बांग्लादेश में गहराया बिजली संकट: मॉल-बिलबोर्ड पर लगी पाबंदी, भारत से मदद गुहार

ढाका। बांग्लादेश इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। यहां हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि, सरकार अपने नागरिकों को बुनियादी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी नाकाम साबित हो रही है। बिजली की इस भारी किल्लत से निपटने के लिए बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार को अब कड़े और असामान्य कदम उठाने पड़ रहे हैं। सरकार ने देशभर के शॉपिंग मॉल और दुकानों को रात 8 बजे तक हर हालात में बंद करने का निर्देश जारी कर दिया है।

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तारिक रहमान ने मांगी भारत से मदद

गौरतलब है कि, यह सख्त फैसला बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद द्वारा भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मांग किए जाने के तुरंत बाद सामने आया है। इससे जाहिर होता है कि, बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें अब सिर्फ आंतरिक संसाधनों से पूरी नहीं हो पा रही हैं। अब ढाका की निगाहें भारत की राजधानी दिल्ली पर टिकीं है। जी हां तारिक सरकार ने भारत से मदद की गुहार लगाई है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने 12 अगस्त को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि, अब देश में सभी शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानें सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक ही खुली रह सकेंगी। सरकार ने कुल मिलाकर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महज नौ घंटे का ही समय निर्धारित किया है, जो सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि, यह कदम बांग्लादेश में चल रहे भीषण ऊर्जा संकट की गंभीरता को उजागर कर रहा है। सरकार का उद्देश्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली बिजली की खपत को यथासंभव कम करना है, ताकि बची हुई बिजली को आवासीय क्षेत्रों और आवश्यक सेवाओं की ओर मोड़ा जा सके।

7 बजे तक बंद हों रोशन बिलबोर्ड

सरकार द्वारा जारी किए गए इस नोटिफिकेशन में केवल दुकानों और मॉल के समय को ही सीमित नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ कई अन्य कड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। नोटिफिकेशन में लिखा गया है कि, शहर में लगे सभी रोशन बिलबोर्ड को अनिवार्य रूप से शाम 7 बजे तक बंद कर दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों और इमारतों पर लगी सभी प्रकार की सजावटी या रोशनी वाली लाइटों को भी पूरी तरह बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

सरकार की मंशा साफ है कि, देश में आर्टिफिशियल रोशनी के इस्तेमाल को न्यूनतम स्तर तक सीमित करना, ताकि बिजली की खपत में कटौती की जा सके। यह फैसला इसलिए भी लिया गया है, क्योंकि देश के कई रिहायशी इलाकों में पहले से ही लंबी और अनिश्चित बिजली कटौती हो रही है, जिससे आम जनता ने भारी आक्रोश है।

सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं है संकट

यह ध्यान देने वाली बात है कि बांग्लादेश में जारी यह ऊर्जा संकट केवल राजधानी ढाका तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। यही वजह है कि सरकार की ओर से जारी किए गए ये सख्त नियम भी सिर्फ ढाका शहर के लिए नहीं, बल्कि पूरे बांग्लादेश के लिए लागू किए गए हैं।

बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन में देशभर के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होने वाले और आगामी मेलों, ट्रेड फेयर तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की कीमत पर भी फिलहाल ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दे रही है।

भारत से पाइपलाइन के जरिए होती है डीजल आपूर्ति

इस पूरे संकट के बीच बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने भारत से मौजूदा ऊर्जा सहयोग का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि, भारत के साथ बांग्लादेश की एक पाइपलाइन पहले से ही मौजूद है, जिसके माध्यम से नियमित रूप से डीजल की आपूर्ति की जाती रही है। उन्होंने यह भी बताया कि, बांग्लादेश सरकार ने भारत से इस मौजूदा आपूर्ति में इजाफा करने का अनुरोध किया है।

मंत्री महमूद के मुताबिक, देश की बढ़ती मांग को पूरा करने और आयात को सुनिश्चित करने के लिए सरकार न केवल मौजूदा समझौतों पर निर्भर है, बल्कि वह डीजल और अन्य ऊर्जा स्रोतों के नए विकल्प तलाशने की दिशा में भी सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

भारत के हाई कमिश्नर संग हुई बैठक

इस संकट को हल करने की दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक भी हुई, जिसमें बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा और बांग्लादेश के बिजली एवं ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद आमने-सामने बैठे। इस बैठक के दौरान मंत्री महमूद ने स्पष्ट रूप से भारत से अतिरिक्त डीजल सप्लाई की मांग रखी।

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अधिकारियों के अनुसार, यह मांग मुख्य रूप से देश में चल रही बिजली और गैस की गंभीर कमी को ध्यान में रखते हुए की गई है, जिसने बांग्लादेश के घरेलू बिजली उत्पादन पर सीधा और नकारात्मक असर डाला है। इसी के परिणामस्वरूप देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली कटौती की समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है, जिससे आम नागरिकों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

अब भारत से उम्मीद

ढाका की ओर से भारत के सामने रखी गई इस मांग के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या भारत सरकार बांग्लादेश की इस मुश्किल घड़ी में उसकी मदद के लिए आगे आएगी। इस विषय पर जब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख और बड़ा निर्यातक देश है, विशेष रूप से अपने पड़ोसी देशों के लिए।

प्रवक्ता जायसवाल ने आगे बताया कि, भारत सरकार को बांग्लादेश सरकार की ओर से डीजल आपूर्ति बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध प्राप्त हो चुका है। फिलहाल इस मांग पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया जा रहा है। हालांकि, भारत की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अब देखना ये है कि भारत, बांग्लादेश की इस बिजली की समस्या को हल करता है या नहीं।

 

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