काशी रेलवे स्टेशन से हटाई जाएगी हजारों साल पुरानी मस्जिद, नोटिस मिलते ही मची हलचल

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक बार फिर विकास और धार्मिक स्थल के बीच टकराव की स्थिति सामने आई है। काशी रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय और आधुनिक मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए चल रहे विस्तारीकरण कार्य के तहत एक बेहद संवेदनशील और चर्चित कदम उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार चंदौली से वाराणसी आने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित करीब हजार साल पुरानी एक मस्जिद पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। इस नोटिस ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है और स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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क्या है नोटिस में?

जानकारी के मुताबिक यह नोटिस न्यायालय के आदेश पर जारी किया गया है। नोटिस में साफ और स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है कि यह मस्जिद काशी रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण और विकास कार्य में बाधा बन रही है। नोटिस में मस्जिद से जुड़े लोगों को 20 जून तक अपना सभी सामान और वस्तुएं हटा लेने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि 20 जून के बाद किसी भी समय इस मस्जिद के खिलाफ ध्वस्तीकरण यानी बुलडोजर की कार्रवाई की जा सकती है।

Kashi Railway Station

यह नोटिस मिलने के बाद से स्थानीय मुस्लिम समुदाय में चिंता और बेचैनी का माहौल है। हजार साल पुरानी यह मस्जिद स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है और इसे लेकर समुदाय के लोग भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस नोटिस ने पूरे इलाके में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

2 जून को भी हुई थी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब काशी रेलवे स्टेशन विस्तारीकरण के नाम पर इस तरह की कार्रवाई हुई हो। इससे पहले 2 जून को भी रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण कार्य के तहत अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान कुछ धार्मिक स्थलों और मजारों को न्यायालय के आदेश पर ध्वस्त किया गया था। उस समय भी यह कार्रवाई काफी चर्चा में रही थी और स्थानीय स्तर पर इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

अब इस नई मस्जिद पर नोटिस और संभावित ध्वस्तीकरण की खबर फैलते ही इलाके में हलचल और भी तेज हो गई है। लोग इस मामले को लेकर आपस में चर्चा कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है। रेलवे प्रशासन ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि, काशी रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय और आधुनिक मॉडल स्टेशन बनाने के लिए अतिक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। रेलवे अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इस पूरे अभियान में न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है और कोई भी कदम बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं उठाया जा रहा है।

मुस्लिम समुदाय चिंतित

रेलवे अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि, यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि इस दौरान किसी भी तरह का विवाद या तनाव पैदा न हो। अधिकारियों का कहना है कि, विकास कार्य सभी के हित में है और इससे वाराणसी आने वाले लाखों यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

Kashi Railway Station

मस्जिद पर नोटिस चस्पा होने की खबर फैलते ही स्थानीय स्तर पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एक तरफ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों में गहरी चिंता और बेचैनी देखी जा रही है। उनका कहना है कि, यह मस्जिद सैकड़ों वर्षों से उनकी इबादत का केंद्र रही है और इसे हटाना उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।

दूसरी तरफ विकास कार्यों के समर्थक कुछ लोग इस कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि, काशी रेलवे स्टेशन को आधुनिक और विश्व स्तरीय बनाने के लिए यह कदम जरूरी है और विकास के रास्ते में आने वाले अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए। इस तरह इस मामले ने स्थानीय स्तर पर विकास बनाम धार्मिक आस्था की बहस को एक बार फिर जीवंत कर दिया है।

 बदल जाएगी वाराणसी की तस्वीर

वाराणसी में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य हुए हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण ने वाराणसी की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है और यह देश-विदेश में चर्चा का विषय बना है। इसके अलावा गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण और विकास, सड़कों का चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तहत भी कई बड़े बदलाव हुए हैं। इन सभी परियोजनाओं के दौरान कई अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।

Kashi Railway Station

काशी रेलवे स्टेशन का यह विस्तारीकरण भी उसी व्यापक विकास योजना का एक अहम हिस्सा है। सरकार और रेलवे प्रशासन का लक्ष्य है कि वाराणसी आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक आधुनिक और सुविधाजनक रेलवे स्टेशन की सुविधा मिले। अब देखना यह होगा कि इस संवेदनशील मामले में आगे क्या होता है और प्रशासन किस तरह से इसे सुलझाता है।

 

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