
तेहरान। होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। ईरान के ड्रोन हमले के बाद इस अहम समुद्री गलियारे में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) को अपना बहुप्रतीक्षित रेस्क्यू अभियान अचानक रोकना पड़ा है, जिससे फारस की खाड़ी में फंसे करीब 11,000 से अधिक नाविकों की जान संकट में पड़ गई है। यह हमला तब हुआ जब संयुक्त राष्ट्र की टीम उसी क्षेत्र में राहत अभियान चला रही थी। अब सवाल यह है कि, आखिर यह हमला क्यों हुआ, ईरान की नाराजगी की असली वजह क्या है और इन हजारों नाविकों का भविष्य क्या होगा?
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क्या है घटना
ओमान के तट के निकट सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन से हमला किया गया। इस हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की कोई सूचना नहीं आई, लेकिन इस हमले का असर बेहद व्यापक रहा। घटना के तुरंत बाद IMO ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना पूरा रेस्क्यू अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया।

गौरतलब है कि, जिस जहाज पर हमला हुआ, वह संयुक्त राष्ट्र के रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था। इसके बावजूद इस घटना ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि, होर्मुज का समुद्री रास्ता अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और किसी भी जहाज पर कभी भी हमला हो सकता है।
क्यों चलाया जा रहा था रेस्क्यू अभियान
पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते कई-कई दिनों से वहीं अटके हुए थे। 24 जून को ही इस अभियान के तहत 60 से अधिक जहाजों को सफलतापूर्वक इस जलमार्ग से पार कराया गया था।
IMO के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में करीब 20,000 से अधिक नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11,000 नाविकों को प्राथमिकता के आधार पर निकालने के लिए एक विशेष इवैक्युएशन प्लान तैयार किया गया था। अभियान रुकने के बाद ये नाविक एक बार फिर बीच समंदर में बेसहारा हो गए हैं। उन्हें नहीं पता कि, वे कब और कैसे सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर सकेंगे।
IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने साफ कहा है कि, जब तक इवैक्युएशन सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक यह अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
ईरान ने हमला क्यों किया
इस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के रास्ते को लेकर है। फिलहाल इस जलमार्ग से होकर गुजरने के दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर उपलब्ध हैं।
पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर जहाजों को ईरान की नई एजेंसी, पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) से पहले अनुमति लेनी होती है। बिना परमिट किसी भी जहाज को प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाती। ईरान का स्पष्ट कहना है कि, सिर्फ यही एकमात्र सुरक्षित और मान्य मार्ग है।
दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही वह मार्ग है जिसे संयुक्त राष्ट्र और ओमान मिलकर रेस्क्यू अभियान के लिए उपयोग कर रहे थे। ईरान का आरोप है कि, इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना उसके तय नियमों का उल्लंघन है।
हमले से पहले ईरान ने दी थी चेतावनी
ड्रोन हमले से कुछ दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि, उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तैयार किए गए इस वैकल्पिक समुद्री मार्ग का उपयोग न करे। हमले के कुछ घंटों बाद PGSA ने बयान जारी कर दोहराया कि, जो जहाज ईरान द्वारा तय आधिकारिक रास्ते की बजाय दूसरे मार्ग से जाएंगे, उनकी सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी ईरान की नहीं होगी।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ओमान की तरफ से दक्षिणी रास्ते को पूरी तरह खतरनाक और अस्वीकार्य करार दे दिया है। ईरान ने एक आधिकारिक अधिसूचना में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि, नियमों का उल्लंघन करने पर होने वाले किसी भी नुकसान, जुर्माने या दुर्घटना की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित जहाज के मालिक और कप्तान की होगी। साफ है कि, ईरान एक कड़ा संदेश देना चाहता है कि, होर्मुज से गुजरना है, तो तेहरान के नियम मानने होंगे।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा गलियारा माना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी तथा एलपीजी की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के अनेक देशों की ऊर्जा जरूरतें इस जलमार्ग पर सीधे निर्भर हैं। अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें एक बार फिर तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसकी मार हर देश की आम जनता को भुगतनी पड़ेगी।
खतरे में नाविक
फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य सदस्य देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जल्द से जल्द फिर शुरू की जा सके, लेकिन जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक हजारों नाविक अनिश्चितता और खतरे के साये में समुद्र में फंसे रहेंगे।

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच इस ड्रोन हमले ने वैश्विक शिपिंग व्यवस्था को एक बड़े संकट में डाल दिया है। अगर जल्द कोई कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो इसका असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, दुनिया भर में तेल आपूर्ति बाधित होगी, कीमतें बढ़ेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा दबाव पड़ेगा।
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