क्या राजनीति में एंट्री लेने जा रहे हैं अभिजीत दीपके?, शिंदे गुट के मंत्री ने किया खुलासा

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों छात्र आन्दोलन और सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की खूब चर्चा हो रही है। शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब कयास लगाए जाने लगे हैं कि, अभिजीत दीपके के राजनीतिक में एंट्री ले सकते हैं। हालांकि,  उनके सक्रिय राजनीति में उतरने की अटकलों के बीच राज्य सरकार में मंत्री और शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात की है और कई अहम खुलासे किए हैं।

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दीपके को राजनीति में घसीटने की हो रही कोशिश

शिरसाट का कहना है कि, अभिजीत दीपके के माता-पिता बिलकुल भी नहीं चाहते कि, उनका बेटा राजनीति में कदम रखे। वे चाहते हैं  कि वह नौकरी करे और एक शांत व सामान्य जीवन जिएं। वे चाहते हैं कि, उनका बेटा राजनीतिक विवादों से दूर रहे। मंत्री ने दावा किया कि इसके बावजूद कुछ लोग उन्हें राजनीति में लाने की कोशिशों में जुट गये हैं और इसके लिए लगातार माहौल तैयार किया जा रहा है।

Abhijeet Deepke

शिरसाट ने बताया कि, वे बीते 26 जुलाई को स्वयं अभिजीत दीपके के घर परिवार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने इस मुलाकात के पीछे की वजह भी स्पष्ट की। मंत्री ने कहा कि, वे अभिजीत को बचपन से जानते हैं। दोनों परिवारों के रिश्ते वर्षों पुराने और आत्मीय हैं। यहां तक कि उनका बेटा हर साल अभिजीत दीपके की बहन से राखी बंधवाता है।

गहरा रिश्ता है दीपके के परिवार से

शिरसाट ने यह भी कहा कि, दीपके परिवार उनके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता भी हैं, जिससे यह रिश्ता पारिवारिक के साथ-साथ राजनीतिक धरातल पर भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नजदीकी पारिवारिक संबंध होने के नाते उनका हालचाल जानने जाना स्वाभाविक था और इसी लिए उनके घर गया था। मंत्री ने ये भी बताया कि,  इससे पहले भी वे कई मौकों पर दीपके के घर जा चुके हैं। वे लोग भी उनके  कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे हैं।

मंत्री ने दोहराया कि दीपके परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि, अभिजीत राजनीति से दूरी बनाए रखें और किसी नौकरी में स्थिर होकर सुखद जीवन बिताएं। परिवार नहीं चाहता कि, वह किसी तरह के राजनीतिक टकराव या विवाद का हिस्सा बनें। बावजूद इसके, कुछ पक्ष लगातार उन्हें राजनीतिक मंच पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं, जिससे परिवार के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

इस दौरान शिरसाट ने एक दिलचस्प बात साझा की। उन्होंने बताया कि अभिजीत दीपके ने स्वयं उनसे कहा था कि, जहां बाकी सभी लोगों के फोन आए, वहीं उन्हें मंत्री का फोन न आने का मलाल रहा। शिरसाट ने यह भी बताया कि, आंदोलन के दौरान अभिजीत भावुक भी हो उठे थे, जो उनके मन की उथल-पुथल को दर्शाता है।

आंदोलन पर तीखी टिप्पणी

संजय शिरसाट ने हाल के आंदोलन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां आंदोलन जोरों पर था, वहीं दूसरी ओर पेड़े बांटे जाने जैसे दृश्य भी सामने आए, जो लोगों के बीच खासी चर्चा का विषय बने। उन्होंने महाराष्ट्र की माटी की तारीफ करते हुए कहा कि, इस भूमि में गजब की ताकत है और मराठवाड़ा ने न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश को नेतृत्व प्रदान किया है। इस संदर्भ में उन्होंने वरिष्ठ नेता शरद पवार का उल्लेख किया और कहा कि, वे भी महाराष्ट्र की धरती से निकलकर देश के नेतृत्व तक पहुंचे।

