
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के जेवर में तेजी से आकार ले रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आने वाले समय में केवल विमानों के आवागमन का एक साधारण केंद्र नहीं रह जाएगा, बल्कि यह उत्तर भारत की पूरी अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी गेम चेंजर साबित होने वाला है।
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28 मार्च को होगा उद्घाटन
28 मार्च दिन शनिवार को निर्धारित इसके भव्य उद्घाटन के साथ ही यह हवाई अड्डा उत्तर भारत के विकास का एक नया और आधुनिक प्रवेश द्वार बन जाएगा। यह विशाल परियोजना देश के प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक ही सूत्र में पिरोने का काम करेगी, जिससे न केवल यात्रियों का सफर आसान और आरामदायक होगा, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावशाली होकर उभरेगी।

इस एयरपोर्ट के पूरी तरह क्रियाशील होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वर्षों से बना हुआ भारी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के करोड़ों नागरिकों को विश्वस्तरीय हवाई यात्रा की सुविधा उनके घर के बिल्कुल करीब उपलब्ध होगी। अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर से लेकर वाराणसी के दिव्य काशी विश्वनाथ धाम और उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा पर जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए जेवर एयरपोर्ट एक प्रमुख और अनिवार्य कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सबसे व्यापक और गहरा लाभ उत्तर भारत के धार्मिक पर्यटन सर्किट को मिलने की पूरी उम्मीद है। अब तक की स्थिति यह थी कि विदेशी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों तक पहुंचने के लिए पहले दिल्ली उतरना पड़ता था और फिर वहां से लंबी सड़क यात्रा या थकाऊ कनेक्टिंग फ्लाइट्स का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही यात्रियों को इन तमाम परेशानियों से बड़ी राहत मिल जाएगी।
इन शहरों के लिए सीधी उड़ानें
यहां से अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और कुशीनगर जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों के लिए सीधी उड़ानें संचालित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, ब्रज क्षेत्र के मथुरा-वृंदावन धाम और उत्तराखंड की हिमालयी पहाड़ियों में स्थित चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पहुंच पहले से कहीं अधिक सुलभ और समय बचाने वाली हो जाएगी। यह हवाई अड्डा विशेष रूप से उन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक वरदान की तरह होगा जो भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने के लिए सात समंदर पार से आते हैं।
भगवान बुद्ध की पावन तपोस्थली उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न अंचलों में बिखरी हुई है और जेवर एयरपोर्ट के माध्यम से श्रावस्ती, कपिलवस्तु तथा कुशीनगर जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सरल हो जाएगा। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और थाईलैंड से हर साल आने वाले लाखों बौद्ध अनुयायियों के लिए यह एयरपोर्ट एक मुख्य बेस कैंप की तरह कार्य करेगा, जिससे भारत के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान और जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
इस हवाई सेवा के साथ-साथ एयरपोर्ट प्रबंधन ने उन महत्वपूर्ण शहरों के विकास पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है जहां वर्तमान में सीधे हवाई संपर्क की कमी है। इसके लिए एक बहुत ही व्यापक और सुव्यवस्थित मल्टी-मोडल रोड-कनेक्टिविटी प्लान तैयार किया गया है जिसके तहत उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड की सरकारों के साथ विशेष एमओयू साइन किए गए हैं।
वातानुकूलित बसें भी चलेंगी
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत एयरपोर्ट के टर्मिनल से ही सीधे देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, मेरठ, आगरा और अलीगढ़ जैसे शहरों के लिए प्रीमियम और वातानुकूलित बसों का संचालन नियमित रूप से किया जाएगा। यात्रियों को एयरपोर्ट के आगमन द्वार से बाहर निकलते ही इन लग्जरी बसों का सीधा कनेक्शन मिल सकेगा जिससे लास्ट माइल कनेक्टिविटीकी पुरानी और जटिल समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
यह परिवहन मॉडल न केवल घरेलू यात्रियों बल्कि विदेशी सैलानियों को भी एक सुरक्षित, विश्वसनीय और विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव प्रदान करने की गारंटी देता है। एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने अंतरराज्यीय परिवहन व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए पड़ोसी राज्यों के परिवहन विभागों के साथ जो तालमेल बैठाया है वह काबिले तारीफ है।

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग इसके तहत मेरठ, आगरा, मथुरा, वृंदावन, फिरोजाबाद और अलीगढ़ जैसे औद्योगिक तथा पर्यटन केंद्रों के लिए अपनी विशेष बसें तैनात करेगा, जबकि उत्तराखंड के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश के साथ-साथ हल्द्वानी और देहरादून तक सीधी और निर्बाध बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल क्षेत्रीय संपर्क तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा। शुरुआती चरण में ही यहां से अमृतसर, जम्मू, धर्मशाला, गया और देहरादून जैसे प्रमुख शहरों के लिए नियमित फ्लाइट सेवाएं प्रस्तावित की गई हैं। इससे न केवल पर्यटन क्षेत्र में नई जान आएगी बल्कि इन क्षेत्रों की व्यापारिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी एक नई गति मिलेगी।
विदेशी निवेश का जरिया बनेगा एयरपोर्ट
जेवर से इन शहरों का सीधा जुड़ाव उत्तर भारत के व्यापारिक गलियारे को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का सामर्थ्य रखता है। इस एयरपोर्ट का आर्थिक प्रभाव केवल उड़ानों और यात्रियों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक बड़ा जरिया बनेगा। एयरपोर्ट के आसपास विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक एयरोट्रोपोलिस और इंडस्ट्रियल क्लस्टर से होटल इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स पार्क, स्थानीय हस्तशिल्प बाजार और रेस्तरां व्यवसाय में एक अभूतपूर्व उछाल आने की संभावना है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि, इस विशाल परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा जिससे स्थानीय युवाओं और कुशल कामगारों के लिए तरक्की के तमाम नए रास्ते खुल जाएंगे। एयरपोर्ट प्रबंधन का दावा है कि यहां दी जाने वाली सुविधाएं पूरी तरह से डिजिटल और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्लेमैन का मानना है कि पड़ोसी राज्यों के साथ हुए ये परिवहन समझौते इस पूरी कनेक्टिविटी योजना की रीढ़ की हड्डी हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य यात्रियों को एक ऐसा ‘सीमलेस’ अनुभव प्रदान करना है जहां हवाई यात्रा और सड़क यात्रा के बीच का अंतर पूरी तरह समाप्त हो जाए।
वन ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य में निभाएगा भूमिका
नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने भी इस विजन को दोहराते हुए कहा है कि जेवर एयरपोर्ट का यह एकीकृत परिवहन मॉडल भविष्य में देश के अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक आदर्श उदाहरण पेश करेगा। जेवर एयरपोर्ट का निर्माण और इसकी भव्यता न केवल उत्तर प्रदेश की ‘वन ट्रिलियन इकोनॉमी’ के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि यह भारत को वैश्विक एविएशन सेक्टर के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण हब की कतार में भी मजबूती से खड़ा कर देगी।
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