बदली जाएगी त्रिपुरा में 119 किमी की पुरानी बाड़, स्मार्ट बॉर्डर प्लान से सुरक्षित होंगी देश की सीमाएं

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश की सीमाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए स्मार्ट बॉर्डर पायलट परियोजना की शुरुआत का ऐलान किया। यह परियोजना प्रौद्योगिकी, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के एकीकरण पर आधारित होगी। योजना के मुताबिक, इसे देश की विभिन्न सीमाओं पर सात से आठ स्थानों पर एक साथ शुरू किया जाएगा।

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सीमा पार से नहीं होने देंगे घुसपैठ

यह कदम भारत की सीमाओं के जरिए होने वाले अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन को रोकने के केंद्र सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। अमित शाह ने त्रिपुरा की लंकामुरा सीमा चौकी पर बीएसएफ के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, हम किसी भी हालत में सीमा पार से घुसपैठ नहीं होने देंगे।

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त्रिपुरा हो, बंगाल हो या बिहार, हम सीमा पार घुसपैठ के जरिए जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं होने देंगे। यह हमारा दृढ़ विश्वास और संकल्प है। उनका यह बयान सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।

 अभेद होंगी सीमाएं

शाह ने बताया कि स्मार्ट सीमाओं की यह अवधारणा बाड़बंदी के पूरक के रूप में काम करेगी और भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने वाली चतुर्भुज सुरक्षा रणनीति का अहम अंग है। इस रणनीति में आधुनिक तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और समन्वित प्रशासनिक प्रयास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना योजना के अंतिम चरण में है। शुरुआती चुनौतियों का समाधान करने के बाद इसे पूरे सीमा नेटवर्क में विस्तारित किया जाएगा।

स्मार्ट बॉर्डर परियोजना में ड्रोन, सेंसर, कैमरा, एआई आधारित निगरानी प्रणाली, रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण और स्थानीय खुफिया जानकारी को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे न केवल घुसपैठ रोकी जा सकेगी, बल्कि तस्करी के विभिन्न रूपों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा। यह पहल पारंपरिक बाड़बंदी और सैन्य तैनाती को आधुनिक तकनीक के साथ मजबूत बनाकर सीमा प्रबंधन को नई दिशा देगी।

त्रिपुरा में बदली जाएगी पुरानी बाड़ 

त्रिपुरा, जो उत्तर, दक्षिण और पश्चिम तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है, में सीमा सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अमित शाह ने घोषणा की कि राज्य में लगभग 650 किलोमीटर लंबी बाड़ में से 119 किलोमीटर पुरानी बाड़ को बदला जाएगा। यह बाड़ 15 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है और समय के साथ उसकी प्रभावशीलता कम हो गई है।

नई बाड़ अधिक मजबूत, ऊंची और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से युक्त होगी, जिससे घुसपैठियों के लिए सीमा पार करना लगभग असंभव हो जाएगा। यह परियोजना त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। राज्य की लंबी और जटिल सीमा के कारण यहां सुरक्षा चुनौतियां ज्यादा हैं।  नई बाड़बंदी के साथ-साथ स्मार्ट निगरानी प्रणाली भी लगाई जाएगी, ताकि कोई भी गतिविधि तुरंत पकड़ी जा सके।

कई गंभीर खतरों से होगा बचाव

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि, बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमाओं पर आंतरिक सुरक्षा के लिए देश कई गंभीर खतरों का सामना कर रहा है। इनमें मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और ड्रोन के जरिए नकली मुद्रा गिराना शामिल है। उन्होंने कहा कि ये गतिविधियां न केवल सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा को चुनौती देती हैं, बल्कि पूरे देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना को प्रभावित करती हैं। शाह ने सुरक्षित देश की अपनी परिभाषा देते हुए कहा, जब मैं सुरक्षित कहता हूं, तो मेरा मतलब किसी बड़े युद्ध से नहीं है।

