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सीएम योगी का अखिलेश यादव पर सीधा वार, ‘डकैतों का गिरोह है सपा’

देवरिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देवरिया की धरती से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने समाजवादी पार्टी को सीधे तौर पर ‘डकैतों का गिरोह’ करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने अपनी ‘अय्याशी’ के लिए प्रदेश के खजाने पर डकैती डाली। मुख्यमंत्री का यह बयान देवरिया में आयोजित एक बड़े सरकारी कार्यक्रम के दौरान आया, जहां उन्होंने विकास परियोजनाओं की सौगात देने के साथ-साथ विपक्षी दलों की नीतियों पर जमकर निशाना साधा।

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राघव बाबा के जिक्र से शुरुआत 

अपने संबोधन की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह वही देवरिया है जहां कांग्रेस शासनकाल में विरोध के बावजूद कांग्रेस विधायक रहते हुए पूज्य राघव बाबा ने राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राघव बाबा ने उस समय स्पष्ट कहा था कि यदि कांग्रेस राम मंदिर निर्माण की राह में रोड़ा बनती है तो उसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। योगी ने इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज वही देवरिया विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है, जो कभी उपेक्षा का शिकार रहा।

CM YOGI

इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने भाषण का रुख सीधे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर मोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश में भले ही सरकार, प्रशासनिक ढांचा और नौकरशाही वही रही हो, लेकिन उस दौर में न तो सुरक्षा थी, न विकास, न आम जनता का सम्मान और न ही रोजगार के अवसर। मुख्यमंत्री के अनुसार उस समय गरीब वर्ग को आवास और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दौर में स्कूल शिक्षा के केंद्र न होकर नकल के अड्डे बन चुके थे, और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की जर्जर हालत तत्कालीन सरकारों की कार्यशैली की जर्जरता को उजागर करती थी।

इंसेफ्लाइटिस का जिक्र

मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में पूर्वी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही इंसेफ्लाइटिस यानी मस्तिष्क ज्वर की समस्या का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हर वर्ष 15 जुलाई से 15 नवंबर के बीच देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर और बस्ती जैसे जिलों में भय और दहशत का माहौल बना रहता था। उनके अनुसार, उस दौर में हर माता-पिता अपने मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित रहते थे।

मुख्यमंत्री ने इस समस्या को केवल एक बीमारी न बताते हुए इसे तत्कालीन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सरकारों की ‘बीमार मानसिकता’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यही उदासीन मानसिकता थी जो क्षेत्र के मासूम बच्चों को लील रही थी, जबकि सत्ता में बैठे लोगों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती थी। योगी ने कहा कि उस समय की सरकारें मौन बनी रहीं और उनकी संवेदनशीलता पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी।

जय प्रकाश नारायण का हवाला देकर सपा पर निशाना

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा क्षेत्र के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि बीते 40 वर्षों में इंसेफ्लाइटिस के कारण 50 हजार से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन इस दौरान न तो कभी समाजवादी पार्टी का कोई मुख्यमंत्री, न कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री और न ही कांग्रेस का कोई प्रधानमंत्री पीड़ित परिवारों का हालचाल जानने पहुंचा।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) का मुद्दा उठाते हुए समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने अपनी ही विचारधारा के प्रेरणास्रोत माने जाने वाले जय प्रकाश नारायण के नाम पर बने इस प्रोजेक्ट को भी राजनीतिक स्वार्थ से नहीं बख्शा।

864 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा प्रोजेक्ट 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि जेपीएनआईसी परियोजना की शुरुआती लागत महज करीब 200 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना पर 864 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, इसके बावजूद यह प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया।

उन्होंने दावा किया कि इसे पूरा करने के लिए अब भी अतिरिक्त 150 से 200 करोड़ रुपये की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की मूल मंशा सरकारी खजाने से 900 से 1000 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद इस परियोजना को किसी निजी कंपनी के हवाले करने की थी, ताकि उससे जुड़े लोगों को सीधा फायदा पहुंचाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि जिस कंपनी को यह प्रोजेक्ट सौंपे जाने की योजना थी, उसके तार समाजवादी पार्टी के नेताओं से जुड़े हुए थे और परियोजना से होने वाली कमाई सीधे उनके घर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। इस दौरान उन्होंने डिंपल यादव, अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव का नाम लेते हुए सीधा आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि सपा शासनकाल में कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने के नाम पर भी बड़े पैमाने पर सरकारी धन खर्च किया जाता था। उन्होंने कहा, ‘सपा का मतलब लूट-खसोट, सपा का मतलब डकैतों का गिरोह।’ इसके साथ ही उन्होंने सपा शासनकाल में बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी विपक्ष को घेरा।

अखिलेश यादव पर कसा तंज 

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने राज्य सरकार द्वारा 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने इस योजना पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया को लेकर तीखा तंज कसा। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब सरकार यह जनकल्याणकारी योजना शुरू कर रही थी, ठीक उसी समय समाजवादी पार्टी खेमे में हलचल मच गई और जल्दबाजी में एक प्रेस वार्ता बुलाई गई।

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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस दौरान बयान देने वालों को यह भी ठीक से याद नहीं रहा कि कहना क्या है, और गलत आंकड़े गिनाते हुए 4 लाख और 40 हजार जैसी बातें कहनी शुरू कर दीं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनता से कुछ लेने में नहीं बल्कि जनता को सुविधाएं देने में विश्वास रखती है।

मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वे दोपहर के समय नींद से उठते हैं तो उनकी सोच-समझ पर इसका असर पड़ता है और उनके व्यवहार में केवल झुंझलाहट ही झलकती है। भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने एक पत्रकार के साथ हुई कथित दुर्व्यवहार की घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि एक बार एक पत्रकार के गले पर तलवार तक रख दी गई थी।

305 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन देवरिया में आयोजित एक बड़े विकास कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसमें उन्होंने कुल 305 करोड़ रुपये की लागत वाली 80 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए विपक्षी दलों के कार्यकाल की तुलना वर्तमान सरकार के कामकाज से की, और दावा किया कि बीते वर्षों में प्रदेश ने सुरक्षा, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

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