
नई दिल्ली। भारत की पहचान कृषि प्रधान देश के तौर पर होती है। यहां करोड़ों किसान ऐसे हैं, जिनकी जिंदगी पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर है। अगर आपकी भी जीविका खेती से चलती है, तो ये खबर आपके लिए है। किसान फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए आमतौर पर केमिकल खादों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब सरकार अब एक ऐसी योजना ला रही है, जिससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए सरकार किसानों को सीधी आर्थिक सहायता भी देगी।
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प्रति एकड़ मिलेंगे 4000 रुपये
इस योजना के अंतर्गत, जो किसान अपनी जमीन पर केमिकल खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल छोड़कर पूरी तरह देसी और परंपरागत तरीकों से खेती करेंगे यानी प्राकृतिक खेती करेंगे, सरकार उन्हें प्रति एकड़ के हिसाब से 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की करेगी।

इस पहल का मकसद किसानों की आर्थिक मदद करना ही नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से खेती की कुल लागत को कम करना और मिट्टी की गुणवत्ता व सेहत को दीर्घकाल में बेहतर बनाना भी है। ऐसे में जो किसान अपनी लागत घटाकर बेहतर मुनाफा कमाने का प्लान बना रहे हैं, उनके लिए सरकार की ये योजना के बेहतर मौका होगी।
DBT होगी राशि
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ये है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि, सहायता राशि पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचे न की बिचौलियों को । दरअसल यह प्रोत्साहन राशि किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी आवश्यक ट्रेनिंग लेने और जरूरी सामग्री तैयार करने में मदद के लिए दी जा रही है, ताकि वे आसानी से केमिकल-मुक्त खेती की ओर कदम बढ़ा सकें।
योजना के लिए कहां और कैसे करें आवेदन
जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर या फिर अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र पर पहुंचकर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें और प्राकृतिक खेती को अपनी आजीविका का हिस्सा बना सकें।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना के तहत आवेदन करने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें सबसे पहले जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि आवेदक किसान उसी जमीन पर खेती कर रहा है जिसके लिए वह सहायता राशि का दावा कर रहा है। इसके अलावा पहचान प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड और डीबीटी के लिए बैंक खाते की पूरी जानकारी भी देनी अनिवार्य होगी। किसानों द्वारा जमा किए गए सभी कागजातों की बारीकी से जांच और सत्यापन किया जाएगा, और इस प्रक्रिया के पूरा होते ही सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। इस आर्थिक मदद से किसानों को शुरुआती दौर में जरूरी देसी इनपुट्स, जैसे जीवामृत और बीजामृत, तैयार करने में वित्तीय सहयोग मिल सकेगा।
प्राकृतिक खेती से कैसे बढ़ेगी कमाई
सरकार की यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक टिकाऊ और दीर्घकालिक जरिया भी साबित हो सकती है। मौजूदा समय में बाजार में केमिकल यूरिया और डीएपी जैसी खादों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिसके चलते खेती का पूरा बजट बिगड़ जाता है और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
ऐसे में जब किसान गाय के गोबर, गोमूत्र और नीम जैसी पूरी तरह प्राकृतिक और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चीजों की मदद से घर पर ही खाद और कीटनाशक तैयार करते हैं, तो बाजार से खाद-कीटनाशक खरीदने पर होने वाला उनका खर्च लगभग खत्म हो जाता है। जाहिर है कि, जब खेती की लागत कम होगी, तो किसानों की शुद्ध कमाई अपने आप बढ़ेगी।
क्यों फायदेमंद है प्राकृतिक खेती
दरअसल, बीते कुछ वर्षों में बाजार में केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक खाद्य उत्पादों की तरफ लोगों का काफी झुकाव देखने को मिला है और तेजी से मांग बढ़ी है। शहरी उपभोक्ता सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता की वजह से अब जैविक तरीके से उगाई गई फसलों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

यही वजह है कि, प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों की कीमतें सामान्य रासायनिक खेती से उगाई गई फसलों के मुकाबले ज्यादा हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है, जो किसानों के लिए फायदेमंद होती है। कुल मिलाकर कम लागत में बेहतर गुणवत्ता की फसल और अधिक मुनाफा, यही प्राकृतिक खेती की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।
सुधरेगी मिटटी की सेहत
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, केमिकल खादों के लगातार इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी की उर्वरा क्षमता कम हो जाती है, जिससे आने वाले समय में पैदावार पर बुरा असर पड़ता है, लेकिन अगर प्राकृतिक खेती की जाएगी तो मिट्टी की सेहत में न सिर्फ सुधार होगा, बल्कि जमीन की जल धारण क्षमता भी बेहतर रहेगी और किसानों को लंबे समय तक लाभ देगी।
किसानों के लिए फायदेमंद योजना
कुल मिलाकर देखा जाए, तो सरकार की यह योजना किसानों के लिए एक साथ कई मोर्चों पर फायदेमंद साबित हो सकती है। एक तरफ जहां उन्हें सीधी आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं दूसरी तरफ खेती की लागत घटने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधरने से उनकी दीर्घकालिक आय में भी इजाफा होने की संभावना है, जो किसान अब तक केमिकल खेती पर ही निर्भर थे, उनके लिए यह योजना एक बेहतरीन अवसर है, जिसके जरिए वे कम खर्च में अधिक टिकाऊ और मुनाफे वाली खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
इच्छुक किसानों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र से संपर्क कर इस योजना की पूरी जानकारी हासिल करें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पंजीकरण करवाएं, ताकि वे समय रहते इस सरकारी सहायता का पूरा लाभ उठा सकें।
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