
लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। इस मौके पर उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि पर्यावरण बचेगा तो प्रकृति बचेगी, प्रकृति बचेगी तो समस्त जीव सृष्टि भी बचेगी।
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दायित्वों का निर्वहन करने की अपील
मुख्यमंत्री ने हर नागरिक से मातृभूमि के प्रति ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को पूरी गंभीरता से निभा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जब सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब अनेक चुनौतियां थीं। न पर्याप्त नर्सरी थीं और न ही बड़े स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम चलाने का पर्याप्त अनुभव। इसके बावजूद वन विभाग और संबंधित विभागों ने सामूहिक प्रयास से लक्ष्य हासिल किया।
9 वर्षों में लगे 242 करोड़ से अधिक पौधे
मुख्यमंत्री ने कहा कि, विगत 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रदेश का वन क्षेत्रफल भी लगातार बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तीन वर्ष पहले शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि इस अभियान के तहत आज से पूरे प्रदेश में पौधरोपण महाभियान प्रारंभ हो रहा है। योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम के प्रसिद्ध उद्घोष ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मां और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता हर नागरिक का सर्वोच्च दायित्व है। पर्यावरण की रक्षा इसी कृतज्ञता का एक महत्वपूर्ण अंग है।
पर्यावरण संरक्षण में सरकार की उपलब्धियां
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे एक व्यापक आंदोलन का रूप दिया है। ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और मौसम चक्र में हो रहे बदलावों से निपटने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि गांव हो या शहर, पूरा प्रदेश प्लास्टिक मुक्त बने। सिंगल यूज प्लास्टिक को हतोत्साहित करने के साथ ही मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए माटी कला बोर्ड की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया है।
अप्रैल से जून के महीनों में हर गांव और शहर के तालाबों से प्रजापति और कुम्हार समाज के लोगों को निशुल्क मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्हें मैन्युअल चाक के साथ-साथ सोलर और इलेक्ट्रिक चाक भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे गुणवत्तापूर्ण मिट्टी के बर्तन बना सकें। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए बताया कि, विकास प्राधिकरणों ने बड़े आवासीय और व्यावसायिक भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बना दिया है। इससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिल रही है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की अपील
सीएम ने सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, स्कूल-कॉलेजों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की कि वे न सिर्फ पौधे लगाएं बल्कि उनका संरक्षण भी करें। उन्होंने कहा, पौधा लगाना जितना आसान है, उसे बचाना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। हर व्यक्ति को अपने लगाए पौधे की देखभाल करनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, उत्तर प्रदेश अब पर्यावरण संरक्षण का एक मॉडल राज्य बनकर उभर रहा है। 2017 से पहले जहां पौधरोपण के नाम पर केवल आंकड़े भर भरे जाते थे, वहीं अब वास्तविकता में पौधे लगाए जा रहे हैं और उनका सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। सरकार वन महोत्सव को हर वर्ष और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के कई मंत्री और उच्च अधिकारी मौजूद रहे। इनमें डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, के.पी. मलिक, बलदेव सिंह औलख, दानिश आजाद अंसारी, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव (वन) वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी आदि शामिल थे।
पर्यावरण दिवस का महत्व
विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण रोकथाम और सूखा सहनशीलता पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पौधरोपण कार्यक्रम ने इस थीम को व्यवहारिक रूप देते हुए पूरे प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया है।
उत्तर प्रदेश की भौगोलिक विविधता, घनी आबादी और कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियां भी बड़ी हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल न सिर्फ वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अंत में एक बार फिर सभी से आह्वान किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें। हर घर, हर मोहल्ला, हर गांव और हर संस्था इस अभियान से जुड़े।
उन्होंने कहा कि अगर हर नागरिक साल में कम से कम एक पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे तो उत्तर प्रदेश का स्वरूप ही बदल जाएगा। लखनऊ के सरकारी आवास पर हुए इस कार्यक्रम ने पूरे प्रदेश में पर्यावरण जागरूकता की नई लहर पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान कितना प्रभावी साबित होता है और कितने पौधे वास्तव में हरे-भरे वृक्षों में बदलते हैं।
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