संजय राउत पर हमला

मंत्री ने शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि, राउत हमेशा सिर्फ अपने दल के हितों को आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं। हालांकि उन्होंने उद्धव ठाकरे के लिए शुभकामनाएं भी दीं और उनकी सभी परेशानियां जल्द दूर होने की कामना की।

Abhijeet Deepke

शिरसाट ने तंज कसते हुए कहा कि, लगता है उत्तर प्रदेश में कोई घटना घटी और उसी की खुशी में महाराष्ट्र में पेड़े बांटे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ,ठाणे, पुणे और मातोश्री की लगातार दौड़-भाग का इस पूरे प्रकरण से आखिर क्या नाता है। उनके अनुसार, कुछ नेता महज अपनी-अपनी राजनीतिक दुकान चमकाने के लिए ऐसे आयोजन कर रहे हैं।

 विपक्ष ने किया आन्दोलन का इस्तेमाल

युवाओं के योगदान की सराहना करते हुए शिरसाट ने कहा कि, हालिया आंदोलन में देश का युवा वर्ग पूरी तरह अपने बलबूते पर खड़ा हुआ। उसे किसी नेता के सहारे की जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि, इंडिया गठबंधन से जुड़े नेताओं ने इस आंदोलन का इस्तेमाल कर अपनी ही राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश की। मंत्री ने यह दावा भी किया कि खुद अभिजीत दीपके ने उनसे कहा था कि, विपक्ष लगभग समाप्त हो चुका है।

फडणवीस और राउत के बयानों पर पलटवार

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर संजय राउत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरसाट ने तीखा सवाल किया। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि, यह जानकारी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में फडणवीस को शिक्षा मंत्री बनाने की योजना है, राउत तक कैसे पहुंची। तंज भरे अंदाज में उन्होंने कहा कि, वास्तव में तो ‘मन की बात’ अब संजय राउत ही करते नजर आ रहे हैं और लगातार ऐसे बयान देकर सुर्खियां बटोर रहे हैं।

 छात्रों से की ये अपील

मंत्री ने ने इस दौरान एक संवेदनशील मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि, केवल नीट परीक्षा ही नहीं, बल्कि दसवीं और बारहवीं कक्षा में कम अंक आने पर भी कई छात्र घर छोड़ने जैसा घातक कदम उठा लेते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि ऐसी विषम परिस्थितियों में कभी कोई गलत या जल्दबाजी भरा निर्णय न लें। प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि, इसका आदेश किसने दिया था, लेकिन अगर बिना अनुमति के ऐसी कार्रवाई हुई है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

शरद पवार को लेकर दिया बड़ा बयान

बातचीत के आखिर में शिरसाट ने शरद पवार को लेकर कहा कि, उन्हें अपनी राजनीतिक रणनीति और रुख समय-समय पर बदलने की पुरानी आदत रही है, इसलिए भविष्य में उनके किसी नए फैसले पर हैरानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर पवार आगे कोई निर्णय लेते हैं, तो संभावना है कि वह महाराष्ट्र के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा।

महाविकास आघाड़ी गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि अब यह गठबंधन व्यावहारिक रूप से अस्तित्व में नहीं रह गया है। प्रशासनिक व्यवस्था पर बोलते हुए शिरसाट ने स्वीकार किया कि, यह दावा करना मुश्किल है कि, कोई भी सरकारी अधिकारी पैसे की मांग नहीं करता। उनका कहना था कि, अच्छे से काम करना हर अधिकारी का दायित्व और अधिकार दोनों है, लेकिन यदि कोई अधिकारी दलाली या भ्रष्टाचार में लिप्त होना चाहता है, तो उसे बेहतर होगा कि वह नौकरी छोड़कर वही रास्ता अपनाए।

 

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