114 और राफेल आने का रास्ता साफ! राजनाथ सिंह की DAC ने दी मंजूरी, बढ़ेगी IAF की ताकत

नई दिल्ली। अब  वह दिन दूर नहीं जब भारत की रक्षा क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 12 फरवरी 2026 को हुई DAC की बैठक में लिया गया, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) की लड़ाकू ताकत में भारी इजाफा होगा। इस रक्षा खरीद की अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये है, जो इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बना रहा है।

इसे भी पढ़ें-भारत की सबसे बड़ी रक्षा डील से दहशत में चीन-पाकिस्तान, दुनिया का सबसे बड़ा राफेल ऑपरेटर बनेगा देश

CCS लगाएगी अंतिम मुहर

राफेल

यह प्रस्ताव मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम के तहत फाइनल हुआ है, जिसमें फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से राफेल F4 वैरिएंट के जेट्स खरीदे जाएंगे। DAC की मंजूरी के बाद अब प्रस्ताव कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कमेटी इस पर अंतिम मुहर लगाएगी।  CCS की मंजूरी मिलते ही दसॉल्ट के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा।

DAC क्या है

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) भारत सरकार की सबसे उच्च स्तरीय रक्षा खरीद समिति है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसकी अध्यक्षता करते हैं। इसमें रक्षा सचिव, तीनों सेनाओं के प्रमुख, वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।DAC का मुख्य काम कैपिटल खरीद प्रस्तावों को शुरुआती मंजूरी (Acceptance of Necessity – AoN) देना है। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर फोकस करता है।

इन प्रस्तावों पर हुई चर्चा

DAC की मंजूरी के बाद प्रस्ताव CCS को जाता है, जो अंतिम फैसला लेती है। इस बैठक में राफेल के अलावा 6 P-8I मैरिटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट (अमेरिका से नौसेना के लिए), स्कैल्प क्रूज मिसाइलें, सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम के लिए मिसाइलें, स्वदेशी ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस और हाई-ऑल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट्स (HAPS) जैसे अन्य प्रस्ताव भी चर्चा में थे।

राफेल डील की डिटेल्स 

भारत के इस रक्षा सौदे में 114 राफेल जेट्स (ज्यादातर सिंगल-सीटर, कुछ ट्विन-सीटर ट्रेनिंग के लिए)। खरीद को मंजूरी दी है।

लागत: लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये (करीब 36-38 बिलियन डॉलर), जिसमें विमान, हथियार, स्पेयर पार्ट्स, सिमुलेटर, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और इंडस्ट्रियल सेटअप शामिल।

डिलीवरी प्लान: पहले 18 जेट्स फ्लाई-अवे कंडीशन में फ्रांस से आएंगे। बाकी 96 भारत में ‘मेक इन इंडिया’ फ्रेमवर्क के तहत दसॉल्ट और भारतीय प्राइवेट सेक्टर पार्टनर (संभावित रूप से रिलायंस, टाटा या अन्य) के साथ मिलकर बनेंगे। लोकलाइजेशन कंटेंट 50-60% तक लक्ष्य।

समयसीमा:  कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद राफेल की डिलीवरी में 5-7 साल का समय लग सकता है। पहले बैच का राफेल 3-4 साल में आ सकता है।

यह डील फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा (15-17 फरवरी 2026 को AI समिट के लिए) से ठीक पहले आई है, जहां रक्षा सहयोग पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।

इसे भी पढ़ें- Republic Day: कर्तव्य पथ पर गूंजा वंदे मातरम, राफेल, मिग-29, सुखोई-30 और जगुआर का दमदार प्रदर्शन

भारतीय वायुसेना को क्यों इतनी जरूरत?

मौजूदा समय में  भारतीय वायुसेना (IAF) के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। मिग-21, जगुआर और मिराज-2000 जैसे पुराने विमानों की रिटायरमेंट इस कमी आई है। वहीं, तेजस MK-1/MK-2 और AMCA जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट्स में देरी होने से भी दिक्कत आ रही है।

  • राफेल एक 4.5 जनरेशन मल्टी-रोल फाइटर
  • हवा से हवा, हवा से जमीन हमले।
  • मेटियोर (150+ किमी रेंज) बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल।
  • स्कैल्प क्रूज मिसाइल (300+ किमी)।
  • परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता।
  • सुपीरियर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, AESA रडार और सेंसर फ्यूजन।

2016 के 36 राफेल सौदे (59,000 करोड़) में ये जेट्स बालाकोट स्ट्राइक और लद्दाख स्टैंडऑफ में साबित हुए। नए 114 जेट्स से कुल राफेल फ्लीट 176 (36 मौजूदा + 26 नेवी के राफेल-एम + 114 नए) हो जाएगी, जो भारत को दुनिया का सबसे बड़ा राफेल ऑपरेटर बना देगी। ये डील भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्म निर्भर’ भारत का मजबूती देगी। साथ ही भारत में उत्पादन होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके साथ ही टेक्नोलाजी जैसी कि सोर्स कोड, मेंटेनेंस, अपग्रेड आदि ट्रांसफर होंगे। इससे भारत भविष्य में एक्सपोर्ट हब भी बन सकता है।
हालांकि, कुछ विशषज्ञों का मानना है कि इतनी राशि में स्वदेशी तेजस MK-2 ,या AMCA को मजबूत करना बेहतर होता, लेकिन IAF को तत्काल मजबूत प्लेटफॉर्म चाहिए। चीन (J-20) और पाकिस्तान (JF-17 ब्लॉक III) के बढ़ते खतरे के बीच यह जरूरी हो गया था।

क्या होना है अभी
  • CCS से अंतिम मंजूरी।
  • दसॉल्ट के साथ G2G नेगोशिएशंस।
  • कॉन्ट्रैक्ट साइन (संभवतः मैक्रों विजिट के दौरान या बाद)।
  • उत्पादन शुरू, डिलीवरी 2028-2030 से।

 

इसे भी पढ़ें- भारत ने रक्षा क्षेत्र में किया बड़ा सौदा, फ्रांस से आएंगे और 26 राफेल, पीएम मोदी ने विमानों की खरीद को दी मंजूरी

Related Articles

Back to top button