धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं तो बैठक बेकार, CJP की सरकार को दो टूक चेतावनी

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहे इस प्रदर्शन के 25 दिन बाद सरकार और संगठन के बीच बातचीत का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के बीच किसी बात पर सहमति नहीं बन पाई है, गतिरोध अब भी बरकरार है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शनिवार को साफ शब्दों में कहा दिया कि, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार के साथ आगे किसी भी तरह की बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं बचेगा।

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दो विषयों पर हुई चर्चा

गौरतलब है कि, शुक्रवार को सरकार और CJP प्रतिनिधिमंडल के बीच एक दौर की बातचीत हुई थी, जिसमें कुछ हद तक सकारात्मक नतीजे सामने आए। आशुतोष रांका के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से दो विषयों पर चर्चा हुई, पहला, पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों को दिए जाने वाले मुआवजे का मसला और दूसरा, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए विभिन्न मामलों को वापस लेने की मांग। रांका ने बताया कि, इन दोनों मुद्दों पर सरकार की ओर से सिद्धांत रूप में सहमति जताई गई है और संगठन को उम्मीद है कि जल्द ही इस बारे में सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन भी मिलेगा।

CJP

हालांकि, इन दो मुद्दों पर बनी सहमति के बावजूद आंदोलन की सबसे केंद्रीय और अहम मांग यानी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पर सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट या ठोस रुख सामने नहीं आया है। यही बात संगठन और सरकार के बीच जारी गतिरोध की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है।

‘साफ बता दें, वरना बैठकों का कोई मतलब नहीं’  रांका की दो टूक मीडिया से बातचीत में आशुतोष रांका ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने पहले ही यह तय कर लिया है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तो उसे इस बारे में संगठन को स्पष्ट रूप से अवगत करा देना चाहिए। रांका ने कहा कि इस स्थिति में आगे किसी भी प्रकार की बातचीत या बैठक करना निरर्थक साबित होगा।

उन्होंने आगाह किया कि अगर सरकार अपने मौजूदा रुख पर अड़ी रहती है, तो संगठन को अपनी आगे की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा, और ऐसी स्थिति में उन्हें भी एक कड़ा और निर्णायक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

रांका के इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि सीजेपी अब सरकार के अगले फैसले पर बारीकी से नजर रखे हुए है और यदि आने वाले दिनों में मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई सकारात्मक घोषणा नहीं होती, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

NTA के 47 अधिकारी हटाये गये

इसी बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को उनके पदों से हटाने का फैसला लिया है। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन इस फैसले से जुड़ी संपूर्ण जानकारी और विस्तृत ब्योरा देखने के बाद ही इस पर कोई औपचारिक टिप्पणी करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कार्रवाई से आंदोलन की मूल और सबसे अहम मांग  यानी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा किसी भी रूप में प्रभावित या कमजोर नहीं होती।

रांका के मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में हुई गंभीर अनियमितताओं, पेपर लीक की घटना और इसके परिणामस्वरूप कुछ छात्रों द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदमों जैसे संवेदनशील मामलों की अंतिम और सर्वोच्च जवाबदेही देश के शिक्षा मंत्री की ही बनती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल अधिकारियों को बर्खास्त करने या निलंबित करने भर से इस पूरे प्रकरण की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती, और इसलिए मंत्री का इस्तीफा अनिवार्य है।

जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना जारी

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। भारी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक इस आंदोलन में शामिल होकर सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष अपनी सभी मांगों का एक विस्तृत और व्यवस्थित चार्टर प्रस्तुत किया है। इस चार्टर में देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े और दूरगामी सुधार लाने से जुड़े कई अहम प्रस्ताव शामिल किए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सरकार इन सुधार प्रस्तावों पर गंभीरता और ईमानदारी से काम करने के लिए तैयार होती है, तो इसका स्वागत किया जाएगा। मगर साथ ही संगठन ने यह भी दोहराया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मांग आंदोलन की रीढ़ है और इसे लेकर संगठन के रुख में कोई नरमी देखने को नहीं मिल रही है।

आगे की रणनीति सरकार के रुख पर निर्भर

फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहने के साथ-साथ पूरे मामले पर सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। CJP ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में सरकार जो भी रुख अपनाती है, उसी के आधार पर आंदोलन की नई रणनीति और आगे की दिशा तय की जाएगी। यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तो आंदोलन के और तेज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, NEET पेपर लीक मामले में शुरू हुआ यह विवाद अब सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की कुर्सी तक जा पहुंचा है, और आने वाले दिनों में इस पर सरकार का रुख यह तय करेगा कि आंदोलन शांतिपूर्ण बातचीत से सुलझता है या फिर यह और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरता है।

 

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