
बॉलीवुड में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल फिल्में नहीं बनाते, बल्कि समाज को आईना दिखाते हैं। ऐसा ही एक नाम है अनुभव सिन्हा का। पिछले 25 वर्षों से हिंदी सिनेमा में सक्रिय अनुभव सिन्हा ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लंबा संघर्ष झेला, असफलताओं का सामना किया और फिर एक नई सोच के साथ वापसी करके खुद को साबित किया। हाल ही में अपना 61वां जन्मदिन मनाने वाले अनुभव सिन्हा आज बॉलीवुड के उन चुनिंदा निर्देशकों में शुमार हैं जिनकी फिल्में दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती हैं।
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‘तुम बिन’ से की करियर की शुरुआत
अनुभव सिन्हा ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत रोमांटिक फिल्म ‘तुम बिन’ से की थी। यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उतर गई और इसे जबरदस्त लोकप्रियता मिली। फिल्म के गाने आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं।

‘तुम बिन’ की सफलता ने अनुभव सिन्हा को बॉलीवुड में एक मजबूत पहचान दिलाई और दर्शकों ने उनसे बड़ी उम्मीदें लगा लीं। इसके बाद उन्होंने ‘दस’, ‘तथास्तु’ और ‘कैश’ जैसी फिल्में बनाईं। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं, लेकिन अनुभव सिन्हा अपने प्रयोगों में लगे रहे। एक निर्देशक के रूप में वह हर बार कुछ नया करने की कोशिश करते रहे।
रा वन की असफलता ने हिलाया
अनुभव सिन्हा के करियर का सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चित प्रयोग था शाहरुख खान के साथ बनाई गई साइ-फाई एक्शन फिल्म ‘रा-वन’। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा प्रयोग था। इसमें विश्वस्तरीय विजुअल इफेक्ट्स, अत्याधुनिक तकनीक और एक अनोखी कहानी थी। फिल्म पर बड़ा बजट खर्च किया गया था और इससे भारी उम्मीदें जुड़ी थीं, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
‘रा-वन’ बॉक्स ऑफिस पर उस स्तर की सफलता हासिल नहीं कर सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इस असफलता ने अनुभव सिन्हा को गहरे तक हिला दिया। वह इतने मायूस और निराश हुए कि उन्होंने लगभग 6 से 7 साल तक कोई भी फिल्म निर्देशित नहीं की। यह उनके करियर का सबसे कठिन दौर था।
‘तुम बिन 2’ से की वापसी
हालांकि, इस लंबे अंतराल के दौरान अनुभव सिन्हा पूरी तरह फिल्म इंडस्ट्री से अलग नहीं हुए। वह स्क्रीनराइटर और प्रोड्यूसर के रूप में सक्रिय रहे और पर्दे के पीछे से काम करते रहे। इस समय का उपयोग उन्होंने खुद को नए सिरे से तैयार करने में किया।
लंबे वनवास के बाद अनुभव सिन्हा ने ‘तुम बिन 2’ के साथ वापसी की, लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और फ्लॉप साबित हुई। यह झटका किसी और निर्देशक को तोड़ देता, लेकिन अनुभव सिन्हा ने इस विफलता से सीखा और खुद को फिर से बदलने का फैसला किया।

इसी दौर में उन्होंने अपनी फिल्ममेकिंग की विचारधारा में एक बड़ा और साहसी बदलाव किया। उन्होंने तय किया कि, अब वह केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज के ज्वलंत मुद्दों पर फिल्में बनाएंगे। यह बदलाव उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। पिछले 8 सालों से हर साल उनकी कोई न कोई फिल्म जरूर आ रही है और हर फिल्म किसी न किसी सामाजिक विषय को केंद्र में रखकर बनाई गई है।
समाज में छिड़ी बहस
अनुभव सिन्हा की नई पारी में सबसे बड़ा योगदान रहा अभिनेत्री तापसी पन्नू के साथ उनकी जोड़ी का। दोनों ने मिलकर जो फिल्में बनाईं उन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया बल्कि समाज में एक जरूरी बहस भी छेड़ी। पहली बड़ी सफलता मिली फिल्म ‘मुल्क’ से, जो धार्मिक पहचान और न्याय व्यवस्था पर एक तीखा सवाल उठाती है। तापसी पन्नू और दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के साथ आई इस फिल्म ने 19 करोड़ रुपये के बजट में लगभग 30 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म को दर्शकों और आलोचकों दोनों ने खूब सराहा। यह फिल्म अनुभव सिन्हा की असली वापसी का ऐलान थी।
इसके बाद आई ‘थप्पड़‘ जो घरेलू हिंसा और महिला सम्मान के मुद्दे पर बनी एक बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली फिल्म थी। तापसी पन्नू के दमदार अभिनय और अनुभव सिन्हा के सशक्त निर्देशन से सजी यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और इसने लगभग 45 करोड़ रुपये का कारोबार किया। ‘थप्पड़’ ने समाज में एक गहरी और जरूरी बहस छेड़ी, कि क्या एक थप्पड़ भी गलत है? इस सवाल ने करोड़ों दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।

तापसी के साथ उनकी सबसे हालिया फिल्म ‘अस्सी’ 2026 में रिलीज हुई। भले ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन इसकी कहानी और प्रस्तुति की खूब तारीफ हुई। यह फिल्म भी अनुभव सिन्हा की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जिसमें वह हर बार एक नए और जरूरी मुद्दे को पर्दे पर लाते हैं।
आयुष्मान और तापसी की केमेस्ट्री है ख़ास
तापसी के अलावा अनुभव सिन्हा की आयुष्मान खुराना के साथ भी गजब की केमिस्ट्री रही है। दोनों ने साथ मिलकर दो फिल्में की हैं। इनमें से ‘आर्टिकल 15’ को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने हाथों-हाथ लिया। जाति भेदभाव और संविधान के अनुच्छेद 15 पर आधारित यह फिल्म बेहद सशक्त और साहसी थी। बॉक्स ऑफिस पर भी यह फिल्म बेहद सफल रही और इसने 90 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।
अनुभव सिन्हा का 25 साल का यह सफर केवल एक फिल्मकार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है जो असफलता के बाद भी हार नहीं मानता। ‘रा-वन’ की विफलता के बाद जब उन्होंने 7 साल का लंबा वनवास काटा और फिर नई विचारधारा के साथ वापसी की तो उन्होंने साबित किया कि असली प्रतिभा कभी खत्म नहीं होती। आज अनुभव सिन्हा बॉलीवुड के उन गिने-चुने निर्देशकों में हैं जो सिनेमा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का हथियार मानते हैं।
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