पेट्रोल के बाद अब डीजल में भी मिलावट, जानें क्या है बी5 फ्यूल और कितनी होगी बायोडीजल की मात्रा

 नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाए जाने को लेकर पिछले कुछ समय से खासा विवाद चल रहा है। कई वाहन मालिकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि इस मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों में खराबी आ रही है। हालांकि, इन तमाम शिकायतों और विरोध के सरकार ने अब तक इस नीति को वापस लेने का कोई इरादा नहीं दिखाया है। इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, सरकार पेट्रोल के बाद अब डीजल में भी मिलावट लाने की तैयारी में जुट गई है, जिस तरह बाजार में पहले से ई20 पेट्रोल उपलब्ध है, ठीक उसी तर्ज पर आने वाले समय में बी5 डीजल भी पेश किया जाएगा।

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आखिर कितने प्रतिशत होगी मिलावट

दरअसल, पेट्रोल में ई20 फॉर्मूला लागू करने के बाद अब सरकार जल्द ही बी5 फ्यूल को बाजार में उतारने की योजना पर काम कर रही है। यह भी एक तरह का मिश्रित डीजल ही होगा, जिस तरह पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर उसे ई20 पेट्रोल का नाम दिया गया था।

Diesel Blending

ठीक उसी तर्ज पर 95 प्रतिशत सामान्य डीजल में 5 प्रतिशत जैविक ईंधन यानी बायोडीजल मिलाकर बी5 डीजल तैयार किया जाएगा। सरकार का दावा है कि, इस मिश्रित ईंधन को किसी भी वाहन के इंजन में बिना कोई तकनीकी बदलाव किए आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा यानी उपभोक्ताओं को इसके लिए अपनी गाड़ी में कोई अलग से संशोधन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

जटरोफा और करंजिया से तैयार होगा बायोडीजल

इंडियन ऑइल की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह बायोडीजल मुख्य रूप से जटरोफा और करंजिया नामक वनस्पति से बनाया जाएगा। ये दोनों ही ऐसे वनस्पति तेल हैं, जिनका इस्तेमाल खाने-पीने में बिल्कुल भी नहीं किया जाता। यही वजह है कि, इन दोनों वनस्पतियों के इस्तेमाल से खाद्य तेलों की सप्लाई पर कोई असर डाले बिना अच्छी गुणवत्ता का बायोडीजल तैयार किया जा सकता है, जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से एक फायदेमंद विकल्प माना जा रहा है।

पहले भी हो चुका है परीक्षण

गौरतलब है कि, सरकार इस बायोडीजल को लेकर यह कोई पहला प्रयोग नहीं कर रही है। इससे पहले भी बायोडीजल का उत्पादन और उसका विस्तृत परीक्षण किया जा चुका है, जो पूरी तरह सफल रहा है। हरियाणा रोडवेज, भारतीय रेलवे और टाटा जैसी बड़ी कंपनियों के सहयोग से 5 से 10 प्रतिशत तक बायोडीजल मिलाकर व्यापक स्तर पर परीक्षण किया गया था, जिसके नतीजे उत्साहजनक रहे और इंजन की परफॉर्मेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया।

विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना है मकसद

बायोडीजल लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य वही है, जो पेट्रोल में ई20 लागू करने के पीछे रहा है। सरकार का मानना है कि, कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर लगातार निर्भर बने रहना देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिहाज से सही नहीं है। ऐसे में घरेलू स्तर पर ही ईंधन का उत्पादन बढ़ाना कहीं ज्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। इससे न सिर्फ आयात पर होने वाला भारी खर्च कम होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

प्रदूषण नियंत्रण में भी मिलेगी मदद

इस पहल का एक और अहम पहलू पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। सरकार का मानना है कि, इस मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण के स्तर को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा, जिससे शहरों की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

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उल्लेखनीय है कि, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए तय किया गया ई20 का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित समय-सीमा से भी पहले हासिल कर लिया था, जो इस नीति की सफलता का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। इसी सफलता से उत्साहित होकर अब सरकार ने डीजल में बायोडीजल मिलाने को लेकर भी एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और साल 2030 तक इसे पूरे देश में व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

एक साथ कई मोर्चों पर काम करने की कोशिश

कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार की यह पहल एक साथ कई मोर्चों पर काम करने की कोशिश है। एक तरफ देश को आयातित ईंधन पर निर्भरता से मुक्त करना, दूसरी तरफ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना, और तीसरी तरफ घरेलू कृषि और वनस्पति उत्पादन को बढ़ावा देना।

हालांकि, जिस तरह से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के बीच शिकायतें और आशंकाएं बनी हुई हैं, उसे देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि बायोडीजल को लेकर आम लोगों और वाहन निर्माता कंपनियों की क्या प्रतिक्रिया रहती है। फिलहाल सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि इस नई ईंधन नीति को बिना किसी बड़ी तकनीकी अड़चन के देशभर में सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

 

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