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मक्का डिफेंस पैक्ट के बाद पाकिस्तान में सैन्य हलचल तेज, एक्सपर्ट बोले- ‘भारत को रहना होगा सतर्क’

नई दिल्ली। पाकिस्तान की धरती पर पिछले कुछ दिनों से जो सैन्य हलचल देखने को मिल रही है। उसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की  चिंता बढ़ा दी है। ओपन-सोर्स फ्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइट्स के अनुसार 19 से 21 अगस्त के बीच महज साठ घंटों के भीतर तुर्की के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमानों ने नूर खान, मसरूर और मुरीदके स्थित पाकिस्तानी हवाई अड्डों के कई चक्कर लगाए।

इसी दौर में पाकिस्तान द्वारा भारत सीमा के नजदीक करीब 250 चीनी तोपों की तैनाती की खबरें भी सामने आईं। इन दो घटनाओं ने बड़ा सवाल उठ रहा है कि, क्या इस्लामाबाद एक बार फिर नई सैन्य तैयारियों में जुट गया है।

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भारत को सतर्क रहने की जरूरत 

भारत के जाने-माने डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी का मानना है कि, यह घटनाक्रम अकेला नहीं है बल्कि एक बड़ी रणनीतिक तस्वीर का हिस्सा है।

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उनके अनुसार चीन, पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के विरुद्ध दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध छेड़ने की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। मौजूदा गतिविधियां उसी कड़ी का हिस्सा है। उनका मानना है कि, भारत को इस समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।

तुर्की के किन विमानों ने भरी उड़ान

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में हवाई अड्डों पर तुर्की के जिन विमानों ने चक्कर लगाये उनके वायुसेना के C-130 हरक्यूलिस और A400M जैसे भारी ट्रांसपोर्ट विमान शामिल थे, जिनमें से एक का कॉल साइन TUAF526 बताया गया। इन उड़ानों के बाद से भारतीय सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की युद्ध-तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं।

विमानों से क्या पहुंचाया गया

रक्षा जानकारों के बीच यह अनुमान लगाया जा रहा है कि, इन उड़ानों के जरिए पाकिस्तान को तुर्की निर्मित सैन्य साजो-सामान भेजा गया होगा। इसमें मानवरहित हवाई प्रणालियां (ड्रोन) और वायु-रक्षा उपकरण शामिल हो सकते हैं, जैसे अगली पीढ़ी का कामिकेज़ ड्रोन बायकर K2 और असिसगार्ड की ड्रोन प्रणालियां। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी कहते हैं कि, जिस तरह तुर्की भारत के खिलाफ अक्सर तीखी बयानबाजी करता रहा है, उसे देखते हुए अब मक्का रक्षा समझौते के जरिए पाकिस्तान के साथ उसका औपचारिक सैन्य गठबंधन बन जाना नई दिल्ली के लिए गंभीरता से लेने वाला मसला है।

मक्का समझौते के बाद तेज हुईं गतिविधियां

गौरतलब है कि, यह विमानों की आवाजाही 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के ठीक बाद देखी गई। यह समझौता तीनों देशों के बीच एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था बनाता है, जिसके अनुसार किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि, इसी समझौते के बाद पाकिस्तान में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं।

 भारत के खिलाफ कुछ प्लान कर रहा है पाकिस्तान?

न तो पाकिस्तान और न ही तुर्की ने अभी तक इन ट्रांसपोर्ट उड़ानों के मकसद या उनमें ले जाए गए सामान के बारे में कोई आधिकारिक बयान दिया है। इस पर टिप्पणी करते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी कहते हैं कि पाकिस्तान भारत के साथ एक और टकराव की जमीन तैयार कर रहा है और ऑपरेशन सिंदूर के बाद वह खामोश नहीं बैठ सकता।

उनका कहना है कि, पाकिस्तानी सेना और वहां की सरकार दोनों की राजनीति ही भारत-विरोध पर टिकी है। भले ही देश की अर्थव्यवस्था बदहाल क्यों न हो। उनके मुताबिक पाकिस्तान और चीन 2030 के बाद किसी भी समय मिलकर भारत के खिलाफ दो-मोर्चा युद्ध की शुरुआत कर सकते हैं।

