योगी सरकार का बड़ा फैसला, एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए लागू हुई पुनर्वास नीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने एसिड अटैक पीड़िताओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने पीड़िताओं के लिए एक व्यापक सहायता एवं पुनर्वास नीति लागू करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सरकारी योजनाओं और आर्थिक मदद का एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव द्वारा जारी की गई इस विस्तृत नीति के तहत पीड़िताओं को न सिर्फ त्वरित आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें आजीवन मुफ्त इलाज, पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की संपूर्ण व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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10 लाख रुपये तक मिलेगी क्षतिपूर्ति 

सरकार की नई पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता की एक समयबद्ध व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि पीड़िता और उसके परिवार को इलाज के लिए यहां-वहां भटकना न पड़े। इस नीति के मुताबिक, हमले में हुई क्षति की गंभीरता के आधार पर पीड़िताओं को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।

acid attack victims

इसके अलावा हमले के तुरंत बाद प्राथमिक इलाज और तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 1 लाख रुपये की अंतरिम राहत राशि 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पीड़िता को हस्तांतरित की जाएगी। वहीं बाकी बची हुई क्षतिपूर्ति राशि की पूरी जांच-पड़ताल के बाद तीन महीने यानी 90 दिनों के भीतर पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

इलाज भी होगा मुफ्त

एसिड अटैक की घटनाओं में पीड़िताओं को जिस तरह के गंभीर घाव झेलने पड़ते हैं और जिस तरह की शारीरिक-मानसिक पीड़ा वे जीवनभर सहती हैं, उसे देखते हुए राज्य सरकार ने मुफ्त और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। नई नीति के अनुसार, पीड़िताओं के पूरे मेडिकल इलाज का खर्च राज्य सरकार खुद वहन करेगी। इसमें बहुचरणीय यानी मल्टी-स्टेज सर्जरी, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, आंखों से जुड़ी चिकित्सा सेवाएं, त्वचा प्रत्यारोपण यानी स्किन ग्राफ्टिंग, सर्जरी के बाद की फिजियोथेरेपी और मानसिक-शारीरिक पुनर्वास से जुड़ी तमाम सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

 6 बड़े मेडिकल कॉलेज बनेंगे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

पीड़िताओं को एक ही जगह पर विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराने के मकसद से सरकार ने प्रदेश के छह बड़े मेडिकल कॉलेजों की बर्न यूनिट्स को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया है।  जैसे कि…

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ
बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर
लाला लाजपत राय स्मारक (LLRM) मेडिकल कॉलेज, मेरठ
मोतीलाल नेहरू (MLN) मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी
एसएन (SN) मेडिकल कॉलेज, आगरा

बताया गया है कि, इन सभी छह संस्थानों में बर्न और एसिड इंजरी से जुड़े इलाज की सभी आधुनिक और मान्यता प्राप्त तकनीकें अब चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी, जिससे पीड़िताओं को इलाज के लिए एक जगह से दूसरी जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आवास योजनाओं में भी मिलेगा आरक्षण

पुनर्वास नीति के तहत पीड़िताओं को सामाजिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें एक स्थायी ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए भी बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। सरकार ने तय किया है कि, जिस तरह पूर्व सैनिकों को आरक्षण की सुविधा मिलती है, ठीक उसी तर्ज पर विकास प्राधिकरणों और आवासीय योजनाओं में भूखंड व मकान आवंटन के दौरान एसिड पीड़िताओं को 1 प्रतिशत का विशेष आरक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में आवास विभाग के संयुक्त सचिव गिरीश चंद्र मिश्र की ओर से आधिकारिक शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।

इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में रहने वाली पात्र पीड़िताओं को प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर निःशुल्क पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें सिर छिपाने के लिए किसी और पर निर्भर न रहना पड़े।

मुफ्त होगी शिक्षा

सरकार की इस नीति में पीड़िताओं की शिक्षा को भी खास प्राथमिकता दी गई है। एसिड अटैक पीड़िताओं को चाहे वे अपनी बीच में छूटी पढ़ाई दोबारा शुरू करना चाहें या फिर कोई नई कौशल शिक्षा (स्किल एजुकेशन) प्राप्त करना चाहें, दोनों ही सूरत में उन्हें संपूर्ण शिक्षा बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि, शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए पीड़िताएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मान के साथ जी सकती हैं।

जीवन में नई शुरुआत की पहल

उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई पुनर्वास नीति सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एसिड अटैक जैसी वीभत्स त्रासदी झेल चुकी महिलाओं के भीतर आत्मसम्मान, संबल और नई उम्मीद जगाने की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि समय पर मिलने वाला इलाज, सरकारी आरक्षण और वित्तीय सुरक्षा पीड़िताओं के जीवन में एक नई शुरुआत ला सकते हैं, जिससे वे समाज में सिर उठाकर और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नीतियां न सिर्फ पीड़िताओं को तत्काल राहत पहुंचाती हैं, बल्कि लंबे समय में उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सरकार के इस कदम को मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक सराहनीय पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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