
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी अब रियल एस्टेट की दुनिया के बादशाह बन गये हैं और नंबर-1 की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। वैसे तो गौतम अडानी का नाम पहले से ही भारत के टॉप इंडस्ट्रियलिस्ट्स की लिस्ट में शामिल है, क्योंकि उनके कई अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल्स हैं जो उन्हें टॉप 10 अमीरों की लिस्ट में हमेश बनाए रखते हैं, लेकिन अब वे रियल एस्टेट सेक्टर में भी पहले नबंर पर आ गये हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एक बड़े और स्थापित नाम को उसकी लंबे समय से चली आ रही गद्दी से हटा दिया है।
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धनी कारोबारियों की लिस्ट तैयार
हाल ही में सामने आई GROHE-Hurun India Real Estate 2026 की रिपोर्ट ने इस बड़े बदलाव का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट में देश के 150 सबसे धनी रियल एस्टेट कारोबारियों की एक लिस्ट तैयार की गई है, जिसमें गौतम अडानी और उनका परिवार पहली बार भारत के सबसे अमीर रियल एस्टेट कारोबारियों में सबसे ऊपर दर्ज हो गया। यह अडानी परिवार के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक और उपलब्धि है, क्योंकि इससे पहले वे इस विशेष सूची में शीर्ष स्थान पर कभी नहीं रहे थे।
एक साल में 73% का इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी परिवार की रियल एस्टेट से जुड़ी कुल संपत्ति अब बढ़कर करीब 90,400 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें भी खास बात ये है कि, सिर्फ एक साल के भीतर उनकी इस संपत्ति में 73 प्रतिशत का भारी इजाफा दर्ज किया गया, जो कि किसी भी सेक्टर के लिए एक बड़ी छलांग मानी जाती है।

इस जबरदस्त ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह यह रही कि, अडानी ग्रुप ने रिहायशी परियोजनाओं, कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स, टाउनशिप विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में बहुत तेजी से अपना विस्तार किया है। समूह की इस आक्रामक विस्तार नीति का सीधा असर उनकी कुल संपत्ति में दिखाई दिया है।
राजीव सिंह की गद्दी छिनी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चर्चा वाला पहलू यह है कि, अडानी परिवार से पहले इस प्रतिष्ठित सूची में लंबे समय से DLF के मालिक राजीव सिंह और उनका परिवार शीर्ष स्थान पर काबिज था। रियल एस्टेट जगत में राजीव सिंह को अक्सर राजा के तौर पर संबोधित किया जाता रहा है, क्योंकि DLF वर्षों से भारत की सबसे बड़ी और भरोसेमंद रियल एस्टेट कंपनियों में गिनी जाती रही है, लेकिन अब अडानी परिवार ने उन्हें इस शीर्ष स्थान से हटाकर खुद वह कुर्सी हासिल कर ली है।
रिपोर्ट के अनुसार, राजीव सिंह और उनके परिवार की कुल संपत्ति घटकर लगभग 90,200 करोड़ रुपये रह गई है। बाजार में आई गिरावट के चलते उनकी संपत्ति में करीब 29 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप वे इस लिस्ट में पहले स्थान से फिसलकर अब दूसरे नंबर पर आ गए हैं। यह गिरावट दर्शाती है कि रियल एस्टेट बाजार में उतार-चढ़ाव का असर बड़े से बड़े कारोबारी समूहों पर भी पड़ सकता है।
टॉप 10 की पूरी लिस्ट
इस रिपोर्ट में भारत के टॉप 10 सबसे धनी रियल एस्टेट कारोबारियों के नाम भी सामने आए हैं।
गौतम अडानी एंड फैमिली, राजीव सिंह एंड फैमिली, मंगल प्रभात लोढ़ा एंड फैमिली, विकास ओबेरॉय एंड फैमिली, चंद्रू रहेजा एंड फैमिली, अतुल रुइया एंड फैमिली, राजा बागमाने एंड फैमिली, निरंजन हीरानंदानी एंड फैमिली, बसंत बंसल एंड फैमिली, विजय कुमार अग्रवाल एंड फैमिली,
इस सूची में शामिल ज्यादातर नाम पहले से ही भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के जाने-माने चेहरे रहे हैं, लेकिन अडानी परिवार का शीर्ष स्थान पर आना इस बात का संकेत है कि, सेक्टर में सत्ता का समीकरण अब तेजी से बदल रहा है।
कॉरपोरेट समूह दे रहे चुनौती
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण पहलू की तरफ इशारा किया गया है। इसके अनुसार, अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में सिर्फ पारंपरिक बिल्डर या डेवलपर कंपनियां ही दबदबा नहीं रखतीं, बल्कि बड़े और विविध कारोबार वाले कॉरपोरेट समूह भी इस क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। अडानी ग्रुप की रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती हिस्सेदारी इसी बड़े बदलाव की दिशा में एक अहम संकेत मानी जा रही है।

हालांकि, इस पूरे बदलाव के बीच एक बात अब भी पहले जैसी बनी हुई है, मार्केट वैल्यू के लिहाज से DLF आज भी भारत की सबसे बड़ी लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है। यानी व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में भले ही राजीव सिंह परिवार दूसरे स्थान पर खिसक गया हो, लेकिन कंपनी के तौर पर DLF की बाजार में पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
बदल रही रियल स्टेट सेक्टर की तस्वीर
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में हो रहे बड़े ढांचागत बदलाव की एक झलक पेश करता है, जहां एक तरफ पारंपरिक रियल एस्टेट कंपनियां दशकों से अपनी पकड़ बनाए हुए थीं। वहीं अब बड़े औद्योगिक समूह भी इस क्षेत्र को अपने विस्तार और निवेश की एक अहम दिशा मान रहे हैं। अडानी ग्रुप का रिहायशी, कॉमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में लगातार बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में इस सेक्टर की तस्वीर को और बदल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि, यह बदलाव सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार में बड़े कॉर्पोरेट समूहों की बढ़ती दिलचस्पी और निवेश क्षमता का प्रतीक है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजीव सिंह और DLF अपनी पुरानी स्थिति दोबारा हासिल कर पाते हैं, फिर अडानी परिवार अपनी इस नई हासिल की गई बादशाहत को आगे भी बरकरार रखता है।
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