पायलट और केबिन क्रू नहीं बन पाए तो निराश न हों, एविएशन सेक्टर में हैं ये हाई सैलरी वाले जॉब प्रोफाइल

देश के बहुत से युवाओं का सपना होता है कि, वे एविएशन सेक्टर में अपना करियर बनाएं। वे इसके लिए दिन रात मेहनत भी करते हैं लेकिन कई बार वे पायलट व केबिन क्रू नहीं बन पाते हैं। ऐसे में उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एयरलाइंस सेक्टर में और भी कई डिपार्टमेंट हैं जहां आप अपना करियर बना सकते हैं।

अधिकतर लोग एविएशन क्षेत्र के दायरे को सिर्फ पायलट, एयर होस्‍टेज और केबिन क्रू तक सीमित मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, इसका दायरा काफी बड़ा है। आप इस इंडस्ट्री में एयरपोर्ट मैनेजमेंट, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स, एयर कार्गो मैनेजमेंट, एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ, फ्लाइट इंजीनियर, एयर टिकटिंग, मीटिरियोलॉजिस्ट आदि जॉब प्रोफाइल पर भी हाई सैलरी के साथ काम कर सकते हैं।

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एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ

एविएशन सेक्टर में ग्राउंड स्टाफ की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। इनका काम एयरपोर्ट के रखरखाव के साथ-साथ यात्रियों की सुविधा से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालना होता है।

Aviation Sector

इस प्रोफाइल में करियर बनाने के लिए एयरपोर्ट मैनेजमेंट से जुड़ा सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, बैचलर या मास्टर डिग्री कोर्स करना जरूरी होता है। खास बात यह है कि, 12वीं पास करने के तुरंत बाद ही इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है, जिससे यह उन छात्रों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है, जो जल्दी करियर शुरू करना चाहते हैं।

एयर कार्गो मैनेजमेंट

अगर आपकी दिलचस्पी लॉजिस्टिक्स और मालवाहक विमानों की व्यवस्था में है, तो एयर कार्गो मैनेजमेंट एक शानदार करियर विकल्प हो सकता है। इस फील्ड में करियर बनाने के लिए डिप्लोमा इन इंटरनेशनल एयर कार्गो मैनेजमेंट कोर्स करना होता है। इस कोर्स के दौरान छात्रों को एविएशन का इतिहास और भूगोल, कार्गो से जुड़े कानून, कस्टम्स नियम, वेयरहाउसिंग, विमान की लोडिंग क्षमता और सीमाएं, क्लीयरेंस प्रक्रिया, क्लेम से जुड़े नियम, बीमा और फ्री ट्रेड जोन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की गहन जानकारी दी जाती है। यह कोर्स भी 12वीं पास करने के बाद ही किया जा सकता है।

एयर टिकटिंग

एविएशन इंडस्ट्री में एयर टिकटिंग की पोस्ट भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास होनी चाहिए। इच्छुक छात्रों को डिप्लोमा इन एयर टिकटिंग एंड ट्रैवल मैनेजमेंट कोर्स करना होता है, जिसमें ट्रैवल एजेंसी के कामकाज, विश्व के अलग-अलग टाइम जोन, एयरपोर्ट और एयरलाइन कोड्स, भुगतान के तरीके, विदेशी मुद्रा, पासपोर्ट और वीजा जैसे विषयों की ट्रेनिंग दी जाती है। यह कोर्स आमतौर पर 6 से 9 महीने की अवधि का होता है।

फ्लाइट इंजीनियर

एयरलाइंस सेक्टर में फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका भी बेहद जिम्मेदारी भरी होती है। विमान के सभी पुर्जों की जांच करना और उन्हें सुचारू रूप से चालू हालत में बनाए रखना इनकी मुख्य जिम्मेदारी होती है। इस पद के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, एयरोनॉटिकल या कंप्यूटर साइंस में से किसी एक विषय में स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है।

