
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) को लेकर खड़ा हुआ पेपर लीक का विवाद थमता हुआ नहीं नजर आ रहा है। छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश के बाद ये केस सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। कोर्ट ने परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने को लेकर एक और नई महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है। यह ताजा अर्जी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉक्टर ध्रुव और हरिशरण देवगन की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई है।
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21 जून को कराई जाए परीक्षा
याचिकाकर्ताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मौजूदा ढर्रे पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस राष्ट्रीय परीक्षा के पूरे ढांचे को बदलने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग शीर्ष अदालत से की है।

इस नई याचिका में सबसे प्रमुख मांग आगामी 21 जून को होने वाली NEET-UG पुनर्परीक्षा को लेकर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि आने वाली 21 जून की परीक्षा को पारंपरिक ‘पेन-एंड-पेपर’ यानी ऑफलाइन मोड के बजाय तुरंत कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन प्रणाली में आयोजित करने का निर्देश दिया जाए।
ऑनलाइन सिस्टम पर जोर
इसके साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित प्रतिवादियों को यह आदेश देने की मांग भी की गई है कि वे भविष्य में नीट को पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम पर शिफ्ट करने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना अदालत के समक्ष पेश करें। इस योजना में साइबर सुरक्षा, देश भर के परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढांचा और दूर-दराज के अभ्यर्थियों की पहुंच का पूरा खाका शामिल होना चाहिए।
याचिका में लचर हो चुकी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर भी कड़ा प्रहार किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एनटीए बार-बार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने में विफल साबित हुई है, इसलिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह एनटीए की जगह एक नई, स्वतंत्र और पेशेवर संस्था ‘National Examination Authority’ का गठन करे, जिसकी पूरी वैधानिक जवाबदेही हो और जो न्यायिक निगरानी के दायरे में काम करे।
हाईटेक सुरक्षा इंतजामों की वकालत
परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव और सुधारों का सुझाव देने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, जाने-माने शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स, फोरेंसिक वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हों। इसके अलावा याचिका में परीक्षाओं को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने के लिए हाईटेक सुरक्षा इंतजामों की वकालत की गई है।
मांग की गई है कि सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग को अनिवार्य किया जाए। साथ ही एन्क्रिप्टेड डिजिटल क्वेश्चन पेपर ट्रांसमिशन, बायोमेट्रिक सत्यापन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाए, जिससे फिजिकल रूप से पेपर लीक होने का जोखिम हमेशा के लिए खत्म हो सके।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह भी कहा है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाए, ताकि भविष्य में छात्रों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो सके।कागजी बदलावों के इतर, इस पूरे रैकेट के पीछे काम कर रहे माफियाओं पर भी नकेल कसने की तैयारी इस याचिका के जरिए की गई है।
मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई
देश भर में फैले कोचिंग माफिया, बिचौलियों, रसूखदार व्यक्तियों और विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सख्त आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। मामले की गहराई से जांच के लिए याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सीबीआई को इस पेपर लीक मामले की जांच की प्रगति और गिरफ्तारियों का पूरा विवरण देते हुए अगले चार हफ्तों के भीतर अदालत में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया जाए।
साथ ही, परीक्षा में हुई किसी भी तरह की असामान्यता या संदिग्ध स्कोरिंग को पकड़ने के लिए NEET-UG के परिणाम केंद्रवार प्रकाशित करने की मांग की गई है ताकि पूरी पारदर्शिता जनता के सामने आ सके।
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