Shopping Website: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा डिजिटल पंख, जल्द शुरू होगी शॉपिंग वेबसाइट

नई दिल्ली। देश में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है। इसी तेजी को और बढ़ावा देने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही खादी इंडिया उत्पादों के लिए एक नया, आधुनिक और यूजर-फ्रेंडली ई-कॉमर्स पोर्टल शुरू होने जा रहा है।

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आधुनिक तरीके से किया जायेगा पेश

पिछले वर्ष लगभग दो लाख करोड़ रुपये की बिक्री का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब आम उपभोक्ताओं, खासकर युवाओं के लिए खादी का एक नया डिजिटल खजाना खुलने वाला है। यह नया पोर्टल खादी को सिर्फ एक पारंपरिक उत्पाद नहीं बल्कि एक आधुनिक, फैशनेबल और मूल्यवान ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। खादी आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार ने पोर्टल की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस प्लेटफॉर्म को पूरी तरह मोबाइल-फर्स्ट डिजाइन किया गया है।

Khadi India

इससे युवा ग्राहक आसानी से कहीं भी और कभी भी खरीदारी कर सकेंगे। पोर्टल में हाई रिजॉल्यूशन इमेजेस, 360 डिग्री व्यू सुविधा, बेहतर और सुरक्षित भुगतान विकल्प जैसे UPI, डिजिटल वॉलेट और EMI शामिल होंगे। खास तौर पर शॉप द लुक फीचर ग्राहकों को पूरी पोशाक या लुक को एक साथ देखने और खरीदने की सुविधा देगा। आसान नेविगेशन और तेज लोडिंग स्पीड के साथ यह पोर्टल उत्पादों की कहानी, गांवों में बुनकरों की जिंदगी और खादी की समृद्ध विरासत को भी डिजिटल रूप में प्रस्तुत करेगा।

जेन जेड को आकर्षित करना है मकसद

मनोज कुमार ने जोर देकर कहा कि, इस पोर्टल का मुख्य लक्ष्य जेन-जेड युवाओं को खादी की ओर आकर्षित करना है। आज का युवा फैशन, स्थिरता और लोकल उत्पादों को पसंद करता है। खादी इन सभी पहलुओं को पूरा करती है। पोर्टल के माध्यम से ब्रांड की पूरी कहानी स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश की जाएगी। खादी उत्पादों की बिक्री में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्ष 2013-14 में खादी उत्पादों की बिक्री मात्र 31,154 करोड़ रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,87,105 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह लगभग छह गुना की वृद्धि है, जो खादी के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि और सरकारी प्रयासों का परिणाम है। आयोग ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में बिक्री 2.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। नए ई-कॉमर्स पोर्टल के शुरू होने से इस लक्ष्य को हासिल करना और आसान हो जाएगा।

बढ़ेगी खादी उत्पादों की पहुंच

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देश के कोने-कोने तक और विदेशों में भी खादी उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी। खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र न केवल स्वदेशी उत्पादन का प्रतीक है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का माध्यम भी है। वर्ष 2013-14 में इस क्षेत्र में कुल रोजगार 1.30 करोड़ लोगों को मिलता था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है। यानी पिछले 12 वर्षों में करीब 74 लाख अतिरिक्त लोगों को खादी से जुड़े कार्यों के माध्यम से रोजगार मिला है। यह आंकड़ा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में खादी की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

Khadi India

इस उपलब्धि में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम के तहत 66,494 नई इकाइयां स्थापित की गईं, जिससे 7,31,434 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। इसके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए और 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कुटीर उद्योग को मिलेगी ताकत

खादी उत्पादन इकाइयों की स्थापना से न सिर्फ रोजगार बढ़ रहा है, बल्कि कुटीर उद्योगों को भी नई ताकत मिल रही है। नए खादी इंडिया पोर्टल का शुभारंभ खादी को 21वीं सदी के डिजिटल युग से जोड़ने का प्रयास है। यह पोर्टल केवल बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं बल्कि गांवों के बुनकरों, कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों को सीधे बाजार से जोड़ने का पुल भी बनेगा। सरकार का लक्ष्य है कि खादी को ग्लोबल ब्रांड बनाया जाए। ऑर्गेनिक, हैंडमेड और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग पूरी दुनिया में बढ़ रही है।

भारत इस अवसर का लाभ उठाकर खादी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती से स्थापित कर सकता है। चेयरमैन मनोज कुमार ने विश्वास जताया कि, नया पोर्टल न सिर्फ बिक्री को नई ऊंचाई देगा बल्कि खादी की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी सफल रहेगा। खादी अब सिर्फ एक कपड़ा नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत, ग्रामीण विकास और सस्टेनेबल फैशन का प्रतीक बन चुका है।

नए ई-कॉमर्स पोर्टल के साथ खादी का सफर और तेज होने वाला है। जब जेन-जेड खादी को अपनाएगा तो न सिर्फ अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी नई पीढ़ी में जीवंत रहेगी। देश की स्वतंत्रता की याद दिलाने वाला खादी का चरखा अब डिजिटल युग में नई कहानी लिखने को तैयार है।

 

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