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सपा की हकीकत पहचान चुका दलित-मजदूर वर्ग: अनिल राजभर
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोला है। उनका कहना है कि, हर मोर्चे पर असफल रहने के बाद अब सपा जाति के नाम पर जहर फैलाने की सियासत करने में जुट गई है, लेकिन इससे उसे किसी तरह का लाभ नहीं मिलने वाला। राजभर ने साफ कहा कि, सपा एक यात्रा निकाले या सौ, आम जनता अब उसके फंदे में फंसने वाली नहीं है।
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पीडीए रथ यात्रा सिर्फ धोखा है
राजभर के अनुसार, पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह से छलावा है। यूपी के पिछड़े, दलित, वंचित और श्रमिक तबके सपा के असली चरित्र को अच्छी तरह जान चुके हैं। उन्होंने आरोप जड़ते हुए कहा कि सपा जब भी सत्ता में आती है, गरीबों की सुध लेना भूल जाती है, बल्कि पूरा सैफई कुनबा राज्य की संपत्ति को हड़पने में जुट जाता है। अब वही लोग नया रूप धारण कर पिछड़ों और दलितों को बहकाने की कोशिश में लगे हैं, मगर जनता इनकी चाल को अच्छी तरह से समझती है।
सपा पहले तय करे, पीडीए है क्या
राजभर ने कहा, समाजवादी पार्टी को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि, आखिर पीडीए का मतलब क्या है। पार्टी के भीतर के नेता ही इसे लेकर उलझन में नजर आते हैं और हर बार इसकी नई-नई व्याख्या पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि, ऐसी सियासी चालबाजियों का कोई असर पड़ने वाला नहीं, और जब चुनाव नजदीक आएंगे, तो सपा का कहीं नामोनिशान तक नहीं मिलेगा।

इसी दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़े कॉलम जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई आपत्ति से जुड़े सवाल पर राजभर ने कहा कि, हाल की घटनाओं से यह जाहिर है कि, पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ अंजाम दी गई है। चुनाव आयोग किसी भी मामले में स्थापित नियमों और परंपराओं के तहत आपसी विचार-विमर्श और गहन चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लेता है। उन्होंने जोड़ा कि मतभेद होना लोकतांत्रिक फैसले की प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा माना जाता है।
कल्याण सिंह के परिजनों से कब मिलेंगे अखिलेश
उधर, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति को निशाने पर लिया। रायबरेली स्थित सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि, नेताओं के घर जाना कोई गलत बात नहीं, लेकिन अखिलेश को यह भी जवाब देना चाहिए कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से मिलने वे अब तक क्यों नहीं पहुंचे।
सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री रहे व्यक्ति के परिवार के प्रति संवेदना और शिष्टाचार दिखाना चाहिए था। अगर अखिलेश कल्याण सिंह के घर जाकर श्रद्धांजलि देते और संवेदना जताते, तो यह कोई राजनीतिक कदम नहीं बल्कि इंसानियत और संवैधानिक गरिमा की एक बेहतरीन मिसाल बनती। उन्होंने कहा कि, अब जबकि अखिलेश लोध समुदाय के बीच पहुंचने वाले हैं, तो उन्हें अपने पुराने रवैये का भी जवाब देना होगा।
पीडीए यानी ‘हमेशा के लिए बंटा गठबंधन’
पीडीए रथ यात्रा पर तंज कसते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक मतलब ‘परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस’ है। उनके मुताबिक, आज न तो पिछड़ा तबका, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समुदाय सपा के साथ खड़ा नजर आता है, बल्कि पिछड़ा वर्ग पूरी मजबूती से एनडीए के साथ जुड़ा हुआ है।
सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश भर में ऐसे पोस्टर-बैनर लगाए जा रहे हैं, जिनमें अखिलेश यादव से सवाल पूछा जा रहा है कि दलितों पर हो रहे अत्याचार आखिर कब खत्म होंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितनी भी नई छवि गढ़ने की कोशिश करे, यूपी की जनता उसका असली चेहरा पहचान चुकी है और सही मौका आने पर वह अपना जवाब जरूर देगी।
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