राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ेंगे वकील, चंपत राय से पुलिस ने की घंटों पूछताछ

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां पुलिस और एसआईटी की जांच तेज हो गई है। वहीं दूसरी तरफ फैजाबाद बार एसोसिएशन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों की पैरवी करने से साफ इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, एसोसिएशन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत दो अन्य पदाधिकारियों को अयोध्या छोड़ने की मांग तक कर डाली है। इस पूरे प्रकरण ने देशभर में धार्मिक आस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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चंपत राय से पूछे गए ये सवाल

सोमवार की सुबह पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बुलाकर उनसे विस्तृत पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। बंद कमरे में घंटों तक चली इस पूछताछ में पुलिस ने कई अहम पहलुओं पर सवाल किए। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया, मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, दान संग्रह की कार्यप्रणाली और चोरी के संभावित कारणों पर गहन पूछताछ हुई।

Ram Temple offering theft b

जांच एजेंसी ने सिर्फ चंपत राय से ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। पुलिस चढ़ावे के संग्रह से लेकर उसकी गिनती और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि चोरी किस स्तर पर और कैसे हुई।

6 जून को सामने आया था मामला

यह पूरा विवाद 6 जून को उस वक्त शुरू हुआ जब राम मंदिर की चढ़ावा धनराशि में गड़बड़ी और चोरी की बात सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने तेजी से जांच पूरी की और अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। 25 जून की शाम को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने एफआईआर दर्ज कराई। इस एफआईआर में चढ़ावे की गणना में शामिल छह कर्मियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा के नाम शामिल किए गए। इनके अलावा पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे सुभाष श्रीवास्तव और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू पर भी मुकदमा दर्ज किया गया।

सलाखों के पीछे हैं 8 आरोपी

एसआईटी की जांच रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि, चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में सेवारत कुछ कर्मचारियों ने भेंट और चढ़ावे की धनराशि की चोरी की है। पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी निभा रहे सुभाष श्रीवास्तव और बैंक पर्यवेक्षक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई है।

रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को इन आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होनी है। यह इस मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

बार एसोसिएशन का कड़ा रुख 

इस मामले ने कानूनी जगत में भी हलचल मचा दी है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लेते हुए घोषणा की है कि कोई भी वकील इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालका प्रसाद मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी अधिवक्ता ने आरोपियों का बचाव किया तो उस पर पांच लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उसका वकालत का लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा।

यह फैसला बताता है कि, इस चोरी के मामले ने स्थानीय लोगों और कानूनी बिरादरी की धार्मिक भावनाओं को कितनी गहरी ठेस पहुंचाई है। राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी को लोग न केवल आपराधिक कृत्य बल्कि आस्था के साथ विश्वासघात मान रहे हैं।

बार एसो. ने दी आन्दोलन की चेतावनी

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालका प्रसाद मिश्रा ने इससे भी आगे बढ़कर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तत्काल अयोध्या छोड़ने की मांग कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि, यदि ये तीनों अयोध्या नहीं छोड़ते तो बार एसोसिएशन बड़ा आंदोलन करने से नहीं हिचकेगी।

Ram Temple offering theft

यह मांग इस बात का संकेत है कि अयोध्या में आम लोगों और संगठनों का गुस्सा अब ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व पर भी केंद्रित होने लगा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि, इतने बड़े मंदिर में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे रही कि कर्मचारी लंबे समय तक चोरी करते रहे और किसी को खबर नहीं लगी।

पुलिस और एसआईटी की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि, चोरी कब से हो रही थी, कितनी रकम की हेराफेरी हुई और क्या इसमें और लोग भी शामिल थे। ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

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