
लखनऊ । लखनऊ के राष्ट्रधर्म प्रकाशन में भारतरत्न महामना मालवीय जी की 164वीं एवं अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयन्ती उल्लासपूर्वक मनायी गयी। कार्यक्रम का शुभारम्भ गणेश, महामना मदन मोहन मालवीय, दीनदयाल जी व अटल जी के चित्र पर राष्ट्रधर्म प्रकाशन लि., लोकहित प्रकाशन, नूतन ऑफसेट एवं प्रिंटिंग के कार्यकर्ता -परिवार द्वारा पुष्पार्चन कर किया गया।
महामना मालवीय व अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए ‘हिन्दुत्व की राष्ट्रीय दृष्टि’ विषयक मासिक गोष्ठी के अध्यक्षीय उद्बोधन में बाबूलाल शर्मा ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय महामना मालवीय का जीवन्त स्मारक है। जब विद्यार्थी मालवीय जी को प्रणाम करते थे तो वह आशीर्वाद स्वरूप सुभषित बोलते थे। अटल जी की कविता ‘गन में फहरता है भगवा हमारा’ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर पर ध्वज-स्थापना कर साकार किया है, इससे हमें अटल जी का पुण्य स्मरण होता है।
राष्ट्रधर्म प्रकाशन लि. के प्रभारी निदेशक सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने विषय की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा हिन्दू, हिन्दुत्व के बारे में जो कहा गया, उसके बाद सम्पूर्ण देश में चर्चा चल पड़ी। इस वक्तव्य के पक्ष व विपक्ष में अनेक तथ्य प्रकाश में आये। महामना मालवीय का गंगा, गायत्री, हिन्दुत्व के लिए योगदान अनुकरणीय है। वे राष्ट्र के अधिवक्ता थे। इन दोनों की हिन्दुत्व सम्बन्धी दृष्टि राष्ट्र के सापेक्ष उल्लेखनीय है। उन्होंने हिन्दुत्व की राष्ट्रीय दृष्टि व संविधन का तुलनात्मक विवेचन करते हुए कहा कि ‘सुकृति ही संस्कृति’ है और विश्व को युद्ध के बजाय समन्वय की ओर ले जाने में संघ प्रेरित विचारों की विशेष भूमिका है।
पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह ने अटलजी के पत्रकारिता से सम्बन्धित संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार व्याख्यान में समाचार-विश्लेषण को एक में मिलाने पर आपत्ति करते हुए बताया कि दोनों अलग-अलग हैं, उन्हें अलग-अलग प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अमित कुमार मल्ल ने कहा कि मन्दिर में समाज को जोड़ने की अद्भुत शक्ति है।राजीव द्विवेदी ने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भारत महाशक्ति है। भारत की शिक्षा व शासन पद्धति को प्राचीन भावभूमि पर लाने की आवश्यकता है।
शरद मिश्र ने कहा कि अटल जी लखनऊ के चप्पे-चप्पे पर मौजूद हैं, हिन्दुओं को एकजुट करने में विहिप की महती भूमिका है। अटल जी से सम्बन्धित संस्मरणें का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अन्तिम पायदान पर रहे लोगों से भी अटल जी जीवन्त सम्पर्क रखते थे। आज शक्ति की आवश्यकता है। इसी से परिवर्तन आयेगा।



