राम मंदिर दान चोरी विवाद: बिना जेब के कपड़े, CCTV ब्लाइंड स्पॉट… कैसे हुई करोड़ों की चोरी? उजागर हुईं खामियां

अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मामला इन दिनों जोरों पर है। इस पूरे विवाद ने न सिर्फ धार्मिक बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। मामला 7 जून को उस वक्त सामने आया जब समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उनके मुताबिक, मंदिर में रोजाना भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान में से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन किया गया है। पांडे ने आरोप लगाया कि, इस पूरे हेरफेर के पीछे मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों का हाथ है।

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मामले ने पकड़ा राजनीतिक रंग

देखते ही देखते यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए इस पर स्पष्ट जवाब मांगा। इसके बाद बीजेपी के एक स्थानीय गुट ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस दबाव का सीधा असर मंदिर की देखरेख करने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ पर पड़ा।

Ram temple donation scam

मामला तब और गंभीर हो गया जब मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और ट्रस्ट सदस्य नृपेंद्र मिश्र ने खुद स्वीकार किया कि, दान राशि की गिनती और उसे संभालने की मौजूदा व्यवस्था में कई खामियां हैं। उन्होंने पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए एक प्रोफेशनल सीईओ की नियुक्ति करने का सुझाव भी दिया।

शुरुआत में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन जैसे-जैसे दबाव बढ़ता गया, ट्रस्ट को यूपी सरकार से जांच की मांग करनी पड़ी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया।

वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

महज एक हफ्ते के भीतर SIT ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें दान प्रबंधन प्रणाली में गंभीर प्रक्रियात्मक कमजोरियों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि, चढ़ावे को संभालने वाली पूरी व्यवस्था में बड़े ढांचागत बदलावों और सख्त निगरानी की जरूरत है।

जांच के दौरान अब तक आठ लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इनमें दान की गिनती करने वाली आउटसोर्स एजेंसी के छह कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा चंपत राय के लंबे समय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू यादव और गिनती कार्य की निगरानी करने वाले सुभाष श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया गया है। इस पूरे प्रकरण ने देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे होती है दान की गिनती

मंदिर परिसर से करीब 200 मीटर दूर स्थित तीर्थयात्री सुविधा केंद्र इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र है। यहां बेसमेंट में एक गणना हॉल है, जहां मंदिर के 40 दान पात्रों से जमा राशि और अन्य सामान लाया जाता है।

गिनती का काम दो शिफ्टों में होता है, सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलता है। हर शिफ्ट में करीब 20 गिनती करने वाले कर्मचारी एक साथ काम करते हैं। सुरक्षा के तहत इन्हें बिना जेब वाले कपड़े पहनने होते हैं और तय ब्रेक को छोड़कर शिफ्ट के दौरान बाहर जाने की अनुमति नहीं होती।

पूरी व्यवस्था की देखरेख अब तक ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा करते थे, जिन्होंने हाल ही में इस्तीफा दे दिया है। कैश-हैंडलिंग की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सौंपी गई है, जिसमें SBI और TCS के कर्मचारी ऑपरेशनल हेड की भूमिका निभाते हैं। हर शिफ्ट में एक इंचार्ज और हर 4-5 कर्मचारियों पर एक सुपरवाइजर तैनात रहता है।

कहां-कहां हुई चूक

SIT द्वारा जुटाए गए सबूतों से पता चलता है कि, गड़बड़ी मुख्य रूप से तीसरे और चौथे चरण यानी गिनती और पैकिंग के दौरान हुई, जब आउटसोर्स कर्मचारी तय प्रक्रिया का पालन किए बिना बड़ी मात्रा में नकदी संभाल रहे थे। लिखित दिशा-निर्देश मौजूद होने के बावजूद उनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ, जिससे पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ गई।

सबसे पहली चूक यह रही कि बिना जेब वाले कपड़ों का नियम व्यवहार में लागू ही नहीं हुआ, जिससे कर्मचारियों को नकदी छिपाने का मौका मिल गया। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोगों को नकदी के बंडल तय ट्रे या सीलबंद कंटेनर की बजाय सीधे हाथों-हाथ सौंपते देखा गया।

Ram temple donation scam

निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर जानबूझकर खुद को कैमरों के सामने इस तरह खड़ा किया कि रिकॉर्डिंग में अस्थायी ब्लाइंड स्पॉट बन गए। इससे भी बड़ी बात यह रही कि सीसीटीवी फुटेज सिर्फ 45 दिनों बाद अपने आप ओवरराइट हो जाती थी, जिससे पुरानी रिकॉर्डिंग की जांच करना नामुमकिन हो गया, जो लंबे समय से चली आ रही चोरी के पैटर्न को उजागर कर सकती थी।

कर्मचारियों की प्रवेश और निकासी के दौरान होने वाली तलाशी भी निजी सुरक्षाकर्मियों के भरोसे थी, लेकिन इसकी कोई सुनिश्चित और सटीक प्रक्रिया मौजूद नहीं थी। इससे शक है कि नकदी अनधिकृत तरीके से बाहर ले जाई गई हो।

जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बंटी हुई नहीं थीं, जिससे किसी खास चरण में गड़बड़ी होने पर जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया। कुछ कीमती सामानों के रिकॉर्ड में भी विसंगतियां मिली हैं, जिसके बाद अब पूरी इन्वेंट्री व्यवस्था का गहन ऑडिट किया जा रहा है।

हर चरण में इंसानी दखल बना कमजोर कड़ी

सबसे बड़ी समस्या यह रही कि, पूरा दान प्रबंधन सिस्टम काफी हद तक मैनुअल यानी हाथों से किए जाने वाले काम पर निर्भर था। दान पात्रों से पैसा निकालने से लेकर, कंटेनर में भरने, गिनती हॉल तक ले जाने, छंटाई, गिनती, पैकिंग, सीलिंग और आखिर में बैंक में जमा कराने तक,  हर चरण में कई लोगों का हाथ था। इतने सारे मानवीय हस्तक्षेप वाले चरणों ने राशि में हेरफेर की संभावनाएं कई गुना बढ़ा दीं।

अब SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हर ट्रांसफर पॉइंट पर मजबूत ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतंत्र सत्यापन की कमी का फायदा उठाकर औपचारिक मिलान से पहले ही दान राशि निकाली जाती रही। इस पूरे मामले ने देशभर में धार्मिक ट्रस्टों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में इस जांच से और भी कई खुलासे होने की उम्मीद है।

 

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