
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को जारी 10-पेज के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया है कि अब विशेष सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ का पूरे छह छंदों वाला आधिकारिक संस्करण अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाएगा। इसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। साथ ही, गीत बजने या गाए जाने के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समय होता है।
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1950 में घोषित हुआ था राष्ट्रगीत

यह फैसला ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150वें वर्ष के अवसर पर आया है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रतीक रहा है। स्वतंत्र भारत में 1950 में इसे राष्ट्रगीत घोषित किया गया था, लेकिन अब तक केवल पहले दो छंद ही आधिकारिक रूप से गाए जाते थे। नए दिशानिर्देशों में पूरे छह छंदों को शामिल कर सरकार ने गीत को उसकी मूल पूर्णता में वापस लाने का प्रयास किया है।
नए दिशा निर्देश की मुख्य बातें
गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार आधिकारिक संस्करण ‘वंदे मातरम्’ के छह छंदों वाला पूरा संस्करण (3 मिनट 10 सेकंड) अनिवार्य।
खड़े होना अनिवार्य: गीत बजने या गाए जाने पर सभी को अटेंशन में खड़े रहना होगा। यह नियम स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और राज्य स्तरीय आयोजनों पर लागू होगा।
राष्ट्रगान से पहले: यदि ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों एक साथ बजाए या गाए जाते हैं, तो पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगान।
सिनेमा हॉल में छूट: फिल्मों, न्यूज रील्स या डॉक्यूमेंट्री में ‘वंदे मातरम्’ आने पर दर्शकों को खड़े होने की अनिवार्यता नहीं होगी, क्योंकि इससे अफरा-तफरी या अव्यवस्था फैल सकती है।
कहां-कहां अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’? गृह मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से उन अवसरों की सूची दी है, जहां यह गीत अनिवार्य होगा।
- तिरंगा फहराने के दौरान।
- राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन, उनके भाषण या राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में।
- राज्यपालों या उप-राज्यपालों के आगमन, उनके भाषणों से पहले और बाद में।
- स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक गायन से होनी चाहिए।
- नागरिक सम्मान समारोह जैसे पद्म पुरस्कार वितरण।
- अन्य सरकारी और सांस्कृतिक आयोजन जहां झंडोतोलन या औपचारिक कार्यक्रम होते हैं।
- आदेश में तीन श्रेणियां बनाई गई हैं, जहां गीत अनिवार्य रूप से बजाया जाएगा।
- जहां सामूहिक गायन के साथ बजाया जाएगा (जैसे स्कूल असेंबली)।
- जहां गायन वैकल्पिक हो सकता है, लेकिन सम्मान जरूरी।
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‘आनंदमठ’ से लिया गया था ‘वंदे मातरम’
वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना है, जो 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुई। स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत जन-जन तक पहुंचा और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रेरणा का स्रोत बना। उस वक्त ये गीत हर किस की जुबान पर रहता था। साल 1950 में संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगीत घोषित किया, लेकिन धार्मिक संदर्भों में दुर्गा आदि का जिक्र होने की वजह से केवल पहले दो छंदों को आधिकारिक माना गया, बाकी को निकाल दिया गया। नए दिशा-निर्देश स्वतंत्रता संग्राम की भावना को मजबूत करने और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

बता दें कि, हाल ही में दिल्ली के लाल किये पर हुई गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित झांकियां शामिल की गईं थीं। संसद में भी इस पर जबर्दस्त चर्च हुई थी।
मजबूत होगी देशभक्ति की भावना
सरकार का दावा है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को मजबूत करेगा। सत्ता पक्ष के समर्थक, रक्षा विशेषज्ञ और राष्ट्रवादी संगठनों ने इसे स्वागतयोग्य फैसला करार दिया, लेकिन विपक्षी नेता इसे धार्मिक प्रतीकों से जोड़कर रहे हैं और विवादास्पद फैसला बता रहे हैं। कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि पहले के दो छंद ही पर्याप्त थे, पूरे छह छंदों को अनिवार्य करने से कुछ वर्ग असहज हो सकते हैं।
उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
वहीं, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये दिशा-निर्देश राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम के तहत सम्मान सुनिश्चित करने के लिए हैं। उल्लंघन पर कार्रवाई संभव है, लेकिन सिनेमा हॉल जैसी जगहों पर छूट दी गई है, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे। यह फैसला देशभक्ति की भावना को नई ऊर्जा देगा और ‘वंदे मातरम्’ को उसकी पूर्णता में स्थापित करेगा। सरकार का मानना है कि राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण बजने से युवा पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम की भावना से जुड़ेगी और उसका सम्मान करेगी।
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