
देवरिया। अयोध्या में रामलला के मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि ये देश की सनातन आस्था, राजनीतिक जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता का सवाल बन गई है। एफआईआर दर्ज होने और आठों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार इस मामले पर खुलकर बोले और दोषियों को कड़ी चेतावनी दी। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक रंगे देने में जुटा है।
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दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
शुक्रवार को देवरिया पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने ये बातें यहां एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान कही। जनसभा में सीएम ने अयोध्या चंदा चोरी मामले पर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि, जन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सनातन धर्म की आस्था के साथ जो भी छेड़छाड़ करेगा, उसे अपने कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि, इस मामले में न कोई बड़ा है और न कोई छोटा, कानून सबके लिए एक समान है। इस मामले में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीएम योगी ने जनता को पूरा भरोसा दिलाते हुए कहा कि, बहुत जल्द इस पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सच्चाई सामने आएगी और दोषी चाहे जितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे सजा मिलकर रहेगी। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि सरकार इस जांच को सतही स्तर पर नहीं बल्कि गहराई तक ले जाने के मूड में है।
अयोध्या सनातन धर्म की आस्था का बड़ा प्रतीक
सीएम ने कहा, वे 19 जून को खुद अयोध्या गए थे। उसी दौरान जब उन्हें मंदिर में अनियमितता और गड़बड़ी की सूचना मिली, तो उन्होंने बिना एक पल की देरी किए एसआईटी गठित करने के आदेश दे दिए। उन्होंने कहा कि, एसआईटी की रिपोर्ट आते ही तुरंत कार्रवाई शुरू की गई, जो-जो नाम सामने आए, उनके खिलाफ उसी दिन एफआईआर दर्ज की गई और अब उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
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योगी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार ने इस मामले में न तो कोई लापरवाही बरती, न किसी को बचाने की कोशिश की और न ही जांच में कोई देरी होने दी। उनका कहना था कि, प्रशासन की पूरी कार्रवाई पारदर्शी, त्वरित और निष्पक्ष तरीके से हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, अयोध्या भारत के सनातन धर्म की आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। वहां किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विपक्ष पर बरसे
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बार-बार एक बात दोहराई, अयोध्या पर आक्षेप मत लगाओ। उन्होंने कहा कि, अयोध्या केवल एक शहर नहीं है, यह करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था, सदियों पुरानी सनातन संस्कृति और भारतीय अस्मिता का जीवंत केंद्र है। इस पवित्र नगरी को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि, प्रभु श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखें, जो लोग आज अयोध्या की आड़ में सियासत करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जनता पहचानती है और उचित समय पर जवाब भी देती है।
सीएम ने कहा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अवसरवाही है, जो लोग अयोध्या पर आरोप लगाकर सरकार को घेर रहे हैं, उनकी नीयत बिलकुल भी साफ़ नहीं हो। ये वही दल और नेता हैं जो दशकों तक भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते रहे। एक पक्ष तो खुलेआम कहता था कि राम हैं ही नहीं, ये लोग अयोध्या को और राम जन्मभूमि को स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं थे। ये वही लोग हैं, जो राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ सालों तक कोर्ट में मुकदमा लड़ते रहे, वकीलों की पूरी फौज खड़ी करते रहे और हर कदम पर राम मंदिर निर्माण को रोकने की कोशिश करते रहे। ये लोग जय श्री राम का उद्घोष करने वालों पर लाठियां बरसाते थे।
हिन्दुओं के पर्व पर दंगे भड़काता था विपक्ष
मुख्यमंत्री ने और भी तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि, यही लोग रामनवमी पर दंगे भड़काते थे, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर प्रतिबंध लगवाते थे, कांवड़ यात्रा को रोकने की साजिश करते थे और दुर्गा पूजा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा करवाते थे। आज वही लोग आस्था की दुहाई देकर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
योगी ने तंज कसते ही कहा, ये लोग हमें आस्था सिखाएंगे? जिन्होंने जीवन भर हिंदू धर्म और हिंदू आस्था को ठेस पहुंचाई, वे आज हमारे सामने धर्म और श्रद्धा का पाठ पढ़ाने बैठे हैं। जनता इन्हें अच्छी तरह जानती है।
इक़बाल अंसारी ने जाहिर किया दुःख
आपको बता दें कि, यह पूरा प्रकरण इसलिए भी बेहद संवेदनशील हो गया है, क्योंकि राम मंदिर दशकों के लंबे संघर्ष, अनगिनत कुर्बानियों और करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था तथा अथक प्रयासों का परिणाम है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां आते हैं और चढावा चढ़ाते हैं। ऐसे में इस पवित्र धन की चोरी एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा और विश्वास के साथ घोर विश्वासघात है। पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने भी इस पर गहरा दुख जाहिर किया और कहा कि इतने कैमरों और कड़ी निगरानी के बावजूद भगवान के घर में चोरी हो गई, यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईटी की पूरी रिपोर्ट आने के बाद जांच का दायरा कितना बढ़ेगा और कितने बड़े घोटाले का राज खुलेगा। क्या बड़े नाम भी सामने आएंगे? क्या ट्रस्ट के भीतर किसी की भी जवाबदेही तय होगी? बैंक खातों की जांच से मनी ट्रेल स्थापित होने के बाद क्या नए खुलासे होंगे? अभी इन सवालों के जवाब ढूढे जाने बाकी हैं
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