
गुवाहाटी। भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव की आग भड़क उठी है। असम के श्रीभूमि जिले में स्थित बिलबारी सीमावर्ती इलाके में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने दोनों देशों के बीच के रिश्तों को एक नए संकट की तरफ धकेल दिया। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी बीजीबी के जवान आमने-सामने आ गए।
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बीजीबी ने तानी बंदूकें
बीजीबी ने भारतीय सीमा की तरफ बंदूकें तान दीं, दर्जनों बांग्लादेशी नागरिक लाठी, दरांती और बांस के डंडे लेकर जीरो लाइन पर उतर आए और घंटों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। यह पूरा घटनाक्रम कथित पुशबैक ऑपरेशन को लेकर शुरू हुआ और देखते-देखते इतना बड़ा रूप ले लिया कि पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी करना पड़ा।
क्या है पुशबैक ऑपरेशन
असम के श्रीभूमि जिले के बिलबारी बॉर्डर पर यह घटना उस वक्त शुरू हुई जब भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने बांग्लादेशी नागरिकों के एक समूह को वापस बांग्लादेश के अंदर न्यू पल्लाथल इलाके की तरफ धकेलने की कोशिश की। यह कदम पुशबैक ऑपरेशन का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके तहत अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए या सीमा पर मौजूद लोगों को वापस उनके देश भेजा जाता है,
लेकिन इस बार बीजीबी ने इस कदम का कड़ा विरोध किया।

बीजीबी के जवानों ने न सिर्फ उस समूह को बांग्लादेशी इलाके में दाखिल होने से रोका, बल्कि भारतीय सीमा की तरफ अपनी बंदूकें तान दीं। पल्लाथल बॉर्डर आउटपोस्ट के जवान लाउडस्पीकर लेकर मैदान में उतर आए और बार-बार बीएसएफ को चेतावनी देने लगे कि वे किसी भी पुशबैक ऑपरेशन को अंजाम न दें और सीमा से दूर हट जाएं।
गोली चलाने की दी धमकी
बीजीबी सिर्फ हथियार दिखाने पर ही नहीं रुकी। पल्लाथल बॉर्डर आउटपोस्ट के जवानों ने लाउडस्पीकर के जरिए बार-बार बीएसएफ को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि, अगर जबरदस्ती किसी को बांग्लादेशी सीमा में धकेलने की कोशिश की गई, तो उन्हें गोली चलाने पर मजबूर होना पड़ेगा। यह चेतावनी सुनकर माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर खड़े होकर एक देश के सुरक्षाबल का दूसरे देश के सुरक्षाबल को इस तरह खुलेआम धमकी देना एक बेहद असामान्य और गंभीर घटना है। यह बात बताती है कि, बिलबारी बॉर्डर पर हालात किस हद तक बिगड़ गए थे।
हथियार के साथ इकट्टा हुए गांवों के लोग
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि, जैसे ही खबर आसपास के इलाकों में फैली, बांग्लादेश की तरफ के सीमावर्ती गांवों के लोग बड़ी तादाद में इकट्ठे होने लगे। ये लोग खाली हाथ नहीं आए, बल्कि अपने साथ चाकू, लाठियां, दरांती और बांस के डंडे लेकर आए। ये सब जीरो लाइन यानी अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा तक पहुंच गए और भारतीय सीमा की तरफ अपने हथियार लहरा-लहराकर बीएसएफ को धमकियां देने लगे।
यह नजारा किसी सामान्य सीमा विवाद से कहीं ज्यादा गंभीर था। एक संगठित भीड़ का इस तरह हथियारों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आना और दूसरे देश के सुरक्षाबलों को धमकाना एक खतरनाक संकेत था। बीजीबी के जवान भी इस भीड़ के साथ खड़े नजर आए जिससे पूरे घटनाक्रम को बीजीबी का समर्थन मिलता दिख रहा था।
घंटों तक बना रहा गतिरोध
यह तनाव कुछ मिनटों का नहीं था। कई घंटों तक दोनों तरफ के सुरक्षाकर्मी सीमा पर आमने-सामने डटे रहे। एक तरफ बीजीबी के जवान हथियारों के साथ खड़े थे और उनके पीछे लाठी-डंडे लिए नागरिकों की भीड़ थी, तो दूसरी तरफ बीएसएफ के जवान पूरी तरह सतर्क थे।
सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि, इस पूरे गतिरोध के दौरान बीएसएफ के जवानों ने अत्यंत संयम का परिचय दिया। उन्होंने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे स्थिति और बिगड़ती। यह संयम बेहद जरूरी था, क्योंकि जरा सी चूक से हालात हाथ से निकल सकते थे और कोई बड़ी घटना घट सकती थी।
सीमा पर बढ़ी फ़ोर्स
जैसे ही स्थिति गंभीर होती नजर आई, दोनों तरफ से अतिरिक्त बल उस इलाके में भेजे गए। भारतीय सीमा पर बीएसएफ की तैनाती बढ़ा दी गई। असम पुलिस की टुकड़ियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया और स्थानीय प्रशासन को सूचित कर दिया गया। श्रीभूमि जिले के अधिकारी भी सक्रिय हो गए। इलाके में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गईं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार एक-दूसरे से संपर्क में रहीं और हर पल की अपडेट लेती रहीं।

इतने तनाव के बावजूद राहत की बात यह रही कि, इस पूरे गतिरोध में कोई गोलीबारी नहीं हुई और किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली। दोनों तरफ के सुरक्षाकर्मियों ने अंततः तालमेल बनाए रखा और स्थिति को पूरी तरह बेकाबू होने से बचा लिया।
हालांकि, बिलबारी बॉर्डर पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। न बीएसएफ की तरफ से और न ही बीजीबी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। घटना में शामिल लोगों की संख्या और पुशबैक ऑपरेशन के बारे में भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उठ रहे ये सवाल
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है। पहला सवाल यह है कि बीजीबी ने इतना आक्रामक रुख क्यों अपनाया? अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी दूसरे देश के सुरक्षाबल को गोली चलाने की धमकी देना और बंदूकें तानना राजनयिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।
दूसरा सवाल यह है कि, बांग्लादेशी नागरिकों की इतनी बड़ी भीड़ इतनी जल्दी हथियार लेकर सीमा पर कैसे पहुंच गई? क्या यह पहले से संगठित था या सच में अनायास हुआ?
तीसरा और सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत-बांग्लादेश के बीच सीमा पर इस तरह के टकराव का भविष्य में क्या असर पड़ेगा? दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव चल रहा है और इस तरह की घटनाएं रिश्तों को और जटिल बना देती हैं।
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