सीमा पर चीनी तोपों की तैनाती

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने भारतीय सीमा के करीब चीन से मिली लगभग 250 SH-15 तोपों को तैनात किया है। ये तोपें दरअसल चीनी सेना (PLA) की PCL-181 हॉवित्जर तोप के निर्यात संस्करण हैं, जिन्हें चीनी रक्षा कंपनी नोरिन्को ने विकसित किया है। इनकी खासियत यह है कि 6×6 बख्तरबंद शानक्सी ट्रक पर लगी ये तोपें 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती हैं, जिससे ये दुर्गम इलाकों में भी तेजी से पहुंचकर गोलाबारी कर सकती हैं और उसके तुरंत बाद अपनी जगह बदल सकती हैं।

2030 के बाद दो-मोर्चा युद्ध की आशंका

लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी का आंकलन है कि, पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ नई-नई रणनीतियां बनाता रहता है, और चीन व तुर्की उसके दो ऐसे करीबी साझेदार हैं जिन्होंने बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उसकी मदद की थी। सोढ़ी का मानना है कि, पाकिस्तान फिर से युद्ध की तैयारियों में जुटा है, और चीन की दीर्घकालिक रणनीति 2030 के बाद किसी भी वक्त पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर दो मोर्चों से हमला करने की हो सकती है। ऐसे में उनका सुझाव है कि, नई दिल्ली को अपनी सतर्कता और सैन्य तैयारियां और बढ़ानी चाहिए।

पिछले साल भी मिली थी चीन-तुर्की से मदद

पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी चीन और तुर्की ने कथित तौर पर पाकिस्तान को अत्याधुनिक सैन्य उपकरण मुहैया कराए थे। इनमें चीन की PL-15 हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें और HQ-9 वायु-रक्षा प्रणाली, साथ ही तुर्की निर्मित बायराक्टर ड्रोन और असिसगार्ड सोंगर कामिकेज़ ड्रोन शामिल थे। आरोप है कि, इन दोनों देशों ने पाकिस्तान को रियल-टाइम युद्धक्षेत्र सूचना और सामरिक सहयोग भी दिया था।

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उस चार दिवसीय टकराव के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने बहुस्तरीय वायु-रक्षा तंत्र और एकीकृत कमान-नियंत्रण रणनीति के दम पर इन हमलों को नाकाम कर दिया था। भारत ने किसी भी महत्वपूर्ण सैन्य या नागरिक ठिकाने तक पहुंचने से पहले ही हवाई खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया था।

S-400 और आकाश-NG ने दिखाया दम

पाकिस्तान के रक्षा तंत्र को ध्वस्त करने के लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने स्वदेशी तकनीक और उन्नत एंटी-एक्सेस रणनीतियों का इस्तेमाल किया था, जिससे पाकिस्तान के आक्रामक हमले नाकाम हो गए थे। भारतीय वायुसेना ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को विफल करने के लिए रूस से हासिल किए गए S-400 ट्रायम्फ वायु-रक्षा प्रणाली और स्वदेशी आकाश-NG मिसाइलों की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का भरपूर इस्तेमाल किया।

इसी दौरान भारतीय वायुसेना ने S-400 प्रणाली के जरिए पाकिस्तान के एक महत्वपूर्ण साब 2000 एरिए (Saab 2000 Erieye) एडवांस अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) निगरानी विमान को करीब 314 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया था। इसे सैन्य इतिहास में अब तक के सबसे लंबी दूरी के सफल सतह-से-हवा मिसाइल हमलों में गिना जाता है।

कुल मिलाकर, तुर्की की बढ़ी उड़ानों, चीनी तोपों की तैनाती और मक्का रक्षा समझौते के बाद बनी नई सामरिक साझेदारी ने भारतीय रक्षा हलकों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नई दिल्ली को इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करना चाहिए।

 

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