बांग्लादेश में आम चुनाव की कवरेज के लिए पाकिस्तान ने उतारी पत्रकारों की फ़ौज

ढाका। बांग्लादेश में कल 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने जा रहा है। इस 13वें संसदीय चुनाव और संविधान संशोधन पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह (रेफरेंडम) से ठीक पहले पाकिस्तान ने चुनाव की कवरेज के लिए मीडिया की एक बड़ी फ़ौज बांग्लादेश में उतार दी है।

30 से 48 पत्रकार पहुंचे बांग्लादेश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान से 30 से 48 तक पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि ढाका पहुंच चुके हैं। ये सभी कल होने वाले चुनाव को कवर करेंगे। यह संख्या इतनी बड़ी है कि, कुल विदेशी पत्रकारों में पाकिस्तानी मीडिया का हिस्सा काफी प्रमुख दिख रहा है। इन पत्रकारों की बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और चुनाव आयोग ख़ास खातिरदारी कर रहा है। इन पत्रकारों के रहने खाने और अन्य सुविधाओं का खर्च वहां की सरकार वहन कर रही है।

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सरकार उठा रही खर्च

आपको बता दें कि, ऐसा पहली बार हो रहा है, जब पाकिस्तान ने चुनाव कवरेज के लिए पत्रकारों की इतनी बड़ी फ़ौज बांग्लादेश में भेजी है और पाकिस्तान हाई कमीशन इनका जोरदार स्वागत कर रहा है। इन पत्रकारों के लिए विशेष डिनर रिसेप्शन का आयोजन किया, जिसमें हाई कमिश्नर इमरान हैदर ने प्रतिनिधिमंडल को संबोधित किया और पाकिस्तान-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों पर ब्रीफिंग दी।

बांग्लादेश

यह डिप्लोमैटिक स्तर पर पाकिस्तान की सक्रियता को दिखा रहा है, जो दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 197 विदेशी पत्रकार और 394 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर्स) चुनाव की निगरानी के लिए पहुंचे हैं। इनमें पाकिस्तान से 8 पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।

 मेहमानों की संख्या हुई 500 से अधिक  

कुल विदेशी मेहमानों की संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है, जिसमें यूरोपीय संघ, तुर्की, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका, चीन, जापान और अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। हालांकि, पाकिस्तानी पत्रकारों की संख्या सबसे अधिक है, जो विभिन्न रिपोर्टों में 40 से 48 तक बताई गई है। इनमें जियो न्यूज, एआरवाई न्यूज, समा न्यूज, पीटीवी न्यूज और पाकिस्तान टीवी जैसे प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क के पत्रकार शामिल हैं। साथ ही, सीनियर जर्नलिस्ट और सिविल सोसाइटी के प्रमुख व्यक्ति भी इस ग्रुप में हैं।

  ‘नैरेटिव बिल्डिंग’ की रणनीति

एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने घरेलू मीडिया आउटलेट्स को बांग्लादेश चुनाव की विस्तृत और सकारात्मक कवरेज देने के विशेष निर्देश जारी किए हैं। कुछ सदस्यों को पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों पर सकारात्मक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। यह कदम पाकिस्तान की ओर से ‘नैरेटिव बिल्डिंग’ की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने एक बातचीत में बताया था कि, पाकिस्तान ने आजादी के ठीक बाद नैरेटिव निर्माण के महत्व को समझ लिया था और सेना के लिए मीडिया विंग बनाया। वहीं, भारत ने इस पर कम ध्यान दिया। पाकिस्तान की सेना भी बांग्लादेश के चुनावी घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है।

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सुधर रहे संबंध

बता दें कि, बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी सुधार आया है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों में सैन्य सहयोग को मजबूत करने के प्रयास हुए हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद से लगातार तनावपूर्ण रहे संबंध अब बेहतर हो रहे हैं और यह चुनावी दौर उसकी एक मिसाल है।

शेख हसीना सरकार का पतन

बांग्लादेश में यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद पहला बड़ा लोकतांत्रिक परीक्षण है, जिसमें शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार का अंत हुआ था। अंतरिम सरकार के प्रमुख नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में सुधार प्रक्रिया चल रही है। चुनाव के साथ ही जुलाई नेशनल चार्टर पर रेफरेंडम भी हो रहा है, जिसमें संवैधानिक, चुनावी और संस्थागत सुधारों पर जनता की राय ली जा रही है। लगभग 12.7 करोड़ मतदाता 299 संसदीय सीटों (300 में से एक पर मतदान नहीं) के लिए वोट डालेंगे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मतदान सुबह 7:30 से शाम 4:30 बजे तक होगा। इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 1.5 लाख से अधिक पुलिसकर्मी, 1 लाख सैनिक और अन्य बल तैनात हैं। अधिकांश पोलिंग स्टेशनों पर सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। चुनाव आयोग का दावा है कि, यह चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण होगा। हालांकि, कुछ आलोचक इसे ‘अवैध’ करार दे रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे चुनाव पर नजर रखी जा रही है। आम चुनाव में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की यह मौजूदगी दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का संकेत है।

डिप्लोमैटिक स्तर पर भी अहम

पाकिस्तान हाई कमीशन ने प्राथमिकता के साथ वीजा और अन्य सुविधाएं प्रदान कीं। ढाका में उनके ठहरने का इंतजाम अंतरिम सरकार ने किया है। यह दौरे न केवल मीडिया कवरेज के लिए है, बल्कि डिप्लोमैटिक और रणनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश का यह दौर महत्वपूर्ण मोड़ पर है।

पाकिस्तान की सक्रिय भागीदारी से क्षेत्रीय गतिशीलता पर असर पड़ सकता है। क्या यह संबंधों में नई शुरुआत है या नैरेटिव कंट्रोल की कोशिश? समय बताएगा। फिलहाल, ढाका में पाकिस्तानी पत्रकारों की ‘फौज’ चुनावी माहौल को और रोचक बना रही है।

 

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