है। जहां पहले हमला होने के बाद जवाबी कार्रवाई की जाती थी, अब नीति पूरी तरह से पूर्व सक्रिय हो चुकी है। उन्होंने कहा, हमारी जिम्मेदारी ऐसी मजबूत सीमाएं बनाना है कि दुश्मन हमला करने की हिम्मत ही न कर सके। उन्होंने जोर दिया कि सीमा पार से आने वाले खतरों के साथ-साथ देश के अंदर मौजूद उन तत्वों पर भी सतर्क नजर रखनी होगी, जिनका दुश्मन ताकतें इस्तेमाल करती हैं। यह आंतरिक सुरक्षा और बाहरी खतरे के बीच समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
राजस्थान की सीमा का महत्व
बीकानेर और राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। रेगिस्तानी इलाके, लंबी सीमा रेखा और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां यहां सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं। अमित शाह के इस दौरे और दिए गए दिशा-निर्देशों से स्पष्ट है कि, केंद्र सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।

बीएसएफ के जवानों की भूमिका अब केवल सीमा पर गश्त तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें गांवों, आबादी, अवैध निर्माण, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और नई तकनीकी चुनौतियों (जैसे ड्रोन) पर भी नजर रखनी होगी। यह बदलाव बीएसएफ को एक व्यापक सुरक्षा एजेंसी के रूप में स्थापित करेगा।
सीमाओं की सुरक्षा पर जोर
अमित शाह का यह संदेश न केवल बीएसएफ के जवानों के लिए बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र के लिए एक नई दिशा प्रदान करता है। 50 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा, ड्रोन रोधी व्यवस्था, चार स्तर का सुरक्षा ग्रिड, आंतरिक और बाहरी खतरों पर एक साथ नजर और पूर्व सक्रिय रणनीति’ ये सभी तत्व मिलकर भारत की सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
सरकार का प्रयास है कि हमला होने की स्थिति ही न बने। दुश्मन को पहले से ही यह अहसास हो जाए कि, भारत की सीमाएं अतिक्रमण या घुसपैठ के लिए अभेद्य हैं।
अमित शाह के बीकानेर दौरे और उनके दिए गए संदेश से यह साफ है कि भारत अब सीमा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाने को तैयार है।
यह नई सुरक्षा नीति न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की अन्य संवेदनशील सीमाओं चाहे वह पश्चिम हो, पूर्व हो या उत्तर-पूर्व पर लागू होंगी। मजबूत सीमा, सतर्क नागरिक, समन्वित प्रशासन और आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा बल यही भारत की आने वाली सुरक्षा व्यवस्था की नींव है।
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