
बहराइच। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। सभी राजनीतिक दल मैदान में आ चुके हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वहीं अब इस सियासी महासमर में एक ऐसा दिलचस्प मोड़ आ गया है, जो समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। दरअसल, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM ने उत्तर प्रदेश में अपना पहला प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है।
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पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच जिले की मटेरा विधानसभा सीट से AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस ऐलान के साथ ही मटेरा सीट पर चुनावी पारा चढ़ गया है और प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है।
जनसभा में हुआ ऐलान
बहराइच में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान ओवैसी ने जब मंच से शौकत अली का नाम प्रत्याशी के तौर पर घोषित किया तो वहां मौजूद समर्थकों में जोश और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ओवैसी ने कहा,क्या मैं शौकत अली को यहां से कैंडिडेट घोषित करूं? और जब भीड़ ने जोरदार समर्थन दिया तो उन्होंने आगे कहा, आपकी इजाजत और आपकी मंजूरी पर हमने शौकत अली को मटेरा विधानसभा से अपना उम्मीदवार घोषित किया।

ओवैसी ने इस मौके पर बड़ा वादा करते हुए कहा कि मटेरा में, बहराइच में और पूरे उत्तर प्रदेश में AIMIM अपनी इत्तेहाद यानी एकजुटता की ताकत पर पूरा चुनावी खेल बदल कर रख देगी। उनके इस दावे ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई AIMIM यूपी की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर कर सकती है।
मटेरा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
मटेरा विधानसभा सीट इस समय समाजवादी पार्टी के कब्जे में है। यहां से सपा की विधायक मारिया शाह हैं जो पूर्व मंत्री यासिर शाह की पत्नी हैं। सपा का इस सीट पर पुराना और मजबूत जनाधार रहा है, लेकिन अब AIMIM के मैदान में कूदने से सियासी समीकरण उलझते नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या AIMIM के प्रत्याशी के आने से मुस्लिम वोट बंट जाएगा? इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है और अगर यह वोट सपा और AIMIM के बीच विभाजित हो गया तो इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह दांव जितना मुस्लिम समाज को एकजुट करने का प्रयास लगता है, उतना ही यह विपक्षी दलों के लिए चुनौती भी बन सकता है।
ओवैसी ने दिखाए आक्रामक तेवर
AIMIM प्रमुख इस बार यूपी में बेहद आक्रामक मूड में दिखे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में अब मजलिस का परचम लहराएगा। उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा रहा जब उन्होंने कहा, हमें न बुलडोजर का डर है और न एनकाउंटर का। यह बयान सीधे तौर पर यूपी सरकार की उन नीतियों पर निशाना साधता है जिनकी विपक्षी दल अक्सर आलोचना करते आए हैं।
ओवैसी ने यह भी कहा कि आई लव मुहम्मद कहने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे। यह बयान उनके उस रुख को दर्शाता है जिसमें वे किसी भी दबाव में अपनी धार्मिक पहचान से समझौता नहीं करने की बात करते हैं। उनके इन बयानों ने जहां समर्थकों में जोश भर दिया, वहीं विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
सीएम योगी पर साधा निशाना
जनसभा में ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वे यूपी के सीएम को बताना चाहते हैं कि संविधान की धारा 48 क्या कहती है। उन्होंने राष्ट्रीय कामधेनू आयोग और राष्ट्रीय गोकुल मिशन का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब ये सरकारी संस्थाएं और मिशन पहले से मौजूद हैं तो फिर गाय के नाम पर जो राजनीति की जा रही है उसका क्या औचित्य है?
ओवैसी ने यह भी सवाल किया कि क्या बीजेपी के लोग इंसान नहीं हैं? साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा बीफ एक्सपोर्टर बन चुका है, तो फिर गाय के नाम पर जो राजनीति होती है वह किस आधार पर उचित ठहराई जा सकती है? उनके इन सवालों ने सत्तारूढ़ दल के रुख पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
लखनऊ की राजनीति पर असर
जानकारों का कहना है कि AIMIM का यूपी में सक्रिय होना केवल मटेरा तक सीमित नहीं रहेगा। बहराइच से शुरू हुआ यह सियासी सफर आगे चलकर पूरे प्रदेश में पार्टी के विस्तार की नींव बन सकता है। इसका सीधा असर लखनऊ की राजनीति पर भी पड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में AIMIM का प्रभाव चुनावी गणित को बदल सकता है। अब देखना यह होगा कि शौकत अली मटेरा की जनता का विश्वास जीत पाते हैं या नहीं और क्या AIMIM यूपी में अपनी नई पारी की शुरुआत सफलतापूर्वक कर पाती है। यह चुनाव न केवल मटेरा बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति के लिए एक अहम परीक्षा साबित होगा।
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