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मेरा मतलब है कि क्या हम देश को तस्करी से सुरक्षित बना सकते हैं? क्या हम इसे मानव तस्करी से सुरक्षित बना सकते हैं? क्या हम देश के युवाओं को नशे से सुरक्षित बना सकते हैं? और क्या हम देश की अर्थव्यवस्था को नकली मुद्रा के प्रसार से बचा सकते हैं?” उनके इन सवालों में वास्तविकता छिपी है। सीमा पार से आने वाली ये समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। नशीले पदार्थ युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं, मानव तस्करी महिलाओं और बच्चों के शोषण का कारण बन रही है, जबकि नकली मुद्रा अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है। स्मार्ट बॉर्डर परियोजना इन्हीं खतरों से निपटने के लिए डिजाइन की गई है।

 कई सीमाओं की यात्रा कर चुके हैं शाह

त्रिपुरा की यह यात्रा अमित शाह की सीमा क्षेत्रों के दौरों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले वे राजस्थान और गुजरात की पश्चिमी सीमाओं का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। अब 15 जून को वे पश्चिम बंगाल की सीमा पर जाएंगे। इन दौरों का मकसद सीमा सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाना, स्थानीय स्थिति का जायजा लेना और सुरक्षा योजनाओं को तेजी से लागू करना है। त्रिपुरा में शाह के साथ सूचना एवं सुरक्षा बल के निदेशक तपन डेका भी मौजूद थे।

इस दौरान एक ऑनलाइन कार्यक्रम में गृह मंत्री ने बीएसएफ की 37वीं बटालियन में नए आवासीय भवनों और 97वीं बटालियन में क्वार्टर गार्ड कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं से जवानों की रहन-सहन की स्थिति बेहतर होगी, जिसका सीधा असर उनकी परिचालन दक्षता पर पड़ेगा।

यह घोषणा केवल एक परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। भारत की कुल सीमा लंबाई हजारों किलोमीटर है, जिसमें विविध भौगोलिक चुनौतियां हैं जैसे पहाड़, नदियां, घने जंगल और समतल क्षेत्र। पारंपरिक तरीकों से इन सबका प्रबंधन करना मुश्किल होता जा रहा था, इसलिए तकनीकी एकीकरण जरूरी हो गया है। स्मार्ट बॉर्डर परियोजना सफल होने पर न केवल घुसपैठ पर अंकुश लगेगा, बल्कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और विकास भी सुनिश्चित होगा।

घुसपैठ या तस्करी बर्दाश्त नहीं

सरकार का फोकस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर है, यानी किसी भी प्रकार की घुसपैठ या तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पहल से सुरक्षा बलों को रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही, स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय से खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान आसान होगा।

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लंबे समय में यह परियोजना पूरे देश की सीमाओं को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी। अमित शाह का यह ऐलान केंद्र सरकार की सुरक्षा और विकास की दोहरी नीति को मजबूती देता है। जब सीमाएं सुरक्षित होंगी, तब ही आंतरिक विकास के प्रयास फलेंगे-फूलेंगे।

जनसांख्यिकीय संतुलन बनाये रखना जरूरी

जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना भी लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के लिए आवश्यक है। घुसपैठ के जरिए सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अमित शाह द्वारा घोषित स्मार्ट बॉर्डर पायलट परियोजना देश की सीमा सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ेगी। पुरानी बाड़ का आधुनिकीकरण, नई तकनीकों का इस्तेमाल और सुरक्षा बलों का सशक्तिकरण मिलकर एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करेंगे।

त्रिपुरा से शुरू होकर पूरे देश में फैलने वाली यह पहल न केवल घुसपैठ और तस्करी पर लगाम लगाएगी, बल्कि एक सुरक्षित, समृद्ध और एकजुट भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का संदेश साफ है, सीमाएं सिर्फ भौगोलिक रेखाएं नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करने वाली रेखाएं हैं। इनकी रक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

 

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