SIP vs ULIP: 1 करोड़ रुपये का फंड बनाने के लिए कौन-सा निवेश विकल्प रहेगा फायदेमंद?

SIP vs ULIP: आज के दौर में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है और लोगों की वित्तीय जरूरतें बदल रही हैं, उसे देखते हुए हर व्यक्ति यह चाहता है कि भविष्य में उसके पास इतनी पूंजी जरूर हो कि, वह अपनी जरूरतों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सके। हालांकि, सिर्फ पैसा बचाकर रख देना ही काफी नहीं होता।

असली चुनौती यह होती है कि, आने वाले समय में घर खरीदने, बच्चों की उच्च शिक्षा या अन्य बड़े खर्चों को ध्यान में रखते हुए पैसे को सही जगह निवेश किया जाए। यही वजह है कि, निवेशक हमेशा ऐसे विकल्पों की तलाश में रहते हैं, जो लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने के साथ-साथ उनकी भविष्य की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।

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निवेश की दुनिया में मौजूद तमाम विकल्पों में से SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान और ULIP यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, दो ऐसे लोकप्रिय माध्यम हैं, जिन्हें अधिकांश निवेशक लंबी अवधि में पूंजी निर्माण के लिए चुनते हैं।

SIP vs ULIP

इन दोनों विकल्पों की अपनी-अपनी खासियतें और सीमाएं हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि, 1 करोड़ रुपये जैसा बड़ा फंड तैयार करने के लिए इन दोनों में से कौन-सा विकल्प ज्यादा उपयुक्त साबित हो सकता है।

क्या होता है SIP

SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक ऐसा तरीका है, जिसके जरिए निवेशक म्यूचुअल फंड में हर महीने एक निश्चित राशि नियमित रूप से निवेश करता है। इस निवेश पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इसमें बहुत छोटी रकम से भी शुरुआत की जा सकती है। इसके अलावा, अगर निवेशक लंबे समय तक अनुशासन के साथ निवेश करता रहे, तो उसे कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का जबरदस्त फायदा मिलता है, जिससे समय के साथ निवेश की गई रकम कई गुना बढ़ जाती है।

क्या होता है ULIP

दूसरी ओर, ULIP यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान एक ऐसा उत्पाद है जिसमें निवेश और जीवन बीमा दोनों का लाभ एक साथ मिलता है। इसमें निवेशक द्वारा जमा की गई राशि को दो हिस्सों में बांटा जाता है, एक हिस्सा जीवन बीमा कवर उपलब्ध कराने में इस्तेमाल होता है, जबकि बाकी हिस्सा बाजार से जुड़े फंड्स में निवेश किया जाता है।

हालांकि, ULIP में शुरुआती वर्षों के दौरान कई तरह के चार्जेज काटे जाते हैं, जिसकी वजह से शुरुआती दौर में मिलने वाला रिटर्न कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही, ULIP में आमतौर पर कम से कम पांच वर्षों का लॉक-इन पीरियड भी तय होता है, यानी निवेशक चाहकर भी इस अवधि से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकता।

SIP के जरिए कैसे बनेगा 1 करोड़ का फंड

अगर कोई निवेशक SIP के माध्यम से 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार करना चाहता है, तो इसके लिए उसे हर महीने करीब 10,000 रुपये का निवेश करना होगा। यह मानते हुए कि निवेश पर औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, यह फंड लगभग 21 वर्षों की अवधि में तैयार हो सकता है। इस दौरान निवेशक की कुल जमा राशि करीब 25.20 लाख रुपये होगी, जबकि कंपाउंडिंग के असर से यह रकम बढ़कर करीब 1.04 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यानी SIP में अगर निवेशक लंबी अवधि तक धैर्य के साथ निवेश जारी रखे, तो कंपाउंडिंग की ताकत से एक बड़ा फंड आसानी से तैयार किया जा सकता है।

ULIP के जरिए 1 करोड़ रुपये जुटाने का गणित

वहीं, अगर बात ULIP की करें, तो इसमें भी अगर निवेशक हर महीने 10,000 रुपये का निवेश करता है, तो अनुमानित रूप से 8 प्रतिशत सालाना रिटर्न के हिसाब से उसे लगातार करीब 14 वर्षों तक निवेश करना होगा। हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें कुल जमा राशि करीब 16.80 लाख रुपये होगी, लेकिन 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार होने में कुल मिलाकर करीब 30 वर्षों का लंबा समय लग सकता है, क्योंकि पैसे को लंबी अवधि तक निवेशित बनाए रखने के बाद ही यह लक्ष्य हासिल होता है। यानी ULIP में भले ही निवेशक को कम राशि निवेश करनी पड़े, लेकिन फंड तैयार होने में समय काफी ज्यादा लगता है।

 कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर

अब सवाल यह उठता है कि, आम निवेशक के लिए इन दोनों में से कौन-सा विकल्प ज्यादा उपयुक्त रहेगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक, अगर किसी निवेशक का मुख्य लक्ष्य सिर्फ लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार करना और अधिकतम रिटर्न हासिल करना है, तो ऐसी स्थिति में SIP एक बेहतर और तेज विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें कम समय में ही बड़ा फंड तैयार होने की संभावना रहती है।

SIP vs ULIP

वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई निवेशक सिर्फ निवेश ही नहीं बल्कि साथ में जीवन बीमा सुरक्षा भी चाहता है, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके, तो ऐसे निवेशकों के लिए ULIP एक ज्यादा उपयुक्त विकल्प हो सकता है। यानी दोनों ही निवेश माध्यमों की अपनी अलग-अलग खूबियां हैं और यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक की प्राथमिकता क्या है सिर्फ धन सृजन या फिर धन सृजन के साथ बीमा सुरक्षा भी।

निवेश से पहले बरतें सावधानी

बाजार से जुड़े इन दोनों ही निवेश विकल्पों में रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है, इसलिए यहां दिखाए गए आंकड़े केवल अनुमानित गणना पर आधारित हैं और वास्तविक रिटर्न इनसे अलग भी हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि निवेश से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले निवेशक को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों का सही आकलन जरूर कर लेना चाहिए। साथ ही, बेहतर होगा कि कोई भी निवेश करने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से संपर्क कर लिया जाए, ताकि निवेशक अपनी परिस्थितियों के अनुसार सबसे सही और सुरक्षित फैसला ले सके।

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नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और इसे वित्तीय सलाह न समझा जाए। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

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