
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला जितना सामने आया है, उससे कहीं ज्यादा अभी और उजागर होने वाला है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस घोटाले की परतें एक-एक करके खुलती जा रही हैं। विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य और साक्ष्य जुटाए हैं जो यह संकेत देते हैं कि यह खेल कोई एक दिन का नहीं, बल्कि कई वर्षों से बड़े सुनियोजित तरीके से चलता आ रहा था।
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इंजीनियर से पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में पिछले पांच साल के चढ़ावे का व्यापक ऑडिट कराने की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और उसके बाद आगे की बड़ी कार्रवाई शुरू होगी। इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब एसआईटी के साथ गए अधिकारियों ने सोमवार को इंजीनियर दीनानाथ से पूछताछ की। ये वही इंजीनियर हैं जिन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा पर 40 फीसदी कमीशन लेने का गंभीर आरोप लगाया था।

इस आरोप ने पूरे मामले को एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ दे दिया था। दीनानाथ से पूछताछ में कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने में मददगार साबित होंगे। एसआईटी के तीनों वरिष्ठ अधिकारी भले ही लखनऊ लौट आए हों, लेकिन उनके साथ गए कई अन्य अधिकारी अभी भी अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं और जमीनी स्तर पर तथ्य जुटाने का काम जारी है।
करोड़ों श्रद्धालुओं को धक्का
एसआईटी की सिफारिशों में सबसे अहम है पिछले पांच साल के चढ़ावे का विस्तृत ऑडिट। यह सिफारिश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच में मिले कुछ साक्ष्यों से यह आशंका बलवती हुई है कि चढ़ावे में हेरफेर का यह खेल कई वर्षों से चल रहा था। अगर पांच साल का ऑडिट होता है तो इस पूरे घोटाले का वास्तविक आकार सामने आएगा और यह जानकर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं को गहरा धक्का लग सकता है जिन्होंने अपनी आस्था और भावना के साथ रामलला के चरणों में चढ़ावा अर्पित किया था। एसआईटी ने ऑडिट के साथ-साथ चढ़ावा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और ट्रस्ट में बदलाव करने के भी कई सुझाव दिए हैं। इन सुझावों पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे।
व्यवस्था में लापरवाही
एसआईटी रिपोर्ट में सिर्फ चढ़ावा चोरी के साक्ष्य ही नहीं हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था में बरती गई घोर लापरवाही को भी विस्तार से दर्ज किया गया है। सूत्रों के मुताबिक कई पदाधिकारियों की सीधी संलिप्तता की आशंका जताई गई है। इसके अलावा जो पदाधिकारी सीधे चोरी में शामिल नहीं थे, लेकिन जिनकी जिम्मेदारी निगरानी करने की थी और जिन्होंने आंखें मूंदे रखीं थी, उनकी भूमिका भी रिपोर्ट में प्रमुखता से उल्लेखित है। एसआईटी ने चोरी में संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी संस्तुति की है।
गवाहों के बयान भी इस मामले में बेहद अहम साबित हो रहे हैं। कई गवाहों ने ऐसी जानकारियां दी हैं, जो इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ करती हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि, जैसे-जैसे और गवाहों से पूछताछ होगी, नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आते रहेंगे।
ध्वस्त थी निगरानी व्यवस्था
एसआईटी की जांच में जो सबसे शर्मनाक पहलू सामने आया है वह है मंदिर प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था जो पूरी तरह ध्वस्त थी। मंदिर प्रबंधन गाइडलाइन गाइड लाइन का बिल्कुल भी पालन ही नहीं कर रहा था। जिम्मेदार पदाधिकारी पूरी तरह बेखबर बने रहे या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे रहे और इस बीच चढ़ावे में हेरफेर का खेल बेरोकटोक चलता रहा।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का प्रमुखता से जिक्र किया है कि नियम-कायदों की जो धज्जियां उड़ाई गई हैं वह ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों को भी इस मामले में जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाते हुए राम मंदिर में चढ़ावे की गणना में लगे करीब 40 कर्मचारियों को हटा दिया गया है। इनकी जगह अब बैंक की ओर से नए और विश्वसनीय गणनाकर्मियों को तैनात किया गया है। निगरानी व्यवस्था को भी पूरी तरह नए सिरे से मजबूत किया गया है। एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट और मंदिर के सभी अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का सख्त निर्देश दिया है ताकि जांच के दौरान जब भी उनसे पूछताछ की जरूरत पड़े तो वे उपलब्ध रहें।
ट्रस्ट भंग करने की मांग
इस पूरे विवाद के बीच धर्मसेना के अध्यक्ष संतोष दुबे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है। उनका कहना है कि, जिस ट्रस्ट पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे की जिम्मेदारी थी, उसने उस विश्वास को बुरी तरह तोड़ा है। यह मांग इस बात का संकेत है कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस मामले को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग चाहते हैं कि
दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले
रामलला के भक्तों की आस्था के साथ हुए इस खिलवाड़ ने पूरे देश को झकझोर दिया है। अब सबकी नजरें एसआईटी की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने पेश होगी। उसके बाद जो कार्रवाई होगी वह तय करेगी कि इस मामले में न्याय होता है या नहीं।
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