घटी मेरठ से प्रयागराज की दूरी, बन कर तैयार हुआ ये एक्सप्रेसवे, उतरेंगे लड़ाकू विमान भी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की विकास गाथा में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। पश्चिम को पूरब से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शुमार गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य और रन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी से लेकर दिल्ली तक के गलियारों में इस समय इसी मेगा प्रोजेक्ट की चर्चा है।

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अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक, यह एक्सप्रेसवे न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार भी देगा। आगामी 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई के सलेमपुर में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का राष्ट्र को लोकार्पण करेंगे। यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार है, जो सफर के दौरान सुरक्षा और सुविधा के वैश्विक मानकों को पूरा करता है।

This expressway is ready

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की देखरेख में रिकॉर्ड समय में पूरा करने की कोशिश की गई है। इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी इसका जीरो रिस्क मॉडल है। मेरठ के बिजौली से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाले इस लंबे सफर में वाहन चालकों की थकान और नींद को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

रंबल स्ट्रिप्स से रुकेंगे हादसे

अक्सर देखा गया है कि लंबी दूरी के सफर में एकरसता की वजह से चालकों को झपकी आ जाती है, जिससे बड़े हादसे होते हैं। इस खतरे को भांपते हुए पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे आधुनिक रंबल स्ट्रिप्स लगाई गई हैं। ये स्ट्रिप्स तकनीक के माध्यम से सड़क की सतह पर एक विशेष प्रकार का कंपन पैदा करती हैं। जैसे ही कोई वाहन सड़क की मुख्य लेन से थोड़ा भी भटकता है या किनारे की ओर जाता है, टायरों के घर्षण से तेज आवाज और कंपन पैदा होता है, जो सोए हुए या सुस्त चालक को तुरंत सचेत कर देता है।

इंजीनियरों का दावा है कि यह तकनीक थकान से होने वाले हादसों को न्यूनतम स्तर पर ले आएगी। सुविधाओं के मामले में गंगा एक्सप्रेसवे किसी विकसित देश की सुपर-हाईवे प्रणाली से कम नहीं है। यूपीडा के अधिशासी अभियंता राकेश मोगा के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सहूलियत के लिए चप्पे-चप्पे पर आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। सफर के दौरान यात्रियों को रुकने के लिए शानदार विश्राम स्थल, उच्च स्तरीय भोजनालय और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

मजबूत होगा सुरक्षा घेरा

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए एक्सप्रेसवे के किनारे ट्रॉमा सेंटर भी बनाए गए हैं। सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत है कि, पूरा एक्सप्रेसवे सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में रहेगा। यदि कोई वाहन चालक स्टंट करता है, ओवरस्पीडिंग करता है या किसी भी प्रकार की संदिग्ध आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो कंट्रोल रूम को तुरंत इसकी सूचना मिल जाएगी और अगले टोल प्लाजा पर उसे रोका जा सकेगा।

तकनीकी रूप से यह एक्सप्रेसवे स्मार्ट ट्रैवल का अनुभव प्रदान करेगा। मेरठ से प्रयागराज के बीच कुल 15 टोल प्लाजा बनाए गए हैं, जहां कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। हालांकि, यात्रियों को बार-बार रुककर समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यहां आधुनिक ऑटोमैटिक टोल कलेक्शन सिस्टम लगाया गया है। एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ-हापुड़ रोड स्थित बिजौली गांव से हो रही है, जहां से चार किलोमीटर की दूरी पर खड़खड़ी में पहला टोल स्थित है।

स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम एक्टिव

इसके साथ ही, पूरे मार्ग पर स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन ने वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की है। एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि, इतनी तेज रफ़्तार पर भी वाहन को किसी भी प्रकार के झटके या असंतुलन का अनुभव नहीं होगा।

गंगा एक्सप्रेसवे की एक और ऐतिहासिक खूबी इसकी सामरिक महत्ता है। यह केवल नागरिक परिवहन के काम नहीं आएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा पंक्ति को भी मजबूती देगा। इस एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर विशेष हवाई पट्टियां बनाई गई हैं, जहां आपातकाल की स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को लैंड कराया जा सकेगा और वहां से उड़ान भी भरी जा सकेगी।

शाहजहांपुर के जलालाबाद में तैयार की गई 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी इसका प्रमुख उदाहरण है। यह यूपी का ऐसा एक्सप्रेसवे है जो सीधे तौर पर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को आपस में जोड़ रहा है। इससे इन जिलों के बीच व्यापार और माल ढुलाई की लागत में भारी कमी आने की उम्मीद है।

यूपीडा प्रशासन मुस्तैद

लोकार्पण की तैयारियों को लेकर यूपीडा प्रशासन बेहद मुस्तैद है। फिलहाल मेरठ के बिजौली में इंटरचेंज के मार्गों को सुरक्षा कारणों से मिट्टी डालकर बंद रखा गया है, ताकि अनधिकृत वाहन प्रवेश न कर सकें। उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले इन बाधाओं को हटा दिया जाएगा। पूरे मार्ग पर साइनबोर्ड और स्ट्रीट लाइट्स और डिवाइडर पर हरियाली का काम पूरा हो चुका है।

This expressway is ready

यूपीडा के अधिकारियों का कहना है कि, यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास का मुख्य आधार बनेगा। प्रयागराज में लगने वाले आगामी कुंभ के लिए भी यह एक्सप्रेसवे एक बड़ी जीवनरेखा साबित होगा, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से आने वाले श्रद्धालु अब मात्र 6 से 7 घंटे में प्रयागराज पहुंच सकेंगे, जो पहले 12 से 14 घंटे का सफर होता था।

पीएम मोदी 29 अप्रैल को करेंगे उद्घाटन

29 अप्रैल की तारीख उत्तर प्रदेश के इतिहास में विकास के एक नए सूर्योदय के रूप में दर्ज होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद, गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहनों के फर्राटे भरने का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे विकसित करना भी है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर सृजित होंगे। कुल मिलाकर गंगा एक्सप्रेसवे न केवल दो शहरों की दूरी कम कर रहा है, बल्कि यह यूपी के एक्सप्रेस प्रदेश बनने के सपने को भी हकीकत में बदल रहा है। अब यात्रियों को न धूल का सामना करना पड़ेगा और न ही ट्रैफिक जाम का बस 120 की रफ़्तार और सुरक्षित सफर की गारंटी होगी।

 

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