मेरठ में घूस लेते पकड़ा गया दारोगा, कार्रवाई के नाम पर मांगे 20 हजार

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन टीम ने थाना गंगानगर में तैनात दरोगा प्रकाश चंद को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि, यह दरोगा 6.05 लाख रुपये की ठगी से जुड़े एक मामले की विवेचना कर रहा था और मामले में आगे की कार्रवाई बढ़ाने के नाम पर पीड़ित से लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। जब इस बारे में शिकायत मिली, तो एंटी करप्शन टीम ने पूरी योजना के साथ जाल बिछाया और पुलिस लाइन के गेट नंबर-3 के पास आरोपी दरोगा को रिश्वत लेते ही धर दबोचा।

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 15 अप्रैल को दर्ज कराया था ठगी का मुकदमा

जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के लिब्बा लेढ़ी क्षेत्र के रहने वाले दीपक ने बताया कि, उनके भाई नमन ने बीते 15 अप्रैल को थाना गंगानगर में 6.05 लाख रुपये की ठगी को लेकर एक मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की विवेचना का जिम्मा 1993 बैच के दरोगा प्रकाश चंद को सौंपा गया था। आरोप है कि, विवेचना के दौरान ही दरोगा ने केस में आगे कार्रवाई करने और आरोपियों पर पुलिसिया दबाव बनाने के बदले पीड़ित से रिश्वत की मांग शुरू कर दी थी।

Bribery daroga arrested in Meerut b

शुरुआत में पीड़ित ने रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन जब दरोगा की ओर से लगातार दबाव बनाया जाता रहा, तो उसने हिम्मत जुटाकर मेरठ एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और पूरे मामले की विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद टीम ने सबसे पहले इसकी सत्यता की जांच की और उसके सत्यापित होने पर एक सुनियोजित जाल बिछाया। इसी जाल के तहत पुलिस लाइन के गेट नंबर-3 के पास जैसे ही दरोगा ने पीड़ित से 20 हजार रुपये की रिश्वत ली, टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

निवेश के नाम पर हुई ठगी

अब बात करते हैं उस मूल ठगी मामले की, जिसकी वजह से यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। पीड़ित नमन के अनुसार उनकी भाभी सोनम ने ही उनकी मुलाकात मुजफ्फरनगर जिले के घटायन उत्तरी गांव के रहने वाले नवनीत, उसकी मां संगीता और उनके एक साथी पवन से कराई थी। इन आरोपियों ने खुद को जमीन की खरीद-फरोख्त और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़ा हुआ बताया और नमन को यह झांसा दिया कि अगर वह उनके पास निवेश करेंगे, तो महज एक महीने के भीतर ही उनकी रकम दोगुनी हो जाएगी।

इस झांसे में आकर नमन ने आरोपियों पर भरोसा कर लिया और अलग-अलग तारीखों में कुल 6 लाख 5 हजार रुपये उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसमें 27 अक्टूबर 2025 को एक लाख रुपये भेजे गए, इसके बाद 9 नवंबर को ऑनलाइन माध्यम से दो हजार और तीन हजार रुपये की दो अलग किस्तें भेजी गईं, और फिर 17 नवंबर 2025 को आरटीजीएस के जरिए सबसे बड़ी रकम, यानी पांच लाख रुपये ट्रांसफर की गई।

नहीं मिला मुनाफा

पीड़ित नमन का आरोप है कि, इतनी बड़ी रकम लेने के बावजूद आरोपियों ने न तो उन्हें वादे के मुताबिक मुनाफा दिया और न ही उनका मूल पैसा वापस लौटाया। जब वे परेशान होकर अपना पैसा वापस मांगने के लिए आरोपियों के घर पहुंचे, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें वहां से भगा दिया गया। इसके बाद जब पीड़ित ने स्थानीय लोगों से इस बारे में पूछताछ की, तो यह सच्चाई सामने आई कि आरोपियों का जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई वास्तविक कारोबार है ही नहीं। पता चला कि ये लोग भोले-भाले लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर इसी तरह ठगी की वारदातों को अंजाम देते रहे हैं।

मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि बाद में नवनीत और पवन ने फोन पर पीड़ित से गाली-गलौज करते हुए उसे जान से मारने की धमकी भी दी। आरोपियों ने साफ शब्दों में कह दिया कि वे न तो उसका पैसा वापस लौटाएंगे और न ही किसी तरह के पुलिसिया या कानूनी दबाव में आएंगे। इन्हीं धमकियों और परेशानियों से तंग आकर पीड़ित ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी विवेचना का जिम्मा दरोगा प्रकाश चंद को सौंपा गया था।

पुलिस महकमे में हड़कंप

जैसे ही दरोगा प्रकाश चंद के रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार होने की खबर फैली, पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एक तरफ जहां पीड़ित पहले से ही ठगी का शिकार होकर परेशान था। वहीं दूसरी तरफ जिस अधिकारी से उसे न्याय की उम्मीद थी, वही खुद रिश्वतखोरी में लिप्त निकला। इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल एंटी करप्शन टीम ने आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिवत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही इस पूरे मामले के अन्य पहलुओं की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दरोगा ने इससे पहले भी इसी तरह किसी अन्य पीड़ित से रिश्वत मांगी थी या नहीं। मूल ठगी मामले में शामिल नवनीत, संगीता और पवन के खिलाफ भी पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है, ताकि पीड़ित को उसका न्याय और रकम वापस दिलाई जा सके।

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