जल संकट ने बढ़ाई ग्रेटर नोएडा के लोगों की दिक्कत, बूंद-बूंद के लिए तरस रहे सुपरटेक ईको विलेज 3 के निवासी

ग्रेटर नोएडा। इस समय पूरे भारत में भीषण गरमी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। गर्मी के साथ ही पानी की किल्लत ने ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लोगों की मुश्किल को कई गुना बढ़ा दिया है। जिले में एक तरफ तो तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है, वहीं पीने के पानी का संकट शहर के कई इलाकों में विकराल रूप ले चुका है। सबसे गंभीर स्थिति ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रतिष्ठित सुपरटेक ईको विलेज 3 सोसायटी की है, जहां लगभग दो हजार परिवार पिछले 14 दिनों से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।

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आधे घंटे में भरती है बाल्टी

कई टावरों में तो सोमवार दोपहर से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे यहां रहने वाले लोग आक्रोशित हो उठे हैं।  सोसायटी में कुल 11 टावर हैं, जिनमें करीब दो हजार परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, कई दिनों से किसी न किसी टावर में पानी की समस्या बनी हुई है। पानी का प्रेशर इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में आधा घंटा लग जाता है। कई फ्लैटों में बीच-बीच में पानी आना बंद हो जाता है। गर्मी में नहाना, कपड़े धोना या खाना बनाना बेहद मुश्किल हो गया है।

Supertech Eco Village 3 Society,

सोमवार दोपहर 12 बजे के बाद तीन-चार टावरों में तो पीने का पानी बिल्कुल नहीं आया। निवासियों ने व्हाट्सएप ग्रुप पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यहां रहने वाले लोगों का आरोप है कि, सोसायटी प्रबंधन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण  दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही, जिसके कारण अंडरग्राउंड टैंक खाली हो गए हैं। ऐसे में जब लोग प्राधिकरण में शिकायत करते हैं तो वहां से जवाब मिलता है कि पानी की सप्लाई पूरी हो रही है और प्रेशर भी ठीक है।

 टैंकर की भी नहीं है व्यवस्था

इस उलझन में आम निवासी परेशान हैं। सबसे दुखद बात यह है कि पीने के पानी के लिए टैंकर की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गर्मी के मौसम में यह लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। पानी की कमी के कारण कई परिवार बाहर से महंगे दामों पर पानी खरीदकर ला रहे हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रोजमर्रा के कामों के लिए घंटों पानी का इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ निवासियों ने बताया कि सुबह उठकर सबसे पहले पानी की चिंता सताती है। हमने सोचा था कि हाईराइज सोसायटी में रहेंगे तो सारी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी नहीं मिल रही है।

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र में हाईराइज सोसायटियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नई-नई इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन बुनियादी ढांचा, खासकर पानी की सप्लाई व्यवस्था पुरानी पड़ गई है। नेफोवा (नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के पदाधिकारी  ने बताया कि, इस क्षेत्र में लंबे समय से गंगाजल सप्लाई की मांग की जा रही है। अथॉरिटी सिर्फ लाइन बिछाने की बात कहकर टाल रही है। हर साल वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।

इन सेक्टर में भी गहराया जल संकट

पानी की समस्या केवल सुपरटेक ईको विलेज 3 तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा के कई अन्य सेक्टरों में भी यही हाल है। सेक्टर अल्फा 2 में रहने वाले लोगों का भी कहना है कि, गर्मी के मौसम में पानी और बिजली दोनों की समस्या ने जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह, दोपहर और शाम को पानी की सप्लाई न के बराबर रहती है। मुख्य लाइन से पानी आने के बाद भी प्रेशर इतना कम होता है कि ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंच पाता।

इसी तरह सेक्टर ओमीक्रॉन वन, सेक्टर ईंटा वन, सेक्टर जू वन और सेक्टर जीटा में भी पानी का संकट गहराता जा रहा है। कई जगहों पर निवासियों को पीने और खाना बनाने के लिए बोतलबंद पानी या बाहर से टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग के सीनियर मैनेजर का कहना है कि, पीने के पानी की सप्लाई सभी जगह की जा रही है। किसी भी जगह पर कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। जहां भी समस्या है, उसे जल्द से जल्द ठीक करा लिया जाएगा। हालांकि, निवासी इन आश्वासनों से संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि, पिछले कई दिनों से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

पर्यावरणविद बोले- ‘जल संचयन जरूरी’

विशेषज्ञों का मानना है कि, ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में आबादी और निर्माण कार्यों के अनुपात में पानी की उपलब्धता नहीं बढ़ाई गई है। गर्मी के मौसम में भूजल स्तर भी नीचे चला जाता है, जिससे बोअरवेल और अन्य स्रोत प्रभावित होते हैं। इसके अलावा पाइपलाइन की पुरानी स्थिति, लीकेज और अनुचित वितरण व्यवस्था भी समस्या को बढ़ावा दे रही है। कई सोसायटियों में अंडरग्राउंड टैंकरों की क्षमता अपर्याप्त है, जिससे थोड़ी सी कमी भी बड़े संकट में बदल जाती है।

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निवासियों की मांग है कि, प्राधिकरण तुरंत टैंकरों की व्यवस्था करे और गंगाजल की स्थायी सप्लाई सुनिश्चित करे। साथ ही सोसायटी प्रबंधन को भी जवाबदेह बनाया जाए कि वे बैकअप व्यवस्था क्यों नहीं रखते। पर्यावरणविदों का सुझाव है कि, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं। यह संकट केवल मौसमी नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध विकास की कमी का परिणाम है। ग्रेटर नोएडा को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं में इतनी बड़ी खामी चिंताजनक है।

शर्मनाक हो चुकी है स्थिति

यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, खासकर मानसून से पहले के इन दिनों में। निवासी अब प्रशासन से ठोस समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि पानी की समस्या को राजनीतिक मुद्दा न बनाकर तुरंत तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर हल किया जाए। दो हजार परिवारों का रोजमर्रा का जीवन पानी की एक बाल्टी पर निर्भर हो गया है, यह स्थिति किसी भी विकसित शहर के लिए शर्मनाक है।

 

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