
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भीषण तेजी ने भारतीय वित्तीय बाजार की कमर तोड़ दी है। ईरान संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया, जिसका सीधा और बेहद नकारात्मक असर आज घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिला। बिकवाली के भारी दबाव के चलते शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स ताश के पत्तों की तरह बिखर गया और इसमें 1,000 अंकों से अधिक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई।
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दबाव में भारतीय मुद्रा बाजार
वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा का गोता लगा गया। बाजार में मची इस हाहाकार के बीच भारतीय मुद्रा भी गंभीर दबाव में आ गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अपने ऑल-टाइम लो पर धराशायी हो गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस माहौल ने निवेशकों के भीतर डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे दलाल स्ट्रीट पर चारों तरफ लाल निशान हावी हो गया है।

बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि, निवेशकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सुबह के शुरुआती सत्र में ही सेंसेक्स 1,010.64 अंक यानी लगभग 1.34 प्रतिशत की भारी-भरकम गिरावट के साथ 74,227.35 अंक के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया। बाजार के इस पतन में निफ्टी ने भी पूरा साथ दिया और वह भी 303.25 अंक यानी 1.28 प्रतिशत टूटकर 23,340.25 अंक के बेहद संवेदनशील स्तर पर आ गया।
इस भीषण गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, महज कुछ ही मिनटों के कारोबार में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 454 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार के खुलते ही देश के निवेशकों की पूंजी से 7 लाख करोड़ रुपये पूरी तरह साफ हो गए, जिसने इस साल की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक को दर्ज किया है।
पावर ग्रिड के शेयर्स को झटका
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक आर्थिक समीकरणों को बिगाड़ने का डर पैदा कर दिया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है। यही कारण है कि आज संस्थागत विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों ने भी जोखिम लेने के बजाय बाजार से पैसा निकालना ही समझदारी समझा, जिसके चलते बाजार में गिरावट की रफ्तार बेहद तेज हो गई।
आज के इस निराशाजनक कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के प्रमुख 30 शेयरों में से 27 शेयर भारी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। बिकवाली के इस दौर में सबसे बड़ा झटका पावरग्रिड के शेयरों को लगा, जो शुरुआती सत्र में ही 3.81 प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा दिग्गज कंपनियों जैसे टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी उल्लेखनीय और भारी गिरावट देखी गई, जिससे बाजार को संभलने का कोई मौका नहीं मिला।
हालांकि, इस चौतरफा तबाही के बीच सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। अमेरिकी बाजार से जुड़े होने और डॉलर की मजबूती के कारण इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में तेजी का रुख देखा गया, जो इस गिरते बाजार में निवेशकों के लिए राहत की एकमात्र उम्मीद बनकर उभरे।
मिडिल ईस्ट में गहराई युद्ध की आशंका
इस वैश्विक और घरेलू बाजार में आई भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है जिसने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि, ईरान के लिए समय बहुत तेजी से बीत रहा है और अगर उसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की शर्तों के अनुरूप जल्दी ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो फिर उसके लिए कुछ नहीं बचेगा।

ट्रंप के इस बेहद आक्रामक बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर सताने लगा है, जिसके कारण तेल की कीमतों में अचानक भीषण आग लग गई है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड इस समय 1.84 प्रतिशत की तेज उछाल के साथ 11.3 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इसके समानांतर भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत में भी 0.24 प्रतिशत की तेजी आई है और यह अब 109.3 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है।
और नीचे गिरा रुपया
कच्चे तेल में आ रही यह लगातार तेजी भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे देश के भीतर ईंधन की कीमतें बढ़ने और महंगाई पर से नियंत्रण खोने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। ईरान युद्ध की इस विभीषिका और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय रुपये की हालत भी बेहद खस्ता हो गई है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और विदेशी फंडों की लगातार निकासी के कारण आज रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक बार फिर अपने ऑल-टाइम लो के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नीचे गिर गया। शुरुआती कारोबार के दौरान ही भारतीय रुपया 0.2 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 96.18 के स्तर तक लुढ़क गया, जिसने देश के आर्थिक विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है। इससे पहले रुपये का सबसे निचला स्तर 96.1350 दर्ज किया गया था, जो आज पार हो गया।
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