
नई दिल्ली। भारत ने स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने देश में वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन शुरू होने के बाद से अब तक कुल एक हजार अरब यूनिट (1,000 बिलियन यूनिट) से भी अधिक बिजली का उत्पादन कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
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NPCIL ने इस उपलब्धि को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स साझा किया है। कॉर्पोरेशन ने इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव करार दिया है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का प्रमाण है।
पर्यावरण संरक्षण पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि, परमाणु ऊर्जा उत्पादन का यह आंकड़ा केवल एक तकनीकी या आर्थिक उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण संरक्षण पर भी पड़ा है। NPCIL के मुताबिक, इतनी बड़ी मात्रा में स्वच्छ बिजली का उत्पादन करने से वातावरण में करीब 860 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के समतुल्य उत्सर्जन को रोका जा सका है।

यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि, परमाणु ऊर्जा किस तरह जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन के मुकाबले कहीं कम कार्बन उत्सर्जन करने वाला विकल्प साबित हो रही है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने में यह उपलब्धि भारत के योगदान को और मजबूत करती है।
इस उपलब्धि के महत्व को समझने के लिए इसे रोजमर्रा के उदाहरणों से समझा जा सकता है। यदि 860 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने की तुलना सड़कों पर चलने वाले वाहनों से की जाए, तो यह लगभग 18 करोड़ 70 लाख पेट्रोल और डीजल चालित कारों को एक पूरे साल के लिए सड़कों से हटा देने के बराबर है।
पर्यावरणीय संतुलन में बड़ा योगदान
गौरतलब है कि, एक सामान्य यात्री कार औसतन प्रतिवर्ष लगभग 4.6 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है। इस लिहाज से देखा जाए, तो यह उत्सर्जन कटौती जर्मनी या जापान जैसे बड़े औद्योगिक और विकसित देशों के एक साल के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग बराबर बैठती है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत की परमाणु ऊर्जा नीति न केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार को लेकर एक दीर्घकालिक और महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत वर्ष 2047 तक, यानी भारत की आजादी के सौ वर्ष पूरे होने तक, देश की कुल परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह महत्वाकांक्षी योजना केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ‘न्यूक्लियर एनर्जी मिशन’ का हिस्सा है। इस मिशन की घोषणा के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है, देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और साथ ही स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी को समग्र ऊर्जा उत्पादन में बढ़ाना। मौजूदा समय में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता की तुलना में यह लक्ष्य कई गुना अधिक है, जो दर्शाता है कि, आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में भारी निवेश और तकनीकी विस्तार की योजना है।
कोयले पर कम होगी निर्भरता
सरकार की सोच यह है कि, जैसे-जैसे परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे देश के समग्र ऊर्जा मिश्रण यानी एनर्जी मिक्स में एक भरोसेमंद, निरंतर और कम कार्बन उत्सर्जन वाले बेस-लोड बिजली स्रोत की हिस्सेदारी भी बढ़ती जाएगी। परमाणु ऊर्जा संयंत्र सौर या पवन ऊर्जा के विपरीत मौसम या दिन-रात के चक्र पर निर्भर नहीं होते, इसलिए यह चौबीसों घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम है। इससे न केवल कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता घटाई जा सकेगी, बल्कि देश में बिजली आपूर्ति की निरंतरता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि, यह कदम भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा, जिससे दीर्घकाल में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता, दोनों को बल मिलेगा।
2070 के नेट-जीरो लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम
भारत ने वैश्विक मंच पर वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है। इस दिशा में परमाणु ऊर्जा क्षमता का लगातार विस्तार एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, बिना परमाणु ऊर्जा के व्यापक योगदान के, इतने बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना और साथ ही आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना, दोनों को एक साथ साध पाना अत्यंत कठिन होगा। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि यह आर्थिक विकास और पारिस्थितिक संतुलन के बीच एक स्वस्थ सामंजस्य स्थापित करने में भी मददगार साबित होगी।
धरातल पर उतर रहीं नई परियोजनाएं
एनपीसीआईएल की यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति में परमाणु ऊर्जा के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। एक हजार अरब यूनिट बिजली उत्पादन का यह आंकड़ा न केवल तकनीकी क्षमता का परिचायक है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि, भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए ठोस और मापन-योग्य कदम उठा रहा है। आने वाले दशकों में जैसे-जैसे ‘न्यूक्लियर एनर्जी मिशन’ के तहत नई परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी, वैसे-वैसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता, दोनों मोर्चों पर मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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