
बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जारी दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपनी कप्तानी की समझदारी से सबका ध्यान खींच लिया। ईस्ट जोन की कमान संभाल रहे इस युवा बल्लेबाज ने सेंट्रल जोन के खिलाफ एक अहम पल पर बेहद सटीक फैसला लेते हुए डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) का इस्तेमाल किया और यह फैसला पूरी तरह सही साबित हुआ। मैदान पर अंपायर ने जिस अपील को खारिज कर दिया था, तीसरे अंपायर की जांच के बाद वही फैसला पलट गया और बल्लेबाज को आउट करार दिया गया।
इसे भी पढ़ें- IND vs IRE टी20 सीरीज का समय बदला, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर टिकी निगाहें
ईशान के चोटिल होने से मिली कप्तानी
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ जब ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन मैच के पहले सत्र में ही चोटिल हो गए। उनकी दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगने के कारण उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा। इसके बाद टीम की कमान उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी के हाथों में आ गई। इतनी कम उम्र में सीनियर स्तर के एक बड़े मुकाबले में अचानक कप्तानी की जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होता, लेकिन सूर्यवंशी ने बिना किसी हिचकिचाहट के ये जिम्मा संभाला और आगे चलकर यह साबित भी कर दिया कि दबाव में भी उनका दिमाग बेहद शांत और सतर्क रहता है।

क्रिकेट जगत में यह बात अक्सर कही जाती है कि, कप्तानी सिर्फ फील्ड सेटिंग और गेंदबाजी बदलने तक सीमित नहीं होती, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने की क्षमता ही असली कप्तान की पहचान होती है। सूर्यवंशी ने अपने पहले ही बड़े मौके पर इस कसौटी पर खुद को खरा साबित किया।
40वें ओवर का वह निर्णायक पल
मैच के दौरान सबसे चर्चा का विषय बना 40वां ओवर, जब ईस्ट जोन के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार की एक गेंद पर सेंट्रल जोन के सेट बल्लेबाज आर्यन जुयाल के खिलाफ कैच आउट की जोरदार अपील की गई। मैदान पर मौजूद अंपायर ने इस अपील को खारिज करते हुए बल्लेबाज को नॉट आउट करार दे दिया, लेकिन अंपयार के इस फैसले से नाखुश गेंदबाज मुकेश कुमार ने तुरंत अपने कप्तान सूर्यवंशी के पास जाकर डीआरएस लेने की सलाह दी।
दिलचस्प बात यह रही कि, खुद वैभव सूर्यवंशी उस वक्त गेंद के बल्ले से टकराने की किसी स्पष्ट आवाज को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सूझबूझ और अनुभव पर भरोसा जताते हुए आखिरी क्षणों में डीआरएस लेने का फैसला किया। यह फैसला जितना जोखिम भरा था, उतना ही साहसिक भी, क्योंकि टीम के पास सीमित रिव्यू ही उपलब्ध होते हैं और गलत फैसला टीम को आगे नुकसान पहुंचा सकता था।
थर्ड अंपायर के फैसले ने बदला रुख
जैसे ही रिव्यू का मामला थर्ड अंपायर के पास पहुंचा, तकनीक की मदद से बारीकी से जांच शुरू हुई। अल्ट्राएज तकनीक पर नजर डालने पर जैसे ही गेंद बल्ले के करीब से गुजरी, स्क्रीन पर स्पष्ट हलचल दर्ज हुई, जिससे यह साफ हो गया कि, गेंद बल्ले के किनारे को छूकर विकेटकीपर के हाथों में गई थी। इस पुष्टि के साथ ही मैदानी अंपायर का पुराना फैसला पलट दिया गया और आर्यन जुयाल को आउट करार दिया गया।
फैसला अपने पक्ष में आते ही वैभव सूर्यवंशी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने तुरंत अपने साथी खिलाड़ियों के साथ मिलकर इस सफलता का जश्न मनाया। मैदान पर मौजूद दर्शकों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी इतनी कम उम्र में लिए गए इस परिपक्व फैसले की जमकर सराहना की। यह पल न सिर्फ मैच के लिहाज से बल्कि सूर्यवंशी के कप्तानी करियर की शुरुआत के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
सेंट्रल जोन की शुरुआत रही मजबूत
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लेने वाली सेंट्रल जोन की टीम ने मैच के पहले दिन अच्छी शुरुआत की। दिन का खेल खत्म होने तक टीम ने 6 विकेट के नुकसान पर 200 से अधिक रन बना लिए थे, जो इस स्तर के मुकाबले में एक ठोस स्कोर माना जा रहा है।

टीम के लिए सबसे अहम योगदान रिंकू सिंह की ओर से आया, जिन्होंने जिम्मेदारी भरी अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम को संकट से उबारा। उनके साथ श्रीलंका दौरे में हाल ही में टेस्ट डेब्यू करने वाले युवा बल्लेबाज सारांश जैन ने भी उपयोगी साझेदारी निभाते हुए टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
युवा प्रतिभा की एक और मिसाल
वैभव सूर्यवंशी बीते कुछ समय से अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और तेज-तर्रार खेल शैली के चलते सुर्खियों में बने हुए हैं, लेकिन बेंगलुरु में हुए इस मुकाबले ने यह भी साबित कर दिया कि, उनके पास सिर्फ बल्लेबाजी का कौशल ही नहीं, बल्कि मैदान पर सही समय पर सही निर्णय लेने की परिपक्व सोच भी मौजूद है। इतनी कम उम्र में अचानक मिली कप्तानी की जिम्मेदारी को उन्होंने जिस आत्मविश्वास और सूझबूझ के साथ निभाया, वह घरेलू क्रिकेट में उनके उज्ज्वल भविष्य का एक और संकेत माना जा रहा है।
क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सूर्यवंशी अपने इस प्रदर्शन को आगे भी कैसे जारी रखते हैं। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में इतनी कम उम्र में कप्तानी संभालना और फिर एक अहम फैसले को सही साबित करना निश्चित रूप से उनके करियर के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
इसे भी पढ़ें- पावरप्ले में मैच का रुख तय करने की रणनीति रही सफल: वैभव सूर्यवंशी



