Friday , October 23 2020

श्रीकृष्णजन्मभूमि: मस्जिद हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज

– भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य लोगों ने दायर किया है वाद, रंजना बोलीं- भगवान कृष्ण की मुक्ति का समय निकट

लखनऊ। भगवान राम की नगरी अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बीच अब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण विरामजमान के नाम से शनिवार को दीवानी का केस दर्ज किया गया है। यह वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर’ के रूप में उनकी सखा और लखनऊ निवासी सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है।

शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग की गई

श्रीकृष्ण विराजमान ने भी मथुरा की कोर्ट में 13.37 एकड़ भूमि को लेकर सिविल मुकदमा दायर किया। इसके साथ ही बगल से शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग की गई है। यह केस मथुरा की अदालत में दायर किया गया है। इस केस में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक देने और वहां से इदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई है। यह वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री एवं छह अन्य लोगों ने दायर किया है। रंजना अग्निहोत्री ने फोन पर बताया कि अब मथुरा स्थित श्रीकृष्णजन्मभूमि के मुक्ति का समय आ गया है।

अदालत में दाखिल मामले में कहा गया है कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्‍ट ने श्रीकृष्‍ण से सम्‍बन्धित जन्‍मभूमि पर कब्‍जा कर लिया और ईश्‍वर के स्‍थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया। भगवान विष्‍णु के आठवें अवतार श्रीकृष्‍ण का जन्‍मस्‍थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि मंदिर परिसर का प्रशासन सम्‍भालने वाले श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान सेवा संस्‍थान ने सम्‍पत्ति के लिए शाही ईदगाह ट्रस्‍ट से एक अवैध समझौता किया। आरोप लगाया कि ‘श्री कृष्‍ण जन्‍मस्‍थान सेवा संस्‍थान’ श्रद्धालुओं के हितों के विपरीत काम कर है इसलिए धोखे से मस्जिद ईदगाह ट्रस्‍ट की प्रबंध समिति ने 1968 में सम्‍बन्धित सम्‍पत्ति के एक बड़े हिस्‍से को हथियाने का समझौता कर लिया।

इसके पहले मथुरा के सिविल जज की अदालत में एक और मामला दाखिल हुआ था जिसे श्रीकृष्‍ण जन्‍म सेवा संस्‍थान और ट्रस्‍ट के बीच समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया। 20 जुलाई 1973 को इस सम्‍बन्‍ध में अदालत ने एक निर्णय दिया था। अभी के विवाद में अदालत के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि विवादित स्‍थल को बाल श्रीकृष्‍ण का जन्‍मस्‍थान घोषित किया जाए।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर कोर्ट में सिविल सूट दायर किया गया है।  केस सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन के साथ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री ने दायर किया है। इनकी याचिका में जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया गया है। विष्णु शंकर जैन के साथ ही रंजना अग्निहोत्री आयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि वाले केस से भी जुड़े हैं। इस याचिका के माध्यम से 13.37 एकड़ की कृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व मांगा है। जिस पर मुगल काल में कब्जा कर शाही ईदगाह बना दी गई थी। शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से अंतरंग सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है।

अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री

इसमें साफ किया गया कि वादी कटरा केशव देव केवट, मौजा मथुरा बाजार के श्रीकृष्ण विराजमान हैं। वकील हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के मुताबिक यह मुकदमा मस्जिद ईदगाह प्रबंधन समिति ने अतिक्रमण को हटाने के लिए दायर किया गया है। वहीं दूसरी ओर मुकदमे में एक बड़ी रुकावट प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 है। इस एक्ट के मुताबिक आजादी के वक्त 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस एक्ट के तहत श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

अखाड़ा परिषद ने काशी-मथुरा पर उठाया था सवाल

कुछ दिन पहले प्रयागराज में अखाड़ा परिषद की बैठक में साधु-संत मथुरा कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर चर्चा की थी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने मथुरा की ईदगाह और काशी की ज्ञानवापी मस्जिद हटाने को अपने एजेंडा में शामिल किया है। संतों ने काशी-मथुरा के लिए लामबंदी शुरू भी कर दी है। अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज की अपनी बैठक में काशी और मथुरा के मंदिरों को मुक्त कराने का निर्णय लिया था। मथुरा में जिस भूमि पर ईदगाह मस्जिद है, उस भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि कहा जाता है

काशी विश्वनाथ पर भी शुरू हो चुकी है चर्चा

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मस्जिद हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमिपूजन कराने वाले वृंदावन के मुख्य पंडित गंगाधर पाठक ने पूजा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त होना चाहिए।

श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में सक्रिय रहीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्त होने का भी समय आ गया है। श्रीरामजन्मभूमि के बाद अब श्रीकृष्णजन्मभूमि के मुक्ति का समय भी निकट आ गया है। उन्होंने बताया कि षणयंत्रपूर्वक हिन्दू मंदिरों और प्रतीकों के खिलाफ मुगलकाल से लेकर अब तक अभियान चलाए गए। जाग्रत हिन्दू समाज अब और दिन प्रतीक्षा नहीं कर सकता है। मथुरा के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर से ज्ञानवापी मस्जिद को हटाने के लिए भी वाद दाखिल किया जाएगा।

‘औरंगजेब ने गिराया था मंदिर’

रंजना अग्निहोत्री की ओर से दायर ताजा मामले में कहा गया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड, ट्रस्ट मस्जिद ईदगाह या मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति को कटरा केशव देव की संपत्ति में कोई दिलचस्पी नहीं है। ये भूमि भगवान श्रीकृष्ण की है। इतिहासकार जदु नाथ सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कोर्ट से कहा कि 1669-70 में औरंगजेब ने कटरा केशवदेव स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद उनकी ओर से वहां पर एक ढांचा तैयार किया गया, जिसे ईदगाह मस्जिद कहा जाता था। इसके करीब 100 साल बाद मराठा योद्धाओं ने इस पूरे इलाके को जीत लिया और फिर मंदिर का विकास और जीर्णोद्धार करवाया।