
अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि की चोरी का मामला अब तेजी से कानूनी शिकंजे में कसता जा रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सभी आठों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब इन सभी के बयान एक-एक कर रिकॉर्ड किए जा रहे हैं और बैंक खातों की जांच के जरिए मनी ट्रेल स्थापित करने की तैयारी है। इस मामले ने न केवल धार्मिक आस्था को आहत किया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
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क्या है पूरा मामला?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जब मंदिर में चढ़ावे की धनराशि की गणना प्रक्रिया की जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई कि, गणना प्रक्रिया के दौरान कुछ कर्मियों ने आपराधिक तरीके से चढ़ावे की धनराशि की चोरी की। इनमें से छह कर्मचारी तो मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज में पैसे का गबन करते हुए सीधे कैद हो गए, जिसके बाद मामला और ठोस हो गया।

ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन यादव ने अयोध्या थाना प्रभारी को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पत्र में उन्होंने एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए आठ लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत करने का अनुरोध किया।
इन पर दर्ज हुई FIR
पुलिस ने जिन आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें पैसा गिनने वाली टीम के मुखिया के रूप में सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पैसे गिनने का काम करने वाले छह कर्मचारी रमाशंकर मिश्रा, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडेय भी आरोपी हैं। आपको बता दें कि, मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा है और वह भी पैसे गिनने का काम करता था, लेकिन इस एफआईआर में ट्रस्ट के किसी भी सदस्य का नाम नहीं है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी शामिल नहीं है, हालांकि उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम जरूर है।
जांच का दायरा बढ़ेगा
अयोध्या पुलिस सूत्रों के अनुसार, फिलहाल आरोपियों की जांच वादी की शिकायत के आधार पर चल रही है। अभी तक पुलिस को एसआईटी की पूरी रिपोर्ट नहीं मिली है। जब यह रिपोर्ट मिलेगी, तो जांच में कई और नाम भी शामिल हो सकते हैं। सभी आरोपियों के बयान एक-एक कर रिकॉर्ड किए जा रहे हैं और उन्हें आपस में मिलाकर सत्यापित किया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस सभी आरोपियों के बैंक खातों की जांच भी करने की तैयारी कर रही है। इस जांच के जरिए मनी ट्रेल स्थापित की जाएगी यानी यह पता लगाया जाएगा कि, चोरी की गई रकम किस-किस के खाते में गई और कहां-कहां खर्च हुई। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, जांच का दायरा और बढ़ता जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एफआईआर दर्ज होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आरोप लगने के तुरंत बाद एसआईटी गठन की मांग की गई, जो स्वयं ट्रस्ट ने की थी, जिस दिन नाम सामने आए, उसी दिन एफआईआर हो गई। उन्होंने इस त्वरित कार्रवाई को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
संत वरुण दास ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
अयोध्या के संत वरुण दास ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि, यह मामला करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है, जो भी इस अपराध में दोषी है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भगवान राम के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण बनी रहे।

अयोध्या मन्दिर चढ़ावा चोरी को लेकर अब प्रदेश भर में राजनीतिक घमासान मच गया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत अन्य पार्टियां इसे लेकर मुखर हैं। वहीं अब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अयोध्या पहुंचे और राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यशैली, बिना एफआईआर के एसआईटी गठन और पदाधिकारियों की लापरवाही पर तीखे सवाल उठाए।
अखिलेश यादव का आरोप- साफ़ कर दिए गये सबूत
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी के जरिए पहले सारे सबूत साफ कर दिए गए और यह तय कर लिया गया कि, किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसे फंसाना है, इसके बाद केस दर्ज किया गया।
बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने भी इस पर दुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि, इतने कैमरों और निगरानी के बावजूद भगवान के घर में चोरी हो गई, यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है।
आपको बता दें कि, राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भक्त अपनी कमाई का एक हिस्सा श्रद्धाभाव से यहां चढ़ाते हैं। ऐसे पवित्र स्थान पर चोरी की घटना ने लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और असली दोषियों को सजा मिल पाती है या नहीं।
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