
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर कई जगह सड़क धंसने की घटनाओं के बाद इसकी तकनीकी खामियों का पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम ने जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब चार घंटे तक गहन छानबीन की, जिसमें एक अहम खुलासा हुआ।
ग्रीनफील्ड एरिया में सड़क की सतह के कई फुट नीचे तक जमीन में नमी पाई गई, जिसे विशेषज्ञ सड़क टूटने की सबसे बड़ी वजह मान रहे हैं। जांच टीम ने मौके से मिट्टी और डामर के नमूने एकत्र कर उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया है।
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चार घंटे तक चली पड़ताल
शुक्रवार को आईआईटी खड़गपुर, एक स्वतंत्र लेबोरेटरी और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की संयुक्त टीम एक्सप्रेस-वे पर पहुंची और निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की। टीम के सदस्यों ने करीब चार घंटे तक लगातार जांच-पड़ताल की। सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले टीम ने किलोमीटर 60 के आसपास स्थित उन्नाव क्षेत्र के ग्रीनफील्ड एरिया की जांच शुरू की, क्योंकि यहीं पर सबसे पहले सड़क धंसने की घटना सामने आई थी।

टीम के सदस्यों ने इस इलाके में सड़क के कई फीट नीचे तक खुदाई कर मिट्टी के नमूने निकाले, जो जांच के दौरान गीली पाई गई। इस शुरुआती जांच से यह संकेत मिल रहा है कि, निर्माण के दौरान मिट्टी और गिट्टी की परत बिछाने में लापरवाही बरती गई थी, जिसके चलते बारिश का पानी सड़क के अंदर काफी गहराई तक रिसता चला गया। विशेषज्ञों का मानना है कि, मिट्टी की समुचित पटान न होना भी इस समस्या की एक बड़ी वजह हो सकती है।
ड्रेनेज सिस्टम में भी मिली बड़ी खामी
जांच के दौरान एक्सप्रेस-वे के जल निकासी यानी ड्रेनेज सिस्टम में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, बारिश का पानी सड़क से बाहर निकलने के बजाय सड़क के भीतर ही जमा होता रहा। इसी वजह से जब भारी वाहन एक्सप्रेस-वे से गुजरे, तो पानी से कमजोर हो चुकी सड़क नीचे दबकर टूट गई।
संयुक्त जांच टीम के सदस्यों ने चार घंटे से भी अधिक समय तक एक्सप्रेस-वे के अप और डाउन, दोनों मार्गों पर सफर करते हुए बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने जरूरी नमूने एकत्र करने के साथ-साथ खराबी वाले स्थानों की तस्वीरें भी लीं, ताकि रिपोर्ट में हर पहलू का विस्तृत ब्योरा दर्ज किया जा सके।
इस बीच, एक्सप्रेस-वे का निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजी अपनी सूचना में स्पष्ट किया है कि परियोजना के निर्माण कार्य में सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया था। कंपनी ने इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए यह दावा पेश किया है।
कहीं तीखा मोड़, तो कहीं ज्यादा ढलान
जांच टीम का नेतृत्व कर रहे आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी ने एक्सप्रेस-वे के हर संवेदनशील बिंदु का बारीकी से मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि, लखनऊ से कानपुर की तरफ जाते समय एक्सप्रेस-वे पर मोड़ यानी घुमाव कुछ ज्यादा ही तीखा है। इस पर मौजूद एनएचएआई अधिकारियों ने प्रोफेसर को जानकारी दी कि, उस स्थान के नीचे से एक नदी गुजरती है, जिसकी वजह से सड़क को मोड़ देना तकनीकी रूप से जरूरी था।

वहीं दूसरी ओर, कानपुर से लखनऊ आने वाले मार्ग पर ढलान यानी स्लोप ज्यादा पाया गया, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि इससे सड़क की समग्र गुणवत्ता और मजबूती पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, जांच टीम आगामी चार से पांच दिनों तक संयुक्त रूप से एक्सप्रेस-वे के विभिन्न हिस्सों की गहन पड़ताल जारी रखेगी, ताकि सड़क धंसने के हर संभावित कारण का पता लगाया जा सके।
प्रयोगशाला में भेजे जा रहे नमूने
एक्सप्रेस-वे की जांच में जुटी टीम ने मौके से एकत्रित किए गए नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही टीम स्थलीय निरीक्षण के आधार पर बिंदुवार विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला से मिलने वाली तकनीकी जांच रिपोर्ट और मौके पर किए गए स्थलीय निरीक्षण, दोनों के आधार पर एक समग्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि, इस पूरी प्रक्रिया में अभी कुछ और समय लग सकता है, क्योंकि प्रयोगशाला जांच और तकनीकी विश्लेषण में सावधानी बरतना जरूरी है।
जांच पर टिकीं निगाहें
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे, जो दोनों शहरों के बीच यातायात को सुगम बनाने के मकसद से बनाया गया था, उसमें बार-बार सामने आ रही खामियों को लेकर स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों में चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि, इतने महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग पर बार-बार सड़क धंसने की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
ऐसे में सभी की निगाहें आईआईटी खड़गपुर की टीम की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर जिम्मेदार एजेंसियों और निर्माण कंपनी की जवाबदेही तय की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि, सड़क की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण से पहले इन तकनीकी खामियों की पूरी तरह पहचान करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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