ईरान के राष्ट्रपति की ऐतिहासिक माफी…प्रदर्शनों के पीड़ितों के प्रति जताया दुख, परमाणु हथियारों की संभावना को नकारा

उनकी सरकार जनता के साथ किसी भी प्रकार का टकराव नहीं चाहती और देश में आंतरिक शांति बहाल करना उनकी प्राथमिकता है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 1979 की इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। तेहरान के आजादी स्क्वायर पर आयोजित एक भव्य स्मृति समारोह में बोलते हुए राष्ट्रपति ने देशव्यापी प्रदर्शनों और उसके बाद हुई सुरक्षा बलों की खूनी कार्रवाई से प्रभावित सभी लोगों और उनके परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान न केवल घरेलू स्तर पर जनता के असंतोष का सामना कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भारी दबाव में है।

विवादित प्रदर्शनों पर माफी और रुख

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने भाषण में स्वीकार किया कि वह हालिया विरोध प्रदर्शनों और सरकार की जवाबी कार्रवाई के दौरान जनता द्वारा झेले गए “गहरे दुख” को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, हम अपनी जनता के सामने शर्मिंदा हैं और उन सभी लोगों की सहायता करना हमारा कर्तव्य है जिन्हें इन घटनाओं में नुकसान पहुँचा है। हालांकि, राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए रक्तपात की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। इसके विपरीत, उन्होंने इन प्रदर्शनों को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा फैलाए गए कथित “दुष्प्रचार” की भी निंदा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार जनता के साथ किसी भी प्रकार का टकराव नहीं चाहती और देश में आंतरिक शांति बहाल करना उनकी प्राथमिकता है।

परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय दबाव

घरेलू मुद्दों के अलावा, राष्ट्रपति ने ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनका देश अपने परमाणु भंडार और सुविधाओं के किसी भी प्रकार के “सत्यापन और निरीक्षण” के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह बयान कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान वर्तमान में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत के दौर में है। हालांकि, स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हाल ही में रिपोर्ट दी थी कि वह पिछले कई महीनों से ईरान के परमाणु भंडार का सही तरीके से निरीक्षण करने में असमर्थ रही है।

ट्रंप की धमकी और क्षेत्रीय तनाव

ईरान के सामने चुनौतियां केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सैन्य भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए क्षेत्र में एक और विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) भेजने की खुली धमकी दी है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ईरान को अपनी शर्तों पर लाने के लिए “अधिकतम दबाव” की नीति जरूरी है। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

राष्ट्रपति के भाषण के दौरान एक तरफ सुलह की कोशिशें दिखीं, तो दूसरी तरफ क्रांति की वर्षगांठ के कारण हजारों समर्थकों ने अमेरिका विरोधी नारे भी लगाए। यह विरोधाभास दर्शाता है कि मसूद पेजेश्कियान की सरकार इस समय एक दोहरी चुनौती से जूझ रही है एक तरफ उन्हें अपने कट्टरपंथियों को खुश रखना है और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत पाने के लिए कूटनीतिक लचीलापन दिखाना है।

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