
मेरठ। पश्चिम बंगाल समेत तीन राज्यों के हालिया चुनावी परिणामों में मिली शानदार सफलता के बाद बीजेपी ने अब अपना पूरा ध्यान देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश पर केंद्रित कर दिया है। ‘मिशन यूपी-2027’ को फतह करने के लिए पार्टी ने अभी से बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा आलाकमान का स्पष्ट मानना है कि 2027 की राह बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की सक्रियता से ही होकर गुजरती है, इसीलिए प्रदेश भर में संगठन को नए सिरे से धार दी जा रही है।
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जनपद स्तर पर गहमागहमी
मेरठ से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर शुरू हो गया है और उन कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लाने की कोशिश की जा रही है जो पिछले कुछ समय से किन्हीं कारणों से निष्क्रिय हो गए थे। पार्टी नेतृत्व का पूरा जोर इस बात पर है कि, संगठन के भीतर जो भी असंतोष हो वह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दूर हो जाए और सभी कार्यकर्ता नई ऊर्जा के साथ चुनाव की तैयारियों में जुट जाएं।

मेरठ में भाजपा के भीतर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया पिछले काफी समय से चल रही है। हालांकि, यह सफर उतना आसान नहीं रहा है। नवंबर 2024 में शुरू हुई सांगठनिक चुनाव की प्रक्रिया लंबी खींचती गई। मेरठ में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पदों के लिए जिस तरह की गहमागहमी और खींचतान देखी गई, उसने आलाकमान को भी फूंक-फूंक कर कदम रखने पर मजबूर कर दिया है।
महानगर अध्यक्ष के रूप में विवेक रस्तोगी के नाम पर 16 मार्च 2025 को मुहर तो लग गई, लेकिन जिलाध्यक्ष का पद काफी समय तक खाली रहा। अंततः जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए भाजपा ने अति पिछड़ा वर्ग पर दांव लगाया और 26 नवंबर 2025 को हरवीर सिंह पाल को मेरठ का जिलाध्यक्ष घोषित किया। इस नियुक्ति के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह 2027 के महासंग्राम में पिछड़ों और अति पिछड़ों को सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है।
महानगर कार्यकारिणी घोषित
संगठन के विस्तार की बात करें तो 17 मार्च 2026 को महानगर की कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है, लेकिन जिला इकाई की कार्यकारिणी का गठन अभी भी अधर में लटका हुआ है। जिले की टीम में सबसे अधिक पेच तीन महामंत्री के पदों को लेकर फंसा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि इन पदों के लिए कई दिग्गज दावेदार अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पार्टी के भीतर इस समय जातीय समीकरणों को कसौटी पर परखा जा रहा है, जिन जातियों के प्रभावशाली नेता जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में पिछड़ गए थे, उन्हें उपाध्यक्ष या महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर समायोजित करने की रणनीति बनाई गई है।

पार्टी नेतृत्व चाहता है कि, जिला कार्यकारिणी का स्वरूप ऐसा हो जो हर वर्ग और हर जाति का प्रतिनिधित्व करता नजर आए, ताकि 2027 के चुनावों में किसी भी वर्ग की नाराजगी पार्टी पर भारी न पड़े। उत्तर प्रदेश की नई प्रदेश कार्यकारिणी में भी मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेताओं का दबदबा रहने के आसार हैं। मेरठ की धरती ने भाजपा को कई कद्दावर नेता दिए हैं। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, जो पहले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं, उनकी भूमिका इस बार भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को मौका
वहीं एमएलसी अश्विनी त्यागी, जिन्होंने लंबे समय तक प्रदेश मंत्री, उपाध्यक्ष और महामंत्री के रूप में संगठन को मजबूती दी है, उनकी दावेदारी भी काफी मजबूत मानी जा रही है। वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर आसीन पूर्व सांसद कांता कर्दम और पूर्व में कार्यकारिणी का हिस्सा रहे देवेंद्र सिंह जैसे नाम भी नई टीम में जगह पा सकते हैं। अवनीश त्यागी, जो इस समय प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें भी उनके बेहतर प्रदर्शन का इनाम मिल सकता है। पार्टी का लक्ष्य है कि अनुभवी पुराने चेहरों के साथ-साथ ऊर्जावान नए कार्यकर्ताओं को भी प्रदेश स्तर पर मौका दिया जाए।
वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार या फेरबदल को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कई चेहरे योगी सरकार में शामिल होने के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। जाट समाज के बड़े नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा, पिछले कुछ समय से उपेक्षित महसूस कर रहे त्यागी समाज को साधने के लिए मुरादनगर के विधायक अजीतपाल त्यागी या एमएलसी अश्विनी त्यागी में से किसी एक को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।
चुनाव जिताने वाला ही बनेगा अध्यक्ष
गुर्जर समाज से भी कई बड़े नाम दौड़ में हैं, जिनमें एमएलसी अशोक कटारिया, दादरी विधायक तेजपाल सिंह और एमएलसी वीरेंद्र सिंह शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि मंत्रिमंडल के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर सामाजिक समीकरण को साध लिया जाए ताकि मिशन 2027 का रास्ता निष्कंटक हो सके। संगठनात्मक रूप से सबसे महत्वपूर्ण पद क्षेत्रीय अध्यक्ष को लेकर भी इस समय सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है।
पश्चिमी क्षेत्र का अध्यक्ष वही व्यक्ति बनेगा जिसके कंधों पर 2027 के चुनाव की कमान संभालने की क्षमता होगी। इस पद की दौड़ में एमएलसी मोहित बेनीवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश त्यागी, सुनील भराला, डीके शर्मा, जयकरण गुप्ता और नरेश गुर्जर जैसे नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। इसके अलावा डॉ. विकास अग्रवाल, हरीश ठाकुर, हरिओम शर्मा, नवाब सिंह नागर, इंद्रपाल प्रजापति और अजीत चौधरी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष का पद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम उत्तर प्रदेश की सीटों का गणित ही उत्तर प्रदेश की सत्ता का द्वार खोलता है।
अभियानों की भी झड़ी
पार्टी इस समय केवल नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर भी अभियानों की झड़ी लगा दी गई है। हाल ही में संपन्न हुआ नारी शक्ति वंदन अभियान काफी सफल रहा है, जिसने महिला मतदाताओं के बीच भाजपा की पैठ को और मजबूत किया है। वर्तमान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के तहत कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इन अभियानों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पार्टी के सांसद, विधायक और बड़े पदाधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना पार्टी के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। भाजपा का यह चुनावी रोडमैप साफ करता है कि वह 2027 की जंग को किसी भी हाल में हल्के में नहीं ले रही है और आने वाले कुछ हफ्तों में उत्तर प्रदेश भाजपा में कई बड़े और निर्णायक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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