
तेहरान। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई दिनों के सीजफायर के बाद यूएस आर्मी ने एक बार फिर से मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स पर हमला कर दिया। इसके साथ ही बंदर अब्बास पोर्ट के पास सरफेस टू एयर मिसाइल साइट को भी निशाना बनाया गया।
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ट्रंप ने अपनाया सख्त रुख
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बताई और कहा अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को संभावित खतरे से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। CENTCOM प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने स्पष्ट किया कि, अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और अमेरिकी संपत्तियों को बारूदी सुरंगों से होने वाले खतरे को देखते हुए यह जरूरी था। हालांकि, अमेरिका ने सीजफायर के दौरान संयम बरतने का दावा भी किया है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ऐसी घटनाएं बातचीत में अस्थायी रुकावट पैदा कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल शांति वार्ता पूरी तरह सफल होती नहीं दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि वे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा वाली डील नहीं दोहराएंगे। ट्रम्प का कहना है, या तो अच्छा समझौता होगा या फिर कुछ भी नहीं होगा। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर भी नाराजगी जताई जो ईरान के प्रति नरम रवैया रखने की वकालत करते हैं। ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि, ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार पूरी तरह नष्ट किया जाएगा।
इन मुद्दों पर हुई दोहा में चर्चा
यह सामग्री या तो अमेरिका को सौंप दी जाएगी ताकि उसे सुरक्षित जगह पर तबाह किया जा सके या फिर ईरान के साथ मिलकर उसी स्थान पर नष्ट कर दिया जाएगा। इस पूरे प्रोसेस की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की मौजूदगी में होगी। ईरान के साथ चल रही दोहा वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और उच्च समृद्ध यूरेनियम सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। साथ ही ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिहा करने पर भी चर्चा चल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जयपुर दौरे के दौरान कहा कि, होर्मुज स्ट्रेट हर हाल में खुला रहेगा।
यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है और इसे बंद नहीं होने दिया जाएगा। रूबियो ने कतर में जारी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआती दस्तावेज के शब्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है। समझौते को अंतिम रूप देने में कुछ दिन और लग सकते हैं। व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बातचीत लगभग 95 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बाकी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, ईरान सैद्धांतिक रूप से अपना एनरिच्ड यूरेनियम भंडार छोड़ने को तैयार हो गया है, जिसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, ईरान ने अभी किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार बदलते बयानों को बातचीत में बाधा बताया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने स्पष्ट किया कि, कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा।
यूरेनियम समृद्धिकरण पर अधिकार नहीं छोड़ेगा ईरान
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान और हिजबुल्लाह के प्रति समर्थन दोहराते हुए कहा कि, ईरान इजराइल के खिलाफ लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ खड़ा है। तेहरान शहर प्रशासन ने बताया कि अमेरिकी और इजराइली हमलों में क्षतिग्रस्त ज्यादातर इमारतों की मरम्मत पूरी हो चुकी है। मामूली नुकसान वाली 97 प्रतिशत इमारतों का काम पूरा किया जा चुका है और अगले हफ्ते बाकी काम भी निपट जाएगा। कतर, जो इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने ईरान को 12 अरब डॉलर देने की खबरों को अफवाह करार दिया।

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि ऐसे दावे शांति प्रयासों को कमजोर करने के लिए फैलाए जा रहे हैं।पूर्व अमेरिकी डिप्लोमेट रॉबर्ट मैली ने कहा कि, कितना भी दबाव डाला जाए, ईरान यूरेनियम समृद्धिकरण का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा। ईरान अपनी इज्जत और राष्ट्रीय सम्मान को बहुत महत्व देता है और किसी धोखे का शिकार नहीं होना चाहता। वहीं, पूर्व अधिकारी एडम क्लेमेंट्स का मानना है कि, बंदर अब्बास हमले से वार्ता टूटने की संभावना कम है।
ईरानी गतिविधियों पर नजर रख रहा अमेरिका
अमेरिका शायद ईरानी गतिविधियों पर नजर रख रहा था। इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले तेज करने का ऐलान कर दिया है। IDF ने लेबनान में 70 से ज्यादा ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें कमांड सेंटर और हथियार गोदाम शामिल थे। इजराइल ने उत्तरी सीमा पर नई सुरक्षा पाबंदियां लगाई हैं और स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। अन्य घटनाक्रमों में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान की मूल विचारधारा से टकराने वाले किसी समझौते का समर्थन नहीं किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ISIS से जुड़े 19 लोगों (7 महिलाएं और 12 बच्चे) को सीरिया से वापस ला रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान वार्ता संवेदनशील दौर से गुजर रही है। ट्रम्प प्रशासन अच्छा सौदा चाहता है, जबकि ईरान अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा पर अडिग है।
समझौते की दिशा में प्रयासरत
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, यूरेनियम मुद्दा और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों का भविष्य प्रमुख चुनौतियां बने हुए हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, छोटी-मोटी झड़पें भले ही हों, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी समझौते की दिशा में प्रयासरत हैं। आने वाले दिनों में इन वार्ताओं का परिणाम पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता तय करेगा।
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