
मुंबई। सोमवार का दिन शेयर बाजार के लिए ब्लैक मंडे साबित हुआ। कारोबार शुरू होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखी गई और कुछ ही घंटों में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये पानी में डूब गए। सेंसेक्स लगभग 800 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 23100 के स्तर के आसपास फिसल गया। इस भारी गिरावट के चलते महज एक दिन में निवेशकों का करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया।
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आज के कारोबार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी 50 के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में दिखे और सुरक्षित शेयरों की ओर रुख करने लगे।
हड़कंप की वजह बने ग्लोबल संकेत
बाजार में आई इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेत रहे। पिछले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में टेक सेक्टर की जबरदस्त गिरावट देखी गई थी।

नैस्डैक 4.18 प्रतिशत और S&P 500 करीब 2.64 प्रतिशत टूट गया था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर शेयरों में आई भारी बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा, “हफ्ते की शुरुआत में बाजार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। अमेरिका में टेक हेवी शेयरों की गिरावट ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे टेक-हेवी मार्केट्स में भी भारी बिकवाली हो रही है।
ईरान-इजरायल तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता
सोमवार को बाजार पर सबसे बड़ा असर भू-राजनीतिक तनाव का रहा। रविवार रात ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले और इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया। इस तनाव का सबसे सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3.29 प्रतिशत उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें देश की महंगाई को बढ़ा सकती हैं और कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं।
भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे निवेशक
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी फंड गोल्ड जैसे सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। आज भी FIIs की बिकवाली का दबाव बाजार पर साफ दिखा। इसके साथ ही भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया 38 पैसे टूटकर 95.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को और कम आकर्षक बना रहा है।
इस सेक्टर्स पर पड़ा असर
आज के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.85 प्रतिशत गिर गया। अमेरिकी टेक मार्केट की गिरावट का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा। बैंकिंग, ऑटो, फार्मा, FMCG और मेटल सेक्टर के शेयरों में भी व्यापक गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे इन इंडेक्स में 1 से 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई।
निवेशकों के लिए चुनौती भरा समय
विश्लेषकों का मानना है कि, आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिका से आए मजबूत जॉब्स डेटा के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं।

इससे ग्लोबल फंड फ्लो पर असर पड़ रहा है। वी.के. विजयकुमार ने आगे कहा, बाजार के सामने फिलहाल कई चुनौतियां हैं। भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची तेल कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और टेक सेक्टर में सुधार की कमी, ये सभी फैक्टर्स बाजार को दबाव में रखेंगे।
क्या करें निवेशक
इस तरह की गिरावट के समय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि, निवेशक घबराकर फैसले न लें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छे शेयरों को सस्ते दामों में खरीदने का मौका भी हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्क रहना जरूरी है। पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई रखना और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश जारी रखना फायदेमंद साबित हो सकता है।
आज का ब्लैक मंडे एक बार फिर याद दिलाता है कि शेयर बाजार कितना अनिश्चित और संवेदनशील होता है। ग्लोबल घटनाएं, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी फंड फ्लो भारतीय बाजार को भी प्रभावित करते हैं। वर्तमान में निवेशक आगामी दिनों में आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों, RBI की नीतियों और ईरान-इजरायल तनाव के आगे के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। बाजार की यह गिरावट सिर्फ एक दिन की घटना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बने अनिश्चित माहौल का नतीजा है।
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