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर

एविएशन के क्षेत्र में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर का काम भी बेहद महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा माना जाता है। एयरपोर्ट पर बने कंट्रोल टावर से एयर ट्रैफिक कंट्रोलर हर समय विमानों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और उन्हें सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करते हैं। इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बीटेक अथवा संबंधित डिप्लोमा करके इस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है।

मीटिरियोलॉजिस्ट

एयरलाइंस सेक्टर में मीटिरियोलॉजिस्ट यानी मौसम विशेषज्ञ की भूमिका भी बेहद अहम होती है, क्योंकि उड़ान भरने और उतरने के फैसले काफी हद तक मौसम की सटीक जानकारी पर निर्भर करते हैं। इस पद के लिए मौसम विज्ञान, भौतिकी, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, गणित या दूरसंचार विषयों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होना जरूरी है।

टूर एंड ट्रैवल

एविएशन सेक्टर में रहते हुए अतिरिक्त कमाई का एक बेहतरीन जरिया टूर एंड ट्रैवल का क्षेत्र भी है। इसके लिए छात्र 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं या फिर तीन वर्षीय बैचलर इन ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट कोर्स के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं।

कहां से करें ट्रेनिंग

एविएशन सेक्टर के इन अलग-अलग जॉब प्रोफाइल के लिए देशभर में कई मान्यता प्राप्त संस्थान प्रशिक्षण देते हैं। इनमें राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स (नागपुर), फ्रैंकफिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयर होस्टेस ट्रेनिंग, नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, बॉम्बे फ्लाइंग क्लब कॉलेज ऑफ एविएशन, राजीव गांधी मेमोरियल कॉलेज ऑफ एरोनॉटिक्स, पीटीसी एविएशन अकादमी (चेन्नई) और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ केबिन क्रू ट्रेनिंग जैसे संस्थान प्रमुख रूप से शामिल हैं। इच्छुक छात्रों को सलाह दी जाती है कि, वे एडमिशन लेने से पहले संबंधित संस्थान की मान्यता, कोर्स की फीस और प्लेसमेंट रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच कर लें।

करियर की संभावनाएं और सैलरी

एविएशन इंडस्ट्री में इन अलग-अलग जॉब प्रोफाइल में शुरुआती सैलरी अनुभव, योग्यता और कंपनी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है, लेकिन यह क्षेत्र लगातार बढ़ते हुए भारतीय विमानन बाजार के चलते रोजगार की दृष्टि से बेहद संभावनाओं से भरा माना जाता है।

Aviation Sector

घरेलू एयरलाइनों के विस्तार, नए एयरपोर्ट्स के निर्माण और हवाई यात्रा की बढ़ती मांग के चलते आने वाले वर्षों में ग्राउंड स्टाफ, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, फ्लाइट इंजीनियर और कार्गो मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा अनुभव बढ़ने के साथ इन सभी क्षेत्रों में प्रमोशन और वेतन वृद्धि की संभावनाएं भी काफी मजबूत मानी जाती हैं, जिससे यह करियर विकल्प लंबे समय के लिए स्थिरता और तरक्की दोनों की गारंटी देता है।

खुल जाते हैं कई रास्ते

एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का मतलब सिर्फ पायलट या केबिन क्रू बनना ही नहीं है। ग्राउंड स्टाफ से लेकर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, फ्लाइट इंजीनियर, मीटिरियोलॉजिस्ट और कार्गो मैनेजमेंट तक, इस इंडस्ट्री में युवाओं के लिए कई ऐसे रास्ते खुले हैं, जो न सिर्फ अच्छी सैलरी देते हैं, बल्कि करियर में स्थिरता और तरक्की के भी भरपूर मौके प्रदान करते हैं। इसलिए जो छात्र पायलट या केबिन क्रू नहीं बन पाए, उन्हें अपने सपने को छोड़ने के बजाय एविएशन इंडस्ट्री के इन विविध विकल्पों को अपनाकर अपने करियर को नई दिशा देने पर विचार करना चाहिए।